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लखनऊ में आज का चौघड़िया

आज का चौघड़िया: सूर्योदय से सूर्यास्त तक दिन के आठ और सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक रात के आठ चौघड़िया, हर एक पर अनुकूल, सामान्य या प्रतिकूल का निशान — साथ में उसी दिन का अभिजित व ब्रह्म मुहूर्त और राहु काल, यमगंड व गुलिक काल।

लखनऊ, उत्तर प्रदेश (IST (UTC+5:30)) का समय — शहर के अपने सूर्योदय और सूर्यास्त से गिना गया।

शनिवार, 17 अक्टूबर 2026

लखनऊ, उत्तर प्रदेश · IST (UTC+5:30)

  • सूर्योदय06:07
  • सूर्यास्त17:36
  • अगला सूर्योदय06:07

मुख्य समय

  • अभिजित मुहूर्त11:28 – 12:14
  • ब्रह्म मुहूर्त04:27 – 05:17
  • राहु काल08:59 – 10:25
  • यमगंड13:18 – 14:44
  • गुलिक काल06:07 – 07:33

दिन का चौघड़िया

चौघड़ियासमयप्रकृति
कालशनि06:07 – 07:33प्रतिकूलगुलिक काल
शुभगुरु07:33 – 08:59अनुकूल
रोगमंगल08:59 – 10:25प्रतिकूलराहु काल
उद्वेगसूर्य10:25 – 11:51प्रतिकूल
चरशुक्र11:51 – 13:18सामान्य
लाभबुध13:18 – 14:44अनुकूलयमगंड
अमृतचंद्र14:44 – 16:10अनुकूल
कालशनि16:10 – 17:36प्रतिकूल

रात का चौघड़िया

चौघड़ियासमयप्रकृति
लाभबुध17:36 – 19:10अनुकूल
उद्वेगसूर्य19:10 – 20:44प्रतिकूल
शुभगुरु20:44 – 22:18अनुकूल
अमृतचंद्र22:18 – 23:52अनुकूल
चरशुक्र23:52 – 01:26सामान्य
रोगमंगल01:26 – 02:59अगले दिनप्रतिकूल
कालशनि02:59 – 04:33अगले दिनप्रतिकूल
लाभबुध04:33 – 06:07अगले दिनअनुकूल

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटता है, और सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक की रात को आठ और भागों में। हर भाग लगभग चार घड़ी का होता है — इसी से नाम बना, चौ (चार) और घड़िया — यानी मोटे तौर पर डेढ़ घंटा: गर्मी के दिनों में लंबा और सर्दी में छोटा। दिल्ली में दिन का एक चौघड़िया दिसंबर के अंत में लगभग 77 मिनट का और जून के अंत में लगभग 105 मिनट का होता है।

हर चौघड़िया का एक स्वामी ग्रह है, एक तय क्रम में: सूर्य (उद्वेग), शुक्र (चर), बुध (लाभ), चंद्र (अमृत), शनि (काल), गुरु (शुभ) और मंगल (रोग)। दिन का पहला चौघड़िया वार के स्वामी का होता है — रविवार उद्वेग से, सोमवार अमृत से, मंगलवार रोग से, बुधवार लाभ से, गुरुवार शुभ से, शुक्रवार चर से और शनिवार काल से शुरू होता है — और आठवाँ फिर उसी पर लौटता है। रात उसी क्रम में पाँच स्थान आगे से शुरू होती है और हर बार पाँच स्थान आगे बढ़ती है।

शुभ और अशुभ चौघड़िया

अमृत, शुभ और लाभ अनुकूल चौघड़िया हैं और चर सामान्य; उद्वेग, काल और रोग किसी नए काम के लिए टाले जाते हैं। फिर भी परंपरा में हर एक का कुछ उपयोग है:

  • उद्वेग (सूर्य) — टालें — पर सरकारी काम के लिए ठीक माना जाता है
  • चर (शुक्र) — सामान्य — यात्रा के लिए सबसे अच्छा
  • लाभ (बुध) — लाभ — व्यापार, लेन-देन, पढ़ाई
  • अमृत (चंद्र) — सर्वोत्तम — हर शुभ कार्य की शुरुआत
  • काल (शनि) — टालें — परंपरा से केवल धन-संचय के काम
  • शुभ (गुरु) — शुभ — मांगलिक कार्य, विवाह, पूजा
  • रोग (मंगल) — टालें — परंपरा से केवल विवाद या प्रतियोगिता

अभिजित, ब्रह्म मुहूर्त, राहु काल, यमगंड और गुलिक

अभिजित मुहूर्त दिन के पंद्रह मुहूर्तों में आठवाँ है, जो स्थानीय दोपहर को घेरता है — इसलिए यह लगभग 48 मिनट का होता है, गर्मी में थोड़ा लंबा और सर्दी में थोड़ा छोटा। परंपरा से बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता, और उस दिन तालिका यही बताती है।

ब्रह्म मुहूर्त रात के पंद्रह मुहूर्तों में चौदहवाँ है। यह सूर्योदय से एक मुहूर्त पहले समाप्त होता है और स्वयं एक मुहूर्त का होता है, इसलिए सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटा पहले शुरू होता है — सर्दी की लंबी रातों में और पहले।

राहु काल, यमगंड और गुलिक काल — हर एक दिन के समय का आठवाँ भाग है, जो वार से तय होता है। दिन के चौघड़िया भी यही आठ भाग हैं, इसलिए इनमें से हर काल ठीक किसी एक चौघड़िया पर पड़ता है, और तालिका उसे चिह्नित करती है। कई परिवार राहु काल वाले शुभ चौघड़िया को भी छोड़ देते हैं।

समय आपके शहर पर क्यों निर्भर है

यहाँ हर भाग स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त से गिना जाता है, सुबह 6 बजे से नहीं। कोलकाता में सूर्योदय अहमदाबाद से लगभग एक घंटा पहले होता है, इसलिए दोनों शहरों की घड़ियाँ IST दिखाने पर भी एक ही चौघड़िया लगभग एक घंटे के अंतर से शुरू होता है। मिनट तक सही समय के लिए अपना शहर चुनें या अपनी लोकेशन इस्तेमाल करें।

समय की गणना कैसे होती है: सूर्य की स्थिति VSOP87 ग्रह-सिद्धांत से ली जाती है, और सूर्योदय-सूर्यास्त वे क्षण हैं जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज को छूता है, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। ये Swiss Ephemeris से कुछ ही सेकंड के भीतर मेल खाते हैं, और हर समय निकटतम मिनट तक दिखाया गया है।

चौघड़िया और मुहूर्त — आम सवाल

आज कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?
अमृत सबसे उत्तम है, फिर शुभ और लाभ; यात्रा के लिए चर ठीक है। देख लें कि चुना हुआ चौघड़िया राहु काल, यमगंड या गुलिक पर न पड़े — तालिका इन्हें चिह्नित करती है — और याद रखें कि बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता।
चौघड़िया सूर्योदय से गिना जाता है या सुबह 6 बजे से?
स्थानीय सूर्योदय से। दिन के आठ चौघड़िया सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय बाँटते हैं और रात के आठ सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक का। सुबह 6 बजे से बनी तालिका केवल अनुमान है और भारत के कुछ हिस्सों में लगभग एक घंटे तक गलत हो सकती है।
एक चौघड़िया कितने समय का होता है?
दिन या रात का आठवाँ भाग — विषुव के आसपास लगभग 90 मिनट। दिल्ली में दिन का चौघड़िया दिसंबर में लगभग 77 मिनट और जून में लगभग 105 मिनट का होता है; रात के चौघड़िया उल्टी दिशा में बदलते हैं।
चौघड़िया और राहु काल में क्या अंतर है?
चौघड़िया दिन और रात के हर भाग को अनुकूल, सामान्य या प्रतिकूल बताता है। राहु काल दिन के समय का एक अशुभ आठवाँ भाग है; यह हमेशा दिन के किसी एक चौघड़िया पर पड़ता है, और राहु काल वाला शुभ चौघड़िया आम तौर पर छोड़ दिया जाता है।
आज अभिजित मुहूर्त कब है?
स्थानीय दोपहर के आसपास: यह दिन के पंद्रह मुहूर्तों में आठवाँ है और लगभग 48 मिनट का होता है। आपके शहर का सटीक समय ऊपर की तालिका में है। परंपरा से बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता।
आधी रात के बाद का चौघड़िया किस दिन का माना जाता है?
उस दिन का, जो पिछले सूर्योदय से शुरू हुआ था। पंचांग में दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है, इसलिए आधी रात और सूर्योदय के बीच के चौघड़िया पिछली रात का ही अंतिम भाग हैं।