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गृह प्रवेश मुहूर्त 2027: तारीख़ें और समय

2027 में नई दिल्ली के लिए गृह प्रवेश मुहूर्त के 52 दिन हैं। यह प्रचलित मत है, जिसमें नियम वैसे ही लगाए गए हैं जैसे कई छपे पंचांग लगाते हैं; ग्रंथों के कड़े मत में 27 दिन हैं। कड़ा मत इनमें से 25 दिन छोड़ता है: सिंहस्थ गुरु से 14, खरमास से 13, चातुर्मास से 3, अस्त के आसपास के दिनों से 2 और संक्रांति के घंटों से 1 (एक दिन दो नियमों में भी आ सकता है)। वह 1 और दिन का समय भी छोटा करता है। सबसे ज़्यादा दिन मार्च (9) और नवंबर (9) में हैं; अगस्त से अक्टूबर तक कोई दिन नहीं।

प्रचलित मत
52 दिन (1 जनवरी – 25 दिसंबर)
कड़ा मत
27 दिन (10 फ़रवरी – 13 दिसंबर)
सबसे ज़्यादा दिन
मार्च (9), नवंबर (9) और मई (8)
कोई दिन नहीं
अगस्त से अक्टूबर
समय
IST, सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

नई दिल्ली (28.61° उ., 77.21° पू.) के लिए IST में, Swiss Ephemeris और लाहिड़ी अयनांश से गणना — किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं। दूसरे शहरों में समय कुछ मिनट आगे-पीछे होता है। प्रचलित मत को एक प्रकाशित पंचांग की गृह प्रवेश सूचियों से मिलाया गया है: गुड़गाँव का पूरा 2026, मुंबई, कोलकाता व गुड़गाँव के लिए नवंबर 2026 से फ़रवरी 2027 तक, और नई दिल्ली का पूरा 2027। जहाँ दोनों में फ़र्क़ है, उसका नियम नीचे बताया गया है।

2027 की सभी 52 तारीख़ें एक नज़र में

प्रचलित मत की तारीख़ें महीनेवार, और कड़ा मत उनमें से क्या रखता है। हर तारीख़ का समय नीचे के कार्डों में है।

  • जनवरी: 1 और 4 (2 दिन); कड़ा मत इनमें से कोई नहीं रखता
  • फ़रवरी: 10, 11, 22, 24, 25 और 27 (6 दिन); कड़ा मत भी ये सब रखता है
  • मार्च: 3, 4, 10, 15, 22, 24, 26, 27 और 31 (9 दिन); कड़ा मत केवल 3, 4 और 10 मार्च रखता है
  • अप्रैल: 1 (1 दिन); कड़ा मत इसे छोड़ता है
  • मई: 7, 8, 15, 17, 20, 21, 24 और 31 (8 दिन); कड़ा मत भी ये सब रखता है
  • जून: 4, 5, 11, 14, 16, 21 और 26 (7 दिन); कड़ा मत 26 जून छोड़ता है
  • जुलाई: 1 और 2 (2 दिन); कड़ा मत इनमें से कोई नहीं रखता
  • अगस्त: किसी भी मत में कोई दिन नहीं
  • सितंबर: किसी भी मत में कोई दिन नहीं
  • अक्टूबर: किसी भी मत में कोई दिन नहीं
  • नवंबर: 1, 4, 5, 10, 11, 15, 22, 24 और 25 (9 दिन); कड़ा मत इनमें से कोई नहीं रखता
  • दिसंबर: 2, 8, 9, 13, 20, 22, 24 और 25 (8 दिन); कड़ा मत 20, 22, 24 और 25 दिसंबर छोड़ता है

प्रचलित मत 2027 में 39 दिनों को "बहुत अच्छा" मानता है, सबसे ज़्यादा मार्च (8) और मई (8) में; हर कार्ड पर उसकी श्रेणी लिखी है।

शनिवार को: 27 फ़रवरी; 27 मार्च; 8 और 15 मई; 5 और 26 जून; 25 दिसंबर — कुल 52 दिनों में से 7।

दो मत, दो सूचियाँ

छपे पंचांग और ग्रंथ हर नियम पर एक राय नहीं रखते, इसलिए यह पेज दो सूचियाँ देता है। प्रचलित मत नियमों को वैसे लगाता है, जैसे कई छपे पंचांग लगाते हैं। कड़ा मत उन्हीं समयों से शुरू करता है और ये नियम भी जोड़ता है: सिंहस्थ गुरु और मकर गुरु (क्षेत्र के अनुसार), शुक्र या गुरु के अस्त होने से पहले और उदय के बाद के 7-7 दिन, खरमास, चातुर्मास, हर संक्रांति के दोनों ओर 16 घटी (6 घंटे 24 मिनट) और जिन क्षेत्रों में मुहूर्त चिंतामणि इसे मानता है, वहाँ होलाष्टक। कड़े मत का हर समय प्रचलित मत के किसी समय के भीतर ही होता है — यानी कड़ी सूची उसी सूची का छोटा रूप है, कोई अलग सूची नहीं।

सबसे बड़ा फ़र्क़ सिंहस्थ गुरु का है, यानी गुरु का सिंह राशि में होना। गुरु 31 अक्टूबर 2026, 12:02 से 25 जनवरी 2027, 01:31 तक और 26 जून 2027, 05:18 से 15 सितंबर 2027, 09:56 तक मघा या पूर्वाफाल्गुनी के पहले चरण में है — ग्रंथ इसे हर क्षेत्र में वर्जित मानते हैं; 15 सितंबर 2027, 09:56 से 26 नवंबर 2027, 18:45 तक वह सिंह के बाक़ी भाग में है — इसे वे नई दिल्ली में भी वर्जित मानते हैं (समय IST में)। सिंहस्थ गुरु की गाइड यह नियम, इसके क्षेत्र और स्रोत समझाती है, और खरमास 2026–27 सूर्य के धनु और मीन वाले दो महीनों के बारे में बताता है।

कौन-सी सूची मानें, यह परिवार का फ़ैसला है। आपका परिवार ग्रंथों को कड़ाई से मानता है तो कड़ा मत देखें; छपे पंचांग से चलता है तो प्रचलित मत। मुहूर्त की तारीख़ें अलग क्यों होती हैं में दो पंचांगों के अलग होने के बाक़ी कारण हैं।

जहाँ यह प्रचलित मत और जाँचा गया पंचांग अलग हैं, वहाँ उसके पीछे कोई नियम है। उस पंचांग की नए घर वाली सूची शुक्ल प्रतिपदा, दोनों षष्ठी, दोनों अष्टमी, दोनों द्वादशी, पूर्णिमा और कृष्ण त्रयोदशी भी छोड़ती है, जबकि यह सूची मुहूर्त चिंतामणि पर चलती है, जो रिक्ता तिथियाँ और अमावस्या वर्जित करता है। वह पंचांग व्यतीपात और वैधृति योग रखता है और नक्षत्र गंडांत नहीं काटता; यह सूची दोनों को टालती है। वह पंचांग अस्त को ग्रह के दिखने से गिनता है और उसके दोनों ओर लगभग तीन दिन और छोड़ता है, इसलिए अस्त के आसपास दोनों सूचियों में कुछ दिनों का फ़र्क़ किसी भी ओर हो सकता है; यह प्रचलित मत सूर्य सिद्धांत के अंशों से अस्त गिनता है और अतिरिक्त दिन नहीं छोड़ता, और कड़ा मत सात दिन छोड़ता है।

गृह प्रवेश की तारीख़ें 2027: महीनेवार

हर तारीख़ के साथ नई दिल्ली के लिए मुहूर्त का समय (IST), उस समय के नक्षत्र और तिथि, और एक श्रेणी दी है। जिस दिन कड़ा मत समय छोटा करता है या दिन बंद करता है, उस कार्ड पर यह लिखा है; जहाँ कुछ नहीं लिखा, वहाँ दोनों मत एक हैं। एक बार में एक सूची देखने के लिए मत चुनें।

सूची का हर दिन नियमों के अनुसार शुद्ध है। "बहुत अच्छा", "अच्छा" और "सामान्य" शास्त्रीय बातों (जैसे नक्षत्र, वार, शुक्ल पक्ष) से बना मोटा क्रम है — कोई संभावना या गारंटी नहीं।

मत चुनें

प्रचलित मत के दिन, और हर दिन पर कड़े मत का असर।

जनवरी 2027 2 दिन

कड़ा मत: इस महीने कोई मुहूर्त नहीं — प्रचलित मत के 2 दिन इसके नियमों से बंद हैं: सिंहस्थ गुरु (2 दिन), खरमास (2 दिन)।

  • शुक्रवार, 1 जनवरी

    अच्छा
    • 13:11–15:00
    • 16:18–17:29

    नक्षत्र: चित्रा तिथि: कृष्ण दशमी

    कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं

    • खरमास — सूर्य धनु में; नए घर के लिए ग्रंथ का नियम भी (दक्षिणायन) मुहूर्त चिंतामणि, संस्कार और गृहप्रवेश प्रकरण (दक्षिणायन)
    • सिंहस्थ गुरु — गुरु मघा नक्षत्र में (हर क्षेत्र में वर्जित) मुहूर्त चिंतामणि, शुभाशुभ प्रकरण, और धर्मसिंधु
  • सोमवार, 4 जनवरी

    अच्छा
    • 07:15–08:32
    • 09:51–11:08
    • 15:02–00:15 आधी रात के बाद 5 जनवरी तक

    नक्षत्र: अनुराधा तिथि: कृष्ण द्वादशी, कृष्ण त्रयोदशी

    कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं

    • खरमास — सूर्य धनु में; नए घर के लिए ग्रंथ का नियम भी (दक्षिणायन) मुहूर्त चिंतामणि, संस्कार और गृहप्रवेश प्रकरण (दक्षिणायन)
    • सिंहस्थ गुरु — गुरु मघा नक्षत्र में (हर क्षेत्र में वर्जित) मुहूर्त चिंतामणि, शुभाशुभ प्रकरण, और धर्मसिंधु

फ़रवरी 2027 6 दिन

  • बुधवार, 10 फ़रवरी

    बहुत अच्छा
    • 03:05–07:02 10/11 फ़रवरी की रात

    नक्षत्र: उत्तराभाद्रपदा, रेवती तिथि: शुक्ल पंचमी

  • गुरुवार, 11 फ़रवरी

    बहुत अच्छा
    • 08:26–09:49
    • 11:13–13:58
    • 15:22–23:30

    नक्षत्र: रेवती तिथि: शुक्ल पंचमी

  • सोमवार, 22 फ़रवरी

    बहुत अच्छा
    • 12:35–14:00
    • 15:26–04:59 23 फ़रवरी की सुबह तक

    नक्षत्र: उत्तराफाल्गुनी तिथि: कृष्ण द्वितीया, कृष्ण तृतीया

  • बुधवार, 24 फ़रवरी

    बहुत अच्छा
    • 20:41–06:50 25 फ़रवरी की सुबह तक

    नक्षत्र: चित्रा तिथि: कृष्ण पंचमी

  • गुरुवार, 25 फ़रवरी

    बहुत अच्छा
    • 08:17–09:33

    नक्षत्र: चित्रा तिथि: कृष्ण पंचमी

  • शनिवार, 27 फ़रवरी

    अच्छा
    • 11:41–14:00
    • 15:27–06:47 28 फ़रवरी की सुबह तक

    नक्षत्र: अनुराधा तिथि: कृष्ण सप्तमी, कृष्ण अष्टमी

मार्च 2027 9 दिन

  • बुधवार, 3 मार्च

    बहुत अच्छा
    • 01:07–06:43 3/4 मार्च की रात

    नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा तिथि: कृष्ण एकादशी

  • गुरुवार, 4 मार्च

    बहुत अच्छा
    • 08:11–09:38
    • 11:06–14:00
    • 15:28–01:35 आधी रात के बाद 5 मार्च तक

    नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा तिथि: कृष्ण द्वादशी

  • बुधवार, 10 मार्च

    बहुत अच्छा
    • 06:37–08:05
    • 09:35–11:03
    • 14:01–05:13 11 मार्च की सुबह तक

    नक्षत्र: उत्तराभाद्रपदा, रेवती तिथि: शुक्ल द्वितीया, शुक्ल तृतीया

  • सोमवार, 15 मार्च

    बहुत अच्छा
    • 06:32–08:01
    • 09:31–10:51
    • 21:56–06:30 16 मार्च की सुबह तक

    नक्षत्र: रोहिणी, मृगशिरा तिथि: शुक्ल सप्तमी, शुक्ल अष्टमी

    कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं

    • खरमास — सूर्य मीन में (प्रचलित परंपरा) प्रचलित परंपरा
    • संक्रांति — सूर्य 15 मार्च को 07:00 पर मीन में; इसके दोनों ओर 16 घटी (6 घंटे 24 मिनट) वर्जित बी.वी. रमन, मुहूर्त
  • सोमवार, 22 मार्च

    बहुत अच्छा
    • 06:24–07:54
    • 09:26–10:57
    • 12:29–13:59

    नक्षत्र: उत्तराफाल्गुनी तिथि: पूर्णिमा

    कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं

    • खरमास — सूर्य मीन में (प्रचलित परंपरा) प्रचलित परंपरा
  • बुधवार, 24 मार्च

    बहुत अच्छा
    • 06:21–07:52
    • 14:00–19:25

    नक्षत्र: चित्रा तिथि: कृष्ण द्वितीया, कृष्ण तृतीया

    कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं

    • खरमास — सूर्य मीन में (प्रचलित परंपरा) प्रचलित परंपरा
  • शुक्रवार, 26 मार्च

    बहुत अच्छा
    • 20:37–06:17 27 मार्च की सुबह तक

    नक्षत्र: अनुराधा तिथि: कृष्ण पंचमी

    कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं

    • खरमास — सूर्य मीन में (प्रचलित परंपरा) प्रचलित परंपरा
  • शनिवार, 27 मार्च

    अच्छा
    • 07:50–09:22
    • 10:55–13:59
    • 15:32–22:15

    नक्षत्र: अनुराधा तिथि: कृष्ण पंचमी, कृष्ण षष्ठी

    कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं

    • खरमास — सूर्य मीन में (प्रचलित परंपरा) प्रचलित परंपरा
  • बुधवार, 31 मार्च

    बहुत अच्छा
    • 22:17–06:11 1 अप्रैल की सुबह तक

    नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा तिथि: कृष्ण दशमी

    कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं

    • खरमास — सूर्य मीन में (प्रचलित परंपरा) प्रचलित परंपरा

अप्रैल 2027 1 दिन

कड़ा मत: इस महीने कोई मुहूर्त नहीं — प्रचलित मत का 1 दिन इसके नियमों से बंद है: खरमास।

  • गुरुवार, 1 अप्रैल

    बहुत अच्छा
    • 07:46–09:18

    नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा तिथि: कृष्ण दशमी

    कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं

    • खरमास — सूर्य मीन में (प्रचलित परंपरा) प्रचलित परंपरा

मई 2027 8 दिन

  • शुक्रवार, 7 मई

    बहुत अच्छा
    • 23:43–05:35 8 मई की सुबह तक

    नक्षत्र: रोहिणी तिथि: शुक्ल द्वितीया

  • शनिवार, 8 मई

    बहुत अच्छा
    • 08:16–08:56
    • 10:38–13:58
    • 15:40–05:34 9 मई की सुबह तक

    नक्षत्र: रोहिणी, मृगशिरा तिथि: शुक्ल द्वितीया, शुक्ल तृतीया

  • शनिवार, 15 मई

    बहुत अच्छा
    • 12:01–13:59
    • 15:42–04:31 16 मई की सुबह तक

    नक्षत्र: उत्तराफाल्गुनी तिथि: शुक्ल दशमी, शुक्ल एकादशी

    कड़ा मत: समय कम — 18:44–04:31

    • संक्रांति — सूर्य 15 मई को 12:19 पर वृष में; इसके दोनों ओर 16 घटी (6 घंटे 24 मिनट) वर्जित बी.वी. रमन, मुहूर्त
  • सोमवार, 17 मई

    बहुत अच्छा
    • 12:18–13:59
    • 15:42–01:10 आधी रात के बाद 18 मई तक

    नक्षत्र: चित्रा तिथि: शुक्ल द्वादशी, शुक्ल त्रयोदशी

  • गुरुवार, 20 मई

    बहुत अच्छा
    • 13:22–14:00
    • 15:43–16:29
    • 16:30–05:27 21 मई की सुबह तक

    नक्षत्र: अनुराधा तिथि: पूर्णिमा, कृष्ण प्रतिपदा

  • शुक्रवार, 21 मई

    बहुत अच्छा
    • 05:28–07:09
    • 08:53–10:35
    • 12:18–14:51

    नक्षत्र: अनुराधा तिथि: कृष्ण प्रतिपदा

  • सोमवार, 24 मई

    बहुत अच्छा
    • 23:00–05:25 25 मई की सुबह तक

    नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा तिथि: कृष्ण पंचमी

  • सोमवार, 31 मई

    बहुत अच्छा
    • 10:03–10:35
    • 12:19–14:02
    • 15:47–05:23 1 जून की सुबह तक

    नक्षत्र: उत्तराभाद्रपदा, रेवती तिथि: कृष्ण एकादशी

जून 2027 7 दिन

  • शुक्रवार, 4 जून

    बहुत अच्छा
    • 01:11–05:22 4/5 जून की रात

    नक्षत्र: रोहिणी तिथि: शुक्ल प्रतिपदा

  • शनिवार, 5 जून

    बहुत अच्छा
    • 07:08–08:51
    • 10:36–12:10
    • 15:49–04:37 6 जून की सुबह तक

    नक्षत्र: मृगशिरा तिथि: शुक्ल प्रतिपदा, शुक्ल द्वितीया

  • शुक्रवार, 11 जून

    बहुत अच्छा
    • 17:35–03:45 आधी रात के बाद 12 जून तक

    नक्षत्र: उत्तराफाल्गुनी तिथि: शुक्ल अष्टमी

  • सोमवार, 14 जून

    बहुत अच्छा
    • 05:23–07:07

    नक्षत्र: चित्रा तिथि: शुक्ल एकादशी

  • बुधवार, 16 जून

    बहुत अच्छा
    • 19:45–03:20 आधी रात के बाद 17 जून तक

    नक्षत्र: अनुराधा तिथि: शुक्ल त्रयोदशी

  • सोमवार, 21 जून

    बहुत अच्छा
    • 05:24–07:08
    • 08:54–10:38
    • 12:23–14:07

    नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा तिथि: कृष्ण द्वितीया, कृष्ण तृतीया

  • शनिवार, 26 जून

    अच्छा
    • 19:24–05:25 27 जून की सुबह तक

    नक्षत्र: उत्तराभाद्रपदा तिथि: कृष्ण सप्तमी, कृष्ण अष्टमी

    कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं

    • सिंहस्थ गुरु — गुरु मघा नक्षत्र में (हर क्षेत्र में वर्जित) मुहूर्त चिंतामणि, शुभाशुभ प्रकरण, और धर्मसिंधु

जुलाई 2027 2 दिन

कड़ा मत: इस महीने कोई मुहूर्त नहीं — प्रचलित मत के 2 दिन इसके नियमों से बंद हैं: सिंहस्थ गुरु (2 दिन), अस्त के आसपास के दिन (2 दिन)।

  • गुरुवार, 1 जुलाई

    बहुत अच्छा
    • 19:32–02:50 आधी रात के बाद 2 जुलाई तक

    नक्षत्र: रोहिणी तिथि: कृष्ण त्रयोदशी

    कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं

    • सिंहस्थ गुरु — गुरु मघा नक्षत्र में (हर क्षेत्र में वर्जित) मुहूर्त चिंतामणि, शुभाशुभ प्रकरण, और धर्मसिंधु
    • शुक्र वृद्ध — अस्त होने से पहले के 7 दिन धर्मसिंधु (मध्यम मत: 7 दिन)
  • शुक्रवार, 2 जुलाई

    बहुत अच्छा
    • 05:27–07:11
    • 08:57–10:40
    • 12:26–15:23

    नक्षत्र: रोहिणी तिथि: कृष्ण त्रयोदशी

    कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं

    • सिंहस्थ गुरु — गुरु मघा नक्षत्र में (हर क्षेत्र में वर्जित) मुहूर्त चिंतामणि, शुभाशुभ प्रकरण, और धर्मसिंधु
    • शुक्र वृद्ध — अस्त होने से पहले के 7 दिन धर्मसिंधु (मध्यम मत: 7 दिन)

अगस्त 2027 0 दिन

प्रचलित मत: इस महीने कोई मुहूर्त नहीं — मुख्य कारण: शुक्र या गुरु अस्त (31 दिन), अनुपयुक्त महीना (31 दिन), अनुपयुक्त नक्षत्र (29 दिन)।

कड़ा मत: इसमें भी कोई नहीं।

सितंबर 2027 0 दिन

प्रचलित मत: इस महीने कोई मुहूर्त नहीं — मुख्य कारण: अनुपयुक्त महीना (30 दिन), शुक्र या गुरु अस्त (17 दिन), अनुपयुक्त नक्षत्र (28 दिन)।

कड़ा मत: इसमें भी कोई नहीं।

अक्टूबर 2027 0 दिन

प्रचलित मत: इस महीने कोई मुहूर्त नहीं — मुख्य कारण: अनुपयुक्त महीना (29 दिन), अनुपयुक्त नक्षत्र (29 दिन), भद्रा (13 दिन)।

कड़ा मत: इसमें भी कोई नहीं।

नवंबर 2027 9 दिन

कड़ा मत: इस महीने कोई मुहूर्त नहीं — प्रचलित मत के 9 दिन इसके नियमों से बंद हैं: सिंहस्थ गुरु (9 दिन), चातुर्मास (3 दिन)।

  • सोमवार, 1 नवंबर

    बहुत अच्छा
    • 06:33–07:55
    • 09:19–09:57

    नक्षत्र: अनुराधा तिथि: शुक्ल तृतीया

    कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं

    • चातुर्मास — कई परिवार नए घर में प्रवेश के लिए देवउठनी एकादशी तक रुकते हैं (परंपरा) प्रचलित परंपरा
    • सिंहस्थ गुरु — गुरु सिंह राशि में 16°40′ के बाद (इस क्षेत्र में वर्जित) मुहूर्त चिंतामणि, शुभाशुभ प्रकरण, और धर्मसिंधु
  • गुरुवार, 4 नवंबर

    बहुत अच्छा
    • 15:26–20:02
    • 22:51–06:35 5 नवंबर की सुबह तक

    नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा तिथि: शुक्ल षष्ठी, शुक्ल सप्तमी

    कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं

    • चातुर्मास — कई परिवार नए घर में प्रवेश के लिए देवउठनी एकादशी तक रुकते हैं (परंपरा) प्रचलित परंपरा
    • सिंहस्थ गुरु — गुरु सिंह राशि में 16°40′ के बाद (इस क्षेत्र में वर्जित) मुहूर्त चिंतामणि, शुभाशुभ प्रकरण, और धर्मसिंधु
  • शुक्रवार, 5 नवंबर

    बहुत अच्छा
    • 06:36–07:57
    • 09:21–10:42
    • 12:05–14:49

    नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा तिथि: शुक्ल सप्तमी

    कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं

    • चातुर्मास — कई परिवार नए घर में प्रवेश के लिए देवउठनी एकादशी तक रुकते हैं (परंपरा) प्रचलित परंपरा
    • सिंहस्थ गुरु — गुरु सिंह राशि में 16°40′ के बाद (इस क्षेत्र में वर्जित) मुहूर्त चिंतामणि, शुभाशुभ प्रकरण, और धर्मसिंधु
  • बुधवार, 10 नवंबर

    बहुत अच्छा
    • 09:23–10:43
    • 13:27–23:40
    • 03:17–06:40 10/11 नवंबर की रात

    नक्षत्र: उत्तराभाद्रपदा तिथि: शुक्ल द्वादशी

    कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं

    • सिंहस्थ गुरु — गुरु सिंह राशि में 16°40′ के बाद (इस क्षेत्र में वर्जित) मुहूर्त चिंतामणि, शुभाशुभ प्रकरण, और धर्मसिंधु
  • गुरुवार, 11 नवंबर

    बहुत अच्छा
    • 08:02–09:22
    • 10:44–13:26
    • 14:48–01:42 आधी रात के बाद 12 नवंबर तक

    नक्षत्र: रेवती तिथि: शुक्ल द्वादशी, शुक्ल त्रयोदशी

    कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं

    • सिंहस्थ गुरु — गुरु सिंह राशि में 16°40′ के बाद (इस क्षेत्र में वर्जित) मुहूर्त चिंतामणि, शुभाशुभ प्रकरण, और धर्मसिंधु
  • सोमवार, 15 नवंबर

    अच्छा
    • 07:07–08:03
    • 09:25–10:44
    • 12:06–13:26

    नक्षत्र: रोहिणी तिथि: कृष्ण प्रतिपदा, कृष्ण द्वितीया

    कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं

    • सिंहस्थ गुरु — गुरु सिंह राशि में 16°40′ के बाद (इस क्षेत्र में वर्जित) मुहूर्त चिंतामणि, शुभाशुभ प्रकरण, और धर्मसिंधु
  • सोमवार, 22 नवंबर

    अच्छा
    • 20:44–02:35 आधी रात के बाद 23 नवंबर तक

    नक्षत्र: उत्तराफाल्गुनी तिथि: कृष्ण दशमी

    कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं

    • सिंहस्थ गुरु — गुरु सिंह राशि में 16°40′ के बाद (इस क्षेत्र में वर्जित) मुहूर्त चिंतामणि, शुभाशुभ प्रकरण, और धर्मसिंधु
  • बुधवार, 24 नवंबर

    अच्छा
    • 18:54–06:51 25 नवंबर की सुबह तक

    नक्षत्र: चित्रा तिथि: कृष्ण द्वादशी

    कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं

    • सिंहस्थ गुरु — गुरु सिंह राशि में 16°40′ के बाद (इस क्षेत्र में वर्जित) मुहूर्त चिंतामणि, शुभाशुभ प्रकरण, और धर्मसिंधु
  • गुरुवार, 25 नवंबर

    अच्छा
    • 08:11–09:29
    • 10:49–13:27
    • 14:47–18:17

    नक्षत्र: चित्रा तिथि: कृष्ण द्वादशी, कृष्ण त्रयोदशी

    कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं

    • सिंहस्थ गुरु — गुरु सिंह राशि में 16°40′ के बाद (इस क्षेत्र में वर्जित) मुहूर्त चिंतामणि, शुभाशुभ प्रकरण, और धर्मसिंधु

दिसंबर 2027 8 दिन

  • गुरुवार, 2 दिसंबर

    बहुत अच्छा
    • 14:48–02:30 आधी रात के बाद 3 दिसंबर तक

    नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा तिथि: शुक्ल पंचमी

  • बुधवार, 8 दिसंबर

    बहुत अच्छा
    • 06:35–07:01 8/9 दिसंबर की रात

    नक्षत्र: रेवती तिथि: शुक्ल एकादशी

  • गुरुवार, 9 दिसंबर

    बहुत अच्छा
    • 08:20–09:37

    नक्षत्र: रेवती तिथि: शुक्ल एकादशी

  • सोमवार, 13 दिसंबर

    बहुत अच्छा
    • 12:16–13:32
    • 14:51–21:38
    • 21:39–07:05 14 दिसंबर की सुबह तक अच्छा

    नक्षत्र: रोहिणी, मृगशिरा तिथि: पूर्णिमा, कृष्ण प्रतिपदा

  • सोमवार, 20 दिसंबर

    अच्छा
    • 07:09–08:26
    • 09:44–11:01
    • 12:19–13:35

    नक्षत्र: उत्तराफाल्गुनी तिथि: कृष्ण अष्टमी

    कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं

    • खरमास — सूर्य धनु में; नए घर के लिए ग्रंथ का नियम भी (दक्षिणायन) मुहूर्त चिंतामणि, संस्कार और गृहप्रवेश प्रकरण (दक्षिणायन)
  • बुधवार, 22 दिसंबर

    अच्छा
    • 07:10–08:27
    • 09:45–11:02
    • 23:42–00:09 आधी रात के बाद 23 दिसंबर तक

    नक्षत्र: चित्रा तिथि: कृष्ण दशमी, कृष्ण एकादशी

    कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं

    • खरमास — सूर्य धनु में; नए घर के लिए ग्रंथ का नियम भी (दक्षिणायन) मुहूर्त चिंतामणि, संस्कार और गृहप्रवेश प्रकरण (दक्षिणायन)
  • शुक्रवार, 24 दिसंबर

    अच्छा
    • 00:51–07:11 24/25 दिसंबर की रात

    नक्षत्र: अनुराधा तिथि: कृष्ण त्रयोदशी

    कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं

    • खरमास — सूर्य धनु में; नए घर के लिए ग्रंथ का नियम भी (दक्षिणायन) मुहूर्त चिंतामणि, संस्कार और गृहप्रवेश प्रकरण (दक्षिणायन)
  • शनिवार, 25 दिसंबर

    अच्छा
    • 08:29–09:12
    • 12:01–13:38
    • 14:56–23:32

    नक्षत्र: अनुराधा तिथि: कृष्ण त्रयोदशी

    कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं

    • खरमास — सूर्य धनु में; नए घर के लिए ग्रंथ का नियम भी (दक्षिणायन) मुहूर्त चिंतामणि, संस्कार और गृहप्रवेश प्रकरण (दक्षिणायन)

2027 में गृह प्रवेश के बंद समय

ये अवधियाँ नई दिल्ली में नए घर में प्रवेश रोकती हैं; ग्रहों की गणना से मिनट तक निकाली गई हैं (IST)। "दोनों मत" का मतलब है कि इस पेज की हर सूची इन्हें छोड़ती है; "कड़ा मत" का मतलब है कि केवल कड़ी सूची।

  1. सिंहस्थ गुरु: गुरु मघा या पूर्वाफाल्गुनी के पहले चरण में कड़ा मत

    31 अक्टूबर 2026, 12:02 – 25 जनवरी 2027, 01:31

    गुरु मघा या पूर्वाफाल्गुनी के पहले चरण में: कड़ा मत हर क्षेत्र में नए घर में प्रवेश वर्जित मानता है, सूर्य के मेष में रहने के दिनों को छोड़कर (मुहूर्त चिंतामणि, शुभाशुभ प्रकरण, और धर्मसिंधु)।

  2. खरमास (सूर्य धनु में) कड़ा मत

    16 दिसंबर 2026, 10:25 – 14 जनवरी 2027, 21:10

    सूर्य धनु में हो तो वह महीना दक्षिणायन में पड़ता है, और मुहूर्त चिंतामणि नए घर में प्रवेश केवल उत्तरायण में बताता है (संस्कार और गृहप्रवेश प्रकरण): कड़ा मत इसे वर्जित मानता है। प्रचलित मत कई छपी सूचियों की तरह केवल चांद्र मास देखता है।

  3. खरमास (सूर्य मीन में) कड़ा मत

    15 मार्च 2027, 07:00 – 14 अप्रैल 2027, 15:28

    सूर्य मीन में: इसे टालना एक प्रचलित परंपरा है, और कड़ा मत इसे मानता है। प्रचलित मत केवल चांद्र मास देखता है।

  4. सिंहस्थ गुरु: गुरु मघा या पूर्वाफाल्गुनी के पहले चरण में कड़ा मत

    26 जून 2027, 05:18 – 15 सितंबर 2027, 09:56

    गुरु मघा या पूर्वाफाल्गुनी के पहले चरण में: कड़ा मत हर क्षेत्र में नए घर में प्रवेश वर्जित मानता है, सूर्य के मेष में रहने के दिनों को छोड़कर (मुहूर्त चिंतामणि, शुभाशुभ प्रकरण, और धर्मसिंधु)।

  5. शुक्र वृद्ध (अस्त से पहले) कड़ा मत

    29 जून 2027, 20:42 – 6 जुलाई 2027, 20:42

    ग्रह के अस्त होने से पहले के 7 दिन (वृद्ध — धर्मसिंधु का मध्यम मत): केवल कड़ा मत।

  6. शुक्र अस्त दोनों मत

    6 जुलाई 2027, 20:42 – 17 सितंबर 2027, 22:48

    सूर्य सिद्धांत के अंशों (10°, वक्री होने पर 8°) से शुक्र अस्त है: दोनों मतों में नए घर में प्रवेश नहीं। जो पंचांग ग्रह के दिखने से अस्त गिनते हैं, उनमें कुछ दिनों का फ़र्क़ हो सकता है।

  7. चातुर्मास कड़ा मत

    13 जुलाई 2027, 12:09 – 10 नवंबर 2027, 09:11

    प्रचलित मत आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद और आश्विन को पहले ही छोड़ देता है — ये नए घर के महीने नहीं — पर कार्तिक, जो मध्यम महीना है, रखता है। कई परिवार देवउठनी एकादशी तक रुकते हैं — यह परंपरा है — और कड़ा मत भी रुकता है।

  8. गुरु वृद्ध (अस्त से पहले) कड़ा मत

    9 अगस्त 2027, 19:42 – 16 अगस्त 2027, 19:42

    ग्रह के अस्त होने से पहले के 7 दिन (वृद्ध — धर्मसिंधु का मध्यम मत): केवल कड़ा मत।

  9. गुरु अस्त दोनों मत

    16 अगस्त 2027, 19:42 – 15 सितंबर 2027, 03:12

    सूर्य सिद्धांत के अंशों (11°) से गुरु अस्त है: दोनों मतों में नए घर में प्रवेश नहीं।

  10. गुरु बाल्य (उदय के बाद) कड़ा मत

    15 सितंबर 2027, 03:12 – 22 सितंबर 2027, 03:12

    ग्रह के दोबारा उदय होने के बाद के 7 दिन (बाल्य — धर्मसिंधु का मध्यम मत): केवल कड़ा मत।

  11. सिंहस्थ गुरु: गुरु सिंह के बाक़ी भाग में (क्षेत्रीय) कड़ा मत

    15 सितंबर 2027, 09:56 – 26 नवंबर 2027, 18:45

    गुरु सिंह के बाक़ी भाग में: कड़ा मत गंगा और गोदावरी के बीच और गुजरात, बंगाल व ओडिशा में नए घर में प्रवेश वर्जित मानता है — नई दिल्ली भी इसी में आता है; गंगा के उत्तर और गोदावरी के दक्षिण में नहीं।

  12. शुक्र बाल्य (उदय के बाद) कड़ा मत

    17 सितंबर 2027, 22:48 – 24 सितंबर 2027, 22:48

    ग्रह के दोबारा उदय होने के बाद के 7 दिन (बाल्य — धर्मसिंधु का मध्यम मत): केवल कड़ा मत।

  13. खरमास (सूर्य धनु में) कड़ा मत

    16 दिसंबर 2027, 16:38 – 15 जनवरी 2028, 03:24

    सूर्य धनु में हो तो वह महीना दक्षिणायन में पड़ता है, और मुहूर्त चिंतामणि नए घर में प्रवेश केवल उत्तरायण में बताता है (संस्कार और गृहप्रवेश प्रकरण): कड़ा मत इसे वर्जित मानता है। प्रचलित मत कई छपी सूचियों की तरह केवल चांद्र मास देखता है।

संक्रांति के घंटे (कड़ा मत)

कड़ा मत सूर्य के राशि में आने के पल के दोनों ओर 16 घटी (6 घंटे 24 मिनट) टालता है (बी.वी. रमन, मुहूर्त; कालप्रकाशिका की 30 घटी नहीं ली गईं)। 2027 की संक्रांतियाँ, नई दिल्ली के लिए, IST में:

  • मकर: सूर्य का प्रवेश 14 जनवरी 2027, 21:10; वर्जित 14 जनवरी 2027, 14:46 – 15 जनवरी 2027, 03:34
  • कुंभ: सूर्य का प्रवेश 13 फ़रवरी 2027, 10:09; वर्जित 13 फ़रवरी 2027, 03:45–16:33
  • मीन: सूर्य का प्रवेश 15 मार्च 2027, 07:00; वर्जित 15 मार्च 2027, 00:36–13:24
  • मेष: सूर्य का प्रवेश 14 अप्रैल 2027, 15:28; वर्जित 14 अप्रैल 2027, 09:04–21:52
  • वृष: सूर्य का प्रवेश 15 मई 2027, 12:19; वर्जित 15 मई 2027, 05:55–18:43
  • मिथुन: सूर्य का प्रवेश 15 जून 2027, 18:55; वर्जित 15 जून 2027, 12:31 – 16 जून 2027, 01:19
  • कर्क: सूर्य का प्रवेश 17 जुलाई 2027, 05:48; वर्जित 16 जुलाई 2027, 23:24 – 17 जुलाई 2027, 12:12
  • सिंह: सूर्य का प्रवेश 17 अगस्त 2027, 14:13; वर्जित 17 अगस्त 2027, 07:49–20:37
  • कन्या: सूर्य का प्रवेश 17 सितंबर 2027, 14:10; वर्जित 17 सितंबर 2027, 07:46–20:34
  • तुला: सूर्य का प्रवेश 18 अक्टूबर 2027, 02:08; वर्जित 17 अक्टूबर 2027, 19:44 – 18 अक्टूबर 2027, 08:32
  • वृश्चिक: सूर्य का प्रवेश 17 नवंबर 2027, 01:58; वर्जित 16 नवंबर 2027, 19:34 – 17 नवंबर 2027, 08:22
  • धनु: सूर्य का प्रवेश 16 दिसंबर 2027, 16:38; वर्जित 16 दिसंबर 2027, 10:14–23:02

होलाष्टक (15 मार्च 2027, 10:51 – 22 मार्च 2027, 16:13, IST) नई दिल्ली में नहीं लगाया गया: मुहूर्त चिंतामणि का शुभाशुभ प्रकरण, शीघ्रबोध के हवाले से, इसे केवल ब्यास, रावी और सतलुज के क्षेत्र और पुष्कर में मानता है। उत्तर भारत में बहुत-से परिवार इसे परंपरा से मानते हैं; आपका परिवार मानता हो, तो ये दिन भी छोड़ दें।

ये तारीख़ें कैसे चुनी गईं

  • चंद्रमा का नक्षत्र: केवल स्थिर और मृदु नक्षत्र — रोहिणी, मृगशिरा, उत्तराफाल्गुनी, चित्रा, अनुराधा, उत्तराषाढ़ा, उत्तराभाद्रपदा और रेवती (मुहूर्त चिंतामणि, गृहप्रवेश प्रकरण)।
  • चांद्र मास (अमांत): माघ, फाल्गुन, वैशाख या ज्येष्ठ; कार्तिक और मार्गशीर्ष मध्यम (गृहप्रवेश प्रकरण; नारद भी इन दोनों को मध्यम मानते हैं, और पौष को भी, जिसे ये सूचियाँ नहीं लेतीं)। अधिक मास में और शुक्र या गुरु के अस्त रहते कभी नहीं (सूर्य सिद्धांत के अंश)।
  • वार: रविवार या मंगलवार कभी नहीं — नारद संहिता नए घर के लिए यही कहती है, और छपे पंचांग भी यही लगाते हैं।
  • तिथि: कोई रिक्ता तिथि (किसी भी पक्ष की चतुर्थी, नवमी या चतुर्दशी) नहीं, और अमावस्या नहीं (नारद संहिता, नए घर के लिए; बी.वी. रमन, मुहूर्त)।
  • भद्रा (विष्टि करण) नहीं: इसे पूरा टाला गया है। इसके वास और पुच्छ के बारीक नियम नहीं लगाए गए, इसलिए यह सूची उन पंचांगों से कड़ी है जो उन्हें लगाते हैं।
  • योग: व्यतिपात या वैधृति कभी नहीं; बाक़ी अशुभ योगों का केवल आरंभ का भाग हटाया गया — विष्कम्भ 5 घटी, अतिगण्ड 6 घटी, शूल 7 घटी, गण्ड 6 घटी, व्याघात 9 घटी, वज्र 9 घटी, परिघ का पहला आधा (एक घटी = 24 मिनट; जहाँ ग्रंथ अलग-अलग गिनती देते हैं, वहाँ बड़ी गिनती ली गई है — मुहूर्त चिंतामणि, शुभाशुभ प्रकरण)।
  • गंडांत: आश्लेषा, ज्येष्ठा और रेवती का अंतिम चरण और मघा, मूल और अश्विनी का पहला चरण हटाया गया (कालप्रकाशिका; मुहूर्त चिंतामणि इसे अपने विवाह प्रकरण में कहता है)।
  • राहु काल, यमगंड और गुलिक — वार के हिसाब से दिन के आठवें भाग — मुहूर्त के हर समय से हटाए गए (दक्षिण भारतीय परंपरा, कालप्रकाशिका)। कालप्रकाशिका ख़ुद गुलिक को अशुभ नहीं मानती; कई पंचांगों की तरह ये सूचियाँ उसे फिर भी हटाती हैं, इसलिए यहाँ ये थोड़ी कड़ी हैं।
  • दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक गिना गया है, इसलिए कोई समय रात तक जा सकता है; समय के पास लिखी टिप्पणी यह बताती है। हर समय में कम से कम एक घटी (24 मिनट) शुद्ध होनी चाहिए, और एक दिन में ज़्यादा से ज़्यादा तीन समय दिखाए गए हैं।
  • श्रेणी: "बहुत अच्छा", "अच्छा" और "सामान्य" नक्षत्र की श्रेणी, शुभ ग्रह का वार (सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार), शुक्ल पक्ष और सबसे अच्छे महीनों में से एक से बना मोटा क्रम है — कोई संभावना नहीं।

कड़ा मत क्या जोड़ता है

  • सिंहस्थ गुरु: गुरु मघा या पूर्वाफाल्गुनी के पहले चरण में हो तो नए घर में प्रवेश हर जगह वर्जित; सिंह के बाक़ी भाग में हो तो गंगा और गोदावरी के बीच और गुजरात, बंगाल व ओडिशा में वर्जित (नई दिल्ली भी इसी में आता है); सूर्य के मेष में रहते यह नियम नहीं लगता (मुहूर्त चिंतामणि, शुभाशुभ प्रकरण, और धर्मसिंधु)।
  • मकर गुरु: गुरु मकर में — केवल कोंकण, मगध, बंगाल और सिंध में वर्जित; नई दिल्ली में नहीं।
  • शुक्र या गुरु के अस्त होने से पहले के 7 दिन और उदय के बाद के 7 दिन (वृद्ध और बाल्य — धर्मसिंधु का मध्यम मत; 3 से 10 दिन वाली क्षेत्रीय गिनतियाँ नहीं ली गईं)।
  • खरमास: सूर्य धनु में — नए घर के लिए यह ग्रंथ का नियम भी है, क्योंकि वह महीना दक्षिणायन में पड़ता है (मुहूर्त चिंतामणि, संस्कार और गृहप्रवेश प्रकरण) — या मीन में (प्रचलित परंपरा)।
  • चातुर्मास, देवउठनी एकादशी तक: मुहूर्त चिंतामणि की महीनों की सूची कार्तिक को मध्यम मानती है, पर कई परिवार रुकते हैं (परंपरा)।
  • हर संक्रांति के दोनों ओर 16 घटी (6 घंटे 24 मिनट) (बी.वी. रमन, मुहूर्त)।
  • होलाष्टक, फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से पूर्णिमा तक: मुहूर्त चिंतामणि (शुभाशुभ प्रकरण, शीघ्रबोध के हवाले से) इसे केवल ब्यास, रावी और सतलुज के क्षेत्र और पुष्कर में मानता है; उत्तर भारत में बहुत-से परिवार इसे परंपरा से मानते हैं, पर ये सूचियाँ नई दिल्ली में इसे नहीं लगातीं।

जो इन सूचियों में नहीं, वह आपके हाथ में

  • लग्न: ठीक पल (उस समय की लग्न राशि) आपके पंडित जी इन समयों के भीतर तय करते हैं।
  • आपकी अपनी बातें: तारा बल और चंद्र बल आपके जन्म नक्षत्र और चंद्र राशि पर टिके हैं। ये यहाँ नहीं जाँचे गए।
  • ग्रहण के दिन, क्षय और वृद्धि तिथियाँ, तिथि गंडांत, दग्ध और विष तिथि-वार के जोड़े, पंचक और चंद्र बल का वेध किसी भी मत में नहीं लगाए गए।
  • उत्तरायण का अलग नियम नहीं लगाया गया: मुहूर्त चिंतामणि नए घर के लिए उत्तरायण माँगता है, पर उसी की महीनों की सूची कार्तिक और मार्गशीर्ष को मध्यम मानती है। दोनों मत महीनों की सूची पर चलते हैं; कड़े मत का खरमास धनु वाला महीना बंद करता है। पुराने या दोबारा बने घर के लिए ग्रंथ की छूट भी नहीं लगाई गई।
  • इस पेज पर बताए नियमों से आगे की पारिवारिक और स्थानीय परंपराएँ।

आपके शहर या आपकी अपनी तारीख़ों के लिए

नक्षत्र या तिथि हर जगह एक ही पल बदलते हैं, पर हर जगह का सूर्योदय, सूर्यास्त और राहु काल अपना होता है — इसलिए दूसरे शहर में समय कुछ मिनट आगे-पीछे होता है, और किसी बदलाव के पास वाला दिन जुड़ या हट सकता है। मुहूर्त खोजक आपके शहर और आपकी तारीख़ों के लिए गृह प्रवेश की दोनों सूचियाँ निकालता है, एक बार में तीन महीने तक। किसी महीने से शुरू करें:

अपने जन्म नक्षत्र से निजी जाँच

सबके लिए बनी सूची आपके अपने नक्षत्र नहीं देख सकती। मुहूर्त चिंतामणि का गोचर प्रकरण दो निजी जाँचें जोड़ता है: तारा बल — उस दिन का नक्षत्र आपके जन्म नक्षत्र से गिना हुआ — और चंद्र बल — चंद्रमा की राशि आपकी जन्म चंद्र राशि से गिनी हुई। जो दिन आम तौर पर अच्छा है, वह आपके लिए कमज़ोर हो सकता है।

इस सूची की किसी तारीख़ के बारे में AI ज्योतिषी से पूछें। वह आपकी कुंडली से दोनों जाँचें करता है, आपकी कुंडली में सहेजी जगह के लिए उस दिन का समय पढ़ता है और अपने जवाब के पीछे का नियम बताता है।

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तारीख़ और काम लिखिए। अगली स्क्रीन पर साइन इन कीजिए और एक बार जन्म विवरण भरिए — सवाल आपकी चैट में तैयार मिलेगा।

नए खाते का पहला सवाल मुफ़्त है, और चैट में Send दबाने से पहले कोई शुल्क नहीं लगता।

मुहूर्त गाइड

इन सूचियों के पीछे के नियम, उनके स्रोतों के साथ:

लोग अक्सर पूछते हैं

2027 में गृह प्रवेश के कितने शुभ मुहूर्त हैं?
नई दिल्ली के लिए प्रचलित मत में 52 दिन और कड़े मत में 27 दिन। सबसे ज़्यादा दिन मार्च (9) और नवंबर (9) में हैं। अगस्त से अक्टूबर तक कोई दिन नहीं। इस पेज पर हर तारीख़ के साथ उसका समय IST में दिया है।
2027 में गृह प्रवेश के लिए कौन-से महीने शुभ हैं?
मुहूर्त चिंतामणि का गृहप्रवेश प्रकरण चांद्र मास माघ, फाल्गुन, वैशाख या ज्येष्ठ चाहता है; कार्तिक और मार्गशीर्ष मध्यम हैं (अमांत महीने)। 2027 में नई दिल्ली के लिए: मार्गशीर्ष (1 जनवरी – 7 जनवरी), माघ (7 फ़रवरी – 8 मार्च), फाल्गुन (9 मार्च – 6 अप्रैल), वैशाख (7 मई – 4 जून), ज्येष्ठ (5 जून – 4 जुलाई), कार्तिक (30 अक्टूबर – 28 नवंबर) और मार्गशीर्ष (29 नवंबर – 27 दिसंबर)।
क्या सिंहस्थ गुरु 2027 में गृह प्रवेश हो सकता है?
नए घर के लिए कड़ा मत कहता है नहीं, प्रचलित मत हाँ: कई छपे पंचांग यह नियम नहीं लगाते। गुरु 31 अक्टूबर 2026, 12:02 से 25 जनवरी 2027, 01:31 तक और 26 जून 2027, 05:18 से 15 सितंबर 2027, 09:56 तक मघा या पूर्वाफाल्गुनी के पहले चरण में है — ग्रंथ इसे हर क्षेत्र में वर्जित मानते हैं; 15 सितंबर 2027, 09:56 से 26 नवंबर 2027, 18:45 तक वह सिंह के बाक़ी भाग में है — इसे वे नई दिल्ली में भी वर्जित मानते हैं (समय IST में)। इससे 2027 में प्रचलित मत के 14 दिन कड़े मत में बंद हो जाते हैं।
क्या खरमास या चातुर्मास 2027 में गृह प्रवेश कर सकते हैं?
कड़े मत में नहीं। सूर्य धनु में हो तो वह महीना दक्षिणायन में पड़ता है, और मुहूर्त चिंतामणि नए घर में प्रवेश केवल उत्तरायण में बताता है (संस्कार और गृहप्रवेश प्रकरण); सूर्य मीन में हो तो उसे टालना प्रचलित परंपरा है, और चातुर्मास में देवउठनी एकादशी तक रुकना भी। प्रचलित मत कई छपी सूचियों की तरह चांद्र मास देखता है, इसलिए उसमें खरमास के 13 दिन और चातुर्मास के 3 दिन हैं, जिन्हें कड़ा मत बंद करता है। खरमास: 16 दिसंबर 2026, 10:25 – 14 जनवरी 2027, 21:10; 15 मार्च 2027, 07:00 – 14 अप्रैल 2027, 15:28; 16 दिसंबर 2027, 16:38 – 15 जनवरी 2028, 03:24 (IST)।
क्या ये तारीख़ें पुराने या दोबारा बने घर पर भी लागू हैं?
ये सूचियाँ नए घर में प्रवेश के लिए हैं। पुराने घर में लौटने, या नुक़सान के बाद दोबारा बने घर में जाने की बात अलग है: उसके लिए मुहूर्त चिंतामणि का गृहप्रवेश प्रकरण शुक्र या गुरु के अस्त, उसके आसपास के दिनों, सिंहस्थ या मकर गुरु की कोई जाँच नहीं माँगता — शुद्ध पंचांग और बताए गए नक्षत्र काफ़ी हैं। यह पेज वह छूट नहीं देता, इसलिए ऐसे घर के लिए दोनों सूचियाँ कुछ ऐसे दिन छोड़ सकती हैं जिन्हें ग्रंथ मान्य मानता है।
क्या गृह प्रवेश की ये तारीख़ें मेरे शहर के लिए भी यही हैं?
ज़्यादातर हाँ, पर मिनट-मिनट नहीं। नक्षत्र या तिथि हर जगह एक ही पल बदलते हैं, जबकि सूर्योदय, सूर्यास्त और राहु काल हर शहर के अपने होते हैं — इसलिए दूसरे शहर में समय कुछ मिनट आगे-पीछे होता है, और जहाँ कोई बदलाव समय की सीमा के पास पड़े, वहाँ कोई दिन जुड़ या हट सकता है। कड़ा मत कुछ नियम क्षेत्र के हिसाब से भी पढ़ता है: सिंह का बाक़ी भाग, मकर गुरु और होलाष्टक। मुहूर्त खोजक आपके शहर के लिए दोनों मत निकालता है।