हिंदू त्योहार 2027 — नई दिल्ली की तिथियाँ
2027 के लिए इस कैलेंडर में प्रमुख 40 व्रत-त्योहार हैं: होली — 22 मार्च (सोमवार); नवरात्रि — 30 सितंबर (गुरुवार); दशहरा — 9 अक्टूबर (शनिवार); दिवाली — 29 अक्टूबर (शुक्रवार)।
जनवरी 2027 पौष
लोहड़ी
गुरुवार, 14 जनवरी 2027
- सूर्योदय पर तिथि
- पौष शुक्ल षष्ठी · 13 जनवरी 13:02 – 14 जनवरी 13:59
- समय
- सूर्यास्त — 17:45
- नियम
- मकर संक्रांति से पहले की शाम — लोहड़ी का अलाव (पंजाब की परंपरा)।
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार
स्रोत
पंजाब की परंपरा: मकर संक्रांति से पहले की शाम
मकर संक्रांति
शुक्रवार, 15 जनवरी 2027
- सूर्योदय पर तिथि
- पौष शुक्ल सप्तमी · 14 जनवरी 13:59 – 15 जनवरी 14:14
- समय
- संक्रांति (सूर्य का राशि-प्रवेश) — 21:10 (14 जनवरी)
- नियम
- जिस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करे; सूर्यास्त के बाद प्रवेश हो तो अगला दिन।
- सूर्य 14 जनवरी 2027 को 21:10 पर मकर राशि में प्रवेश करता है।
- यह सूर्यास्त के बाद है, इसलिए पुण्य काल और पर्व अगली सुबह होता है।
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार
स्रोत
निर्णय सिंधु और धर्म सिंधु: संक्रांति (पुण्य काल: सूर्यास्त के बाद की संक्रांति का पुण्य काल अगली सुबह) का निर्णय
फ़रवरी 2027 माघ
वसंत पंचमी
गुरुवार, 11 फ़रवरी 2027
- निर्णायक तिथि
- माघ शुक्ल पंचमी · 11 फ़रवरी 03:05 – 12 फ़रवरी 03:19
- निर्णय का समय
- पूर्वाह्न — 07:03–12:36
- नियम
- माघ शुक्ल पंचमी जो पूर्वाह्न में हो; दो दिन हो तो पहला दिन (चतुर्थी-युक्त पंचमी)।
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार
स्रोत
निर्णय सिंधु और धर्म सिंधु: वसंत (श्री) पंचमी का निर्णय; निर्णय सिंधु: युग्म तिथियों का नियम (जैसे द्वितीया के साथ तृतीया, चतुर्थी के साथ पंचमी, अष्टमी के साथ नवमी)
मार्च 2027 फाल्गुन
महाशिवरात्रि
शनिवार, 6 मार्च 2027
- निर्णायक तिथि
- फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी · 6 मार्च 12:04 – 7 मार्च 13:47 (अमांत पंचांग में माघ)
- निर्णय का समय
- निशीथ काल — 00:08–00:57 (7 मार्च)
- नियम
- कृष्ण चतुर्दशी (उत्तर भारत में फाल्गुन, अमांत माघ) जो निशीथ काल (मध्यरात्रि) में हो।
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार
स्रोत
निर्णय सिंधु और धर्म सिंधु: शिवरात्रि (निशीथ-व्यापिनी चतुर्दशी) का निर्णय
होलिका दहन
रविवार, 21 मार्च 2027
- निर्णायक तिथि
- फाल्गुन पूर्णिमा · 21 मार्च 18:22 – 22 मार्च 16:14
- निर्णय का समय
- प्रदोष काल — 18:33–20:55
- नियम
- फाल्गुन पूर्णिमा, प्रदोष काल में, भद्रा के बाद — या भद्रा आधी रात के बाद तक रहे तो भद्रा में, पर भद्रा मुख में कभी नहीं; अगली शाम, यदि उस दिन सूर्योदय के बाद पूर्णिमा साढ़े तीन प्रहर रहे और प्रतिपदा बढ़ती हो।
- भद्रा आधी रात के बाद, 22 मार्च को 05:15 तक है, और भद्रा पुच्छ (01:27–02:32) भी आधी रात के बाद पड़ता है। इसलिए होलिका दहन प्रदोष काल में, भद्रा रहते हुए, होता है — भद्रा मुख (02:32–04:21) में कभी नहीं। कुछ पंचांग एक दूसरा समय भी देते हैं — भद्रा समाप्त होने के बाद, 22 मार्च को 05:15 से सूर्योदय (06:23) तक; वे इसे वाराणसी (काशी) के पंडितों का नियम बताते हैं।
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार
स्रोत
निर्णय सिंधु और धर्म सिंधु: होलिका दहन (भद्रा-रहित प्रदोष-व्यापिनी पूर्णिमा; साढ़े तीन प्रहर का नियम; भद्रा मुख में कभी नहीं) का निर्णय; मुहूर्त चिंतामणि, शुभाशुभ प्रकरण: भद्रा का मुख और पुच्छ
होली (धुलेंडी)
सोमवार, 22 मार्च 2027
- सूर्योदय पर तिथि
- फाल्गुन पूर्णिमा · 21 मार्च 18:22 – 22 मार्च 16:14
- समय
- सूर्योदय — 06:23
- नियम
- होलिका दहन के अगले दिन की सुबह — रंगों का दिन (परंपरा)।
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार
स्रोत
परंपरा: होलिका दहन का अगला दिन
अप्रैल 2027 चैत्र
उगादी और गुड़ी पड़वा (हिंदू नववर्ष)
बुधवार, 7 अप्रैल 2027
- निर्णायक तिथि
- चैत्र शुक्ल प्रतिपदा · 7 अप्रैल 05:21 – 8 अप्रैल 04:29
- निर्णय का समय
- सूर्योदय — 06:05
- नियम
- सूर्योदय के समय चैत्र शुक्ल प्रतिपदा — चांद्र वर्ष का पहला दिन (उत्तर में विक्रम संवत)।
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार
स्रोत
निर्णय सिंधु और धर्म सिंधु: वर्ष के पहले दिन (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा) का निर्णय
हनुमान जयंती
मंगलवार, 20 अप्रैल 2027
- निर्णायक तिथि
- चैत्र पूर्णिमा · 20 अप्रैल 04:52 – 21 अप्रैल 03:57
- निर्णय का समय
- सूर्योदय — 05:51
- नियम
- सूर्योदय के समय चैत्र पूर्णिमा (उत्तर भारत की तिथि; दक्षिण भारत के कुछ कैलेंडर दूसरे दिन मानते हैं)।
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार
स्रोत
उत्तर भारतीय पंचांगों की पद्धति: सूर्योदय वाली चैत्र पूर्णिमा
मई 2027 वैशाख
अक्षय तृतीया
रविवार, 9 मई 2027
- निर्णायक तिथि
- वैशाख शुक्ल तृतीया · 8 मई 11:43 – 9 मई 09:04
- निर्णय का समय
- पूर्वाह्न — 05:34–09:04 (तिथि वाला भाग; पूरा समय-खंड 05:34–12:18)
- नियम
- वैशाख शुक्ल तृतीया, पूर्वाह्न में; दो दिन हो तो दूसरा दिन, यदि उस दिन सूर्योदय के बाद तीन मुहूर्त रहे।
- 8 मई 2027 को भी पूर्वाह्न में यह तिथि है; यह कैलेंडर 9 मई 2027 मानता है।
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार
स्रोत
निर्णय सिंधु और धर्म सिंधु: अक्षय तृतीया (पूर्वाह्न; दूसरे दिन सूर्योदय के बाद तीन मुहूर्त तिथि रहे तो वह दिन) का निर्णय
बुद्ध पूर्णिमा
गुरुवार, 20 मई 2027
- निर्णायक तिथि
- वैशाख पूर्णिमा · 19 मई 16:03 – 20 मई 16:29
- निर्णय का समय
- सूर्योदय — 05:28
- नियम
- सूर्योदय के समय वैशाख पूर्णिमा।
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार
स्रोत
उत्तर भारतीय पंचांगों की पद्धति: सूर्योदय वाली वैशाख पूर्णिमा
जुलाई 2027 आषाढ़
गुरु पूर्णिमा
रविवार, 18 जुलाई 2027
- निर्णायक तिथि
- आषाढ़ पूर्णिमा · 17 जुलाई 18:49 – 18 जुलाई 21:15
- निर्णय का समय
- सूर्योदय — 05:34
- नियम
- सूर्योदय के समय आषाढ़ पूर्णिमा (व्यास पूर्णिमा)।
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार
स्रोत
उत्तर भारतीय पंचांगों की पद्धति: सूर्योदय वाली आषाढ़ पूर्णिमा
अगस्त 2027 श्रावण · भाद्रपद
नाग पंचमी
शुक्रवार, 6 अगस्त 2027
- निर्णायक तिथि
- श्रावण शुक्ल पंचमी · 6 अगस्त 02:28 – 7 अगस्त 00:23
- निर्णय का समय
- सूर्योदय — 05:45
- नियम
- सूर्योदय के समय श्रावण शुक्ल पंचमी; पूजा सुबह होती है।
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार
स्रोत
उत्तर भारतीय पंचांगों की पद्धति: सूर्योदय वाली श्रावण शुक्ल पंचमी
रक्षाबंधन
मंगलवार, 17 अगस्त 2027
- निर्णायक तिथि
- श्रावण पूर्णिमा · 16 अगस्त 10:29 – 17 अगस्त 12:59
- निर्णय का समय
- सुबह, सूर्योदय के बाद जब तक पूर्णिमा रहे — 05:51–12:59
- नियम
- श्रावण पूर्णिमा, भद्रा में कभी नहीं: जिस दिन सूर्योदय के बाद पूर्णिमा तीन मुहूर्त रहे, वह दिन (पंचांग पूर्णिमा रहने तक की सुबह देते हैं; ग्रंथ अपराह्न या प्रदोष बताते हैं); नहीं तो जिस दिन पूर्णिमा शुरू हो, उस दिन भद्रा के बाद अपराह्न या प्रदोष काल।
- पूर्णिमा 12:59 तक है — सूर्योदय के बाद तीन मुहूर्त से अधिक — और भद्रा सूर्योदय से पहले समाप्त हो चुकी है, इसलिए राखी उसी सुबह बाँधी जाती है।
- यहाँ दिया गया समय वही है जो उत्तर भारतीय पंचांग छापते हैं: सूर्योदय से पूर्णिमा रहने तक। धर्म सिंधु स्वयं इसी दिन का अपराह्न या प्रदोष काल बताता है।
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार
स्रोत
निर्णय सिंधु: रक्षाबंधन अपराह्न में, भद्रा में कभी नहीं; धर्म सिंधु: तीन मुहूर्त का नियम (सूर्योदय के बाद तीन मुहूर्त वाली पूर्णिमा, नहीं तो पिछला दिन)
कृष्ण जन्माष्टमी
बुधवार, 25 अगस्त 2027
- निर्णायक तिथि
- भाद्रपद कृष्ण अष्टमी · 24 अगस्त 20:25 – 25 अगस्त 19:20 (अमांत पंचांग में श्रावण)
- उस दिन का समय
- निशीथ काल — 00:01–00:46 (26 अगस्त)
- नियम
- कृष्ण अष्टमी (उत्तर भारत में भाद्रपद, अमांत श्रावण) निशीथ काल (मध्यरात्रि) में, मध्यरात्रि के रोहिणी नक्षत्र के साथ (स्मार्त)।
- 24 अगस्त 2027 को मध्यरात्रि में अष्टमी है, पर 25 अगस्त 2027 को सूर्योदय पर अष्टमी और मध्यरात्रि में रोहिणी है — यह योग अधिक बलवान है, इसलिए वही दिन माना गया।
- इस्कॉन और वैष्णव मंदिर अपना नियम मानते हैं (अष्टमी और रोहिणी, सप्तमी कभी नहीं); कुछ वर्षों में उनका दिन इससे एक दिन बाद होता है, इसलिए अपने मंदिर का कैलेंडर देखें।
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार
स्रोत
निर्णय सिंधु और धर्म सिंधु: जन्माष्टमी (निशीथ-व्यापिनी अष्टमी; रोहिणी का योग) का निर्णय
सितंबर 2027 भाद्रपद · आश्विन
गणेश चतुर्थी
शनिवार, 4 सितंबर 2027
- निर्णायक तिथि
- भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी · 3 सितंबर 14:20 – 4 सितंबर 12:26
- निर्णय का समय
- मध्याह्न — 11:04–12:26 (तिथि वाला भाग; पूरा समय-खंड 11:04–13:36)
- नियम
- भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी जो मध्याह्न में हो — गणेश पूजा का समय।
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार
स्रोत
निर्णय सिंधु और धर्म सिंधु: गणेश चतुर्थी (मध्याह्न-व्यापिनी चतुर्थी) का निर्णय
अनंत चतुर्दशी
मंगलवार, 14 सितंबर 2027
- निर्णायक तिथि
- भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी · 14 सितंबर 00:40 – 15 सितंबर 02:49
- निर्णय का समय
- सूर्योदय — 06:05
- नियम
- सूर्योदय के समय भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी; गणेश विसर्जन का दिन।
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार
स्रोत
उत्तर भारतीय पंचांगों की पद्धति: सूर्योदय वाली भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी
पितृ पक्ष आरंभ
गुरुवार, 16 सितंबर 2027
- निर्णायक तिथि
- आश्विन कृष्ण प्रतिपदा · 16 सितंबर 04:34 – 17 सितंबर 05:52 (अमांत पंचांग में भाद्रपद)
- निर्णय का समय
- अपराह्न — 13:30–15:58
- नियम
- प्रतिपदा श्राद्ध: कृष्ण प्रतिपदा (उत्तर भारत में आश्विन) जो अपराह्न में हो — श्राद्ध का समय।
- पूर्णिमा श्राद्ध (जिनका देहांत पूर्णिमा को हुआ) 15 सितंबर 2027 को है।
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार
स्रोत
निर्णय सिंधु और धर्म सिंधु: श्राद्ध का निर्णय (अपराह्न-व्यापिनी तिथि)
सर्व पितृ अमावस्या (महालया)
बुधवार, 29 सितंबर 2027
- निर्णायक तिथि
- आश्विन अमावस्या · 29 सितंबर 10:56 – 30 सितंबर 08:06 (अमांत पंचांग में भाद्रपद)
- निर्णय का समय
- अपराह्न — 13:23–15:47
- नियम
- अमावस्या (उत्तर भारत में आश्विन, अमांत भाद्रपद) जो अपराह्न में हो — पितृ पक्ष का अंतिम श्राद्ध।
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार
स्रोत
निर्णय सिंधु और धर्म सिंधु: श्राद्ध का निर्णय (अपराह्न-व्यापिनी तिथि)
अक्टूबर 2027 आश्विन · कार्तिक
दुर्गा अष्टमी
गुरुवार, 7 अक्टूबर 2027
- निर्णायक तिथि
- आश्विन शुक्ल अष्टमी · 7 अक्टूबर 04:14 – 8 अक्टूबर 06:28
- निर्णय का समय
- सूर्योदय — 06:17
- नियम
- सूर्योदय के समय आश्विन शुक्ल अष्टमी — नवमी-युक्त, सप्तमी-विद्ध नहीं: दो सूर्योदयों पर हो तो पहला, पूरा दिन; सूर्योदय के बाद एक घटी (24 मिनट) से कम रहे, या नवमी किसी सूर्योदय पर न हो, तो पिछला दिन।
- 8 अक्टूबर 2027 के सूर्योदय पर भी अष्टमी है (सूर्योदय के बाद 11 मिनट), और वहाँ वह नवमी-युक्त है; धर्म सिंधु पहला दिन मानता है, जिस पर अष्टमी पूरी है।
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार
स्रोत
निर्णय सिंधु और धर्म सिंधु: महाष्टमी का निर्णय (नवमी-युक्त, सप्तमी-विद्ध नहीं; दो सूर्योदय, अल्प अष्टमी और क्षय नवमी पर धर्म सिंधु)
दशहरा (विजयादशमी)
शनिवार, 9 अक्टूबर 2027
- निर्णायक तिथि
- आश्विन शुक्ल दशमी · 9 अक्टूबर 09:02 – 10 अक्टूबर 11:41
- निर्णय का समय
- अपराह्न — 13:18–15:39
- नियम
- आश्विन शुक्ल दशमी जो अपराह्न में हो; दो दिन हो तो पहला दिन।
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार
स्रोत
निर्णय सिंधु और धर्म सिंधु: विजयादशमी (अपराह्न) का निर्णय
शरद पूर्णिमा (कोजागरी)
गुरुवार, 14 अक्टूबर 2027
- निर्णायक तिथि
- आश्विन पूर्णिमा · 14 अक्टूबर 18:50 – 15 अक्टूबर 19:17
- निर्णय का समय
- निशीथ काल — 23:42 – 00:32 (15 अक्टूबर)
- नियम
- आश्विन पूर्णिमा जो निशीथ काल (मध्यरात्रि) में हो — लक्ष्मी की कोजागरी रात।
- सूर्योदय वाली पूर्णिमा (आश्विन पूर्णिमा — व्रत और स्नान) 15 अक्टूबर 2027 को है।
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार
स्रोत
निर्णय सिंधु और धर्म सिंधु: कोजागर (निशीथ-व्यापिनी पूर्णिमा) का निर्णय
करवा चौथ
सोमवार, 18 अक्टूबर 2027
- निर्णायक तिथि
- कार्तिक कृष्ण चतुर्थी · 18 अक्टूबर 17:52 – 19 अक्टूबर 16:43 (अमांत पंचांग में आश्विन)
- निर्णय का समय
- चंद्रोदय — 19:35
- नियम
- कृष्ण चतुर्थी (उत्तर भारत में कार्तिक, अमांत आश्विन) जो चंद्रोदय के समय हो।
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार
स्रोत
उत्तर भारतीय पंचांगों की पद्धति: चंद्रोदय-व्यापिनी कृष्ण चतुर्थी
अहोई अष्टमी
शुक्रवार, 22 अक्टूबर 2027
- निर्णायक तिथि
- कार्तिक कृष्ण अष्टमी · 22 अक्टूबर 11:56 – 23 अक्टूबर 10:00 (अमांत पंचांग में आश्विन)
- निर्णय का समय
- प्रदोष काल — 17:45–20:17
- नियम
- कृष्ण अष्टमी (उत्तर भारत में कार्तिक) जो शाम के प्रदोष काल में हो — तारे देखने का समय।
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार
स्रोत
उत्तर भारतीय पंचांगों की पद्धति: प्रदोष-व्यापिनी कृष्ण अष्टमी
धनतेरस
बुधवार, 27 अक्टूबर 2027
- निर्णायक तिथि
- कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी · 27 अक्टूबर 01:04 – 27 अक्टूबर 22:50 (अमांत पंचांग में आश्विन)
- निर्णय का समय
- प्रदोष काल — 17:41–20:15
- नियम
- कृष्ण त्रयोदशी (उत्तर भारत में कार्तिक) जो प्रदोष काल में हो (यम दीपदान)।
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार
स्रोत
निर्णय सिंधु और धर्म सिंधु: त्रयोदशी के यम दीपदान (प्रदोष काल में) का निर्णय
नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली)
गुरुवार, 28 अक्टूबर 2027
- निर्णायक तिथि
- कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी · 27 अक्टूबर 22:50 – 28 अक्टूबर 20:49 (अमांत पंचांग में आश्विन)
- निर्णय का समय
- चंद्रोदय से सूर्योदय तक (भोर से पहले) — 05:06–06:30
- नियम
- कृष्ण चतुर्दशी (उत्तर भारत में कार्तिक) जो चंद्रोदय और सूर्योदय के बीच हो — अभ्यंग स्नान का समय।
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार
स्रोत
उत्तर भारतीय पंचांगों की पद्धति: चंद्रोदय से सूर्योदय के बीच की कृष्ण चतुर्दशी, अभ्यंग स्नान के लिए
दिवाली (लक्ष्मी पूजा)
शुक्रवार, 29 अक्टूबर 2027
- निर्णायक तिथि
- कार्तिक अमावस्या · 28 अक्टूबर 20:49 – 29 अक्टूबर 19:07 (अमांत पंचांग में आश्विन)
- निर्णय का समय
- प्रदोष काल — 17:39–19:07 (तिथि वाला भाग; पूरा समय-खंड 17:39–20:13)
- नियम
- अमावस्या (उत्तर भारत में कार्तिक, अमांत आश्विन) जो प्रदोष काल में हो।
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार
स्रोत
निर्णय सिंधु और धर्म सिंधु: दीपावली (लक्ष्मी पूजा: प्रदोष-व्यापिनी अमावस्या) का निर्णय
गोवर्धन पूजा
शनिवार, 30 अक्टूबर 2027
- निर्णायक तिथि
- कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा · 29 अक्टूबर 19:07 – 30 अक्टूबर 17:52
- निर्णय का समय
- सूर्योदय — 06:31
- नियम
- सुबह की कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा: सूर्योदय वाली प्रतिपदा, या किसी सूर्योदय पर न हो तो जिस दिन शुरू हो।
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार
स्रोत
निर्णय सिंधु और धर्म सिंधु: बलि प्रतिपदा और गोवर्धन (सुबह की प्रतिपदा) का निर्णय
भाई दूज
रविवार, 31 अक्टूबर 2027
- निर्णायक तिथि
- कार्तिक शुक्ल द्वितीया · 30 अक्टूबर 17:52 – 31 अक्टूबर 17:14
- निर्णय का समय
- अपराह्न — 13:11–15:24
- नियम
- कार्तिक शुक्ल द्वितीया (यम द्वितीया) जो अपराह्न में हो; दो दिन हो तो दूसरा दिन (तृतीया-युक्त द्वितीया)।
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार
स्रोत
निर्णय सिंधु और धर्म सिंधु: यम द्वितीया (अपराह्न) का निर्णय; निर्णय सिंधु: युग्म तिथियों का नियम (जैसे द्वितीया के साथ तृतीया, चतुर्थी के साथ पंचमी, अष्टमी के साथ नवमी)
नवंबर 2027 कार्तिक
छठ: नहाय-खाय
मंगलवार, 2 नवंबर 2027
- सूर्योदय पर तिथि
- कार्तिक शुक्ल चतुर्थी · 1 नवंबर 17:16 – 2 नवंबर 18:03
- समय
- सूर्योदय — 06:33
- नियम
- छठ का पहला दिन, संध्या अर्घ्य से दो दिन पहले: स्नान और एक बार सात्विक भोजन।
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार
स्रोत
बिहार और पूर्वांचल की परंपरा: सूर्यास्त के समय की षष्ठी को संध्या अर्घ्य, और उसके आगे-पीछे के दिन
छठ: खरना (लोहंडा)
बुधवार, 3 नवंबर 2027
- सूर्योदय पर तिथि
- कार्तिक शुक्ल पंचमी · 2 नवंबर 18:03 – 3 नवंबर 19:32
- समय
- सूर्यास्त — 17:35
- नियम
- छठ का दूसरा दिन: दिन भर उपवास, शाम को खीर का प्रसाद; फिर 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू।
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार
स्रोत
बिहार और पूर्वांचल की परंपरा: सूर्यास्त के समय की षष्ठी को संध्या अर्घ्य, और उसके आगे-पीछे के दिन
छठ पूजा (संध्या अर्घ्य)
गुरुवार, 4 नवंबर 2027
- निर्णायक तिथि
- कार्तिक शुक्ल षष्ठी · 3 नवंबर 19:32 – 4 नवंबर 21:38
- निर्णय का समय
- सूर्यास्त — 17:34
- नियम
- कार्तिक शुक्ल षष्ठी जो सूर्यास्त के समय हो — डूबते सूर्य को संध्या अर्घ्य।
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार
स्रोत
बिहार और पूर्वांचल की परंपरा: सूर्यास्त के समय की षष्ठी को संध्या अर्घ्य, और उसके आगे-पीछे के दिन
छठ: उषा अर्घ्य
शुक्रवार, 5 नवंबर 2027
- सूर्योदय पर तिथि
- कार्तिक शुक्ल सप्तमी · 4 नवंबर 21:38 – 6 नवंबर 00:10
- समय
- सूर्योदय — 06:35
- नियम
- छठ का चौथा दिन: उगते सूर्य को अर्घ्य, फिर पारण।
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार
स्रोत
बिहार और पूर्वांचल की परंपरा: सूर्यास्त के समय की षष्ठी को संध्या अर्घ्य, और उसके आगे-पीछे के दिन
देवउठनी एकादशी
बुधवार, 10 नवंबर 2027
- निर्णायक तिथि
- कार्तिक शुक्ल एकादशी · 9 नवंबर 07:35 – 10 नवंबर 09:12
- निर्णय का समय
- सूर्योदय — 06:39
- नियम
- कार्तिक शुक्ल एकादशी (प्रबोधिनी), स्मार्त नियम: सूर्योदय वाली एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहली; किसी पर न हो तो जिस दिन शुरू हो।
- इस्कॉन और दूसरे वैष्णव कैलेंडर एकादशी के कुछ और नियम मानते हैं और कुछ वर्षों में एक दिन बाद व्रत रखते हैं; अपने मंदिर का कैलेंडर देखें।
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार
स्रोत
निर्णय सिंधु और धर्म सिंधु: एकादशी का निर्णय (स्मार्त: सूर्योदय वाली एकादशी; वैष्णव: अरुणोदय में दशमी से विद्ध एकादशी नहीं)
तुलसी विवाह
गुरुवार, 11 नवंबर 2027
- निर्णायक तिथि
- कार्तिक शुक्ल द्वादशी · 10 नवंबर 09:12 – 11 नवंबर 10:08
- निर्णय का समय
- सूर्योदय — 06:40
- नियम
- सूर्योदय के समय कार्तिक शुक्ल द्वादशी (परंपरा; कुछ परिवार एकादशी की शाम को करते हैं)।
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार
स्रोत
परंपरा: सूर्योदय वाली कार्तिक शुक्ल द्वादशी (कुछ परिवार एकादशी की शाम)
देव दीपावली (वाराणसी)
शनिवार, 13 नवंबर 2027
- निर्णायक तिथि
- कार्तिक पूर्णिमा · 13 नवंबर 09:56 – 14 नवंबर 08:56
- निर्णय का समय
- प्रदोष काल — 17:11–19:48
- नियम
- कार्तिक पूर्णिमा जो वाराणसी में प्रदोष काल में हो — घाटों पर दीपदान (काशी की परंपरा)।
समय वाराणसी (IST) के अनुसार
स्रोत
वाराणसी (काशी) की परंपरा: वहाँ प्रदोष-व्यापिनी कार्तिक पूर्णिमा
कार्तिक पूर्णिमा
रविवार, 14 नवंबर 2027
- निर्णायक तिथि
- कार्तिक पूर्णिमा · 13 नवंबर 09:56 – 14 नवंबर 08:56
- निर्णय का समय
- सूर्योदय — 06:42
- नियम
- सूर्योदय के समय कार्तिक पूर्णिमा — कार्तिक स्नान का दिन।
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार
स्रोत
उत्तर भारतीय पंचांगों की पद्धति: सूर्योदय वाली कार्तिक पूर्णिमा
त्योहार की तारीख़ कैसे तय होती है
हर हिंदू त्योहार किसी तिथि से जुड़ा है। तिथि चंद्र-दिन है — वह समय जिसमें चंद्रमा सूर्य से 12 अंश आगे बढ़ता है। तिथि किसी भी घड़ी शुरू होकर किसी भी घड़ी ख़त्म हो सकती है, इसलिए वह अक्सर दो तारीख़ों में फैली रहती है। इसीलिए त्योहार की तारीख़ सिर्फ़ "तिथि वाला दिन" नहीं होती।
हर त्योहार का नियम बताता है कि दिन के किस समय उसकी तिथि होनी चाहिए। दिवाली की लक्ष्मी पूजा के लिए प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद का समय) में अमावस्या चाहिए। जन्माष्टमी के लिए निशीथ काल (आधी रात) में अष्टमी, राम नवमी और गणेश चतुर्थी के लिए मध्याह्न में तिथि, दशहरा और भाई दूज के लिए अपराह्न में, करवा चौथ के लिए चंद्रोदय पर और नरक चतुर्दशी के लिए चंद्रोदय से सूर्योदय के बीच तिथि चाहिए। बहुत-से व्रत और स्नान के दिन बस सूर्योदय के समय की तिथि — उदया तिथि — लेते हैं।
त्योहार उसी दिन होता है जिस दिन तिथि उस समय-खंड में हो। अगर तिथि दो दिन उस समय में हो, या किसी भी दिन न हो, तो त्योहार के नियम में यह भी तय है कि कौन-सा दिन लिया जाए; हर त्योहार के कार्ड में लिखा है कि यह कैलेंडर कौन-सा दिन मानता है, और दूसरा दिन भी, जिसमें तिथि रहती है।
यहाँ इस्तेमाल हुए समय-खंड
सूर्योदय और सूर्यास्त वही मानक समय हैं जो पंचांगों में छपते हैं — नई दिल्ली में सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर, वायुमंडलीय अपवर्तन के सामान्य हिसाब के साथ। सूर्योदय से सूर्यास्त तक के दिन को पाँच बराबर भागों में बाँटा जाता है; तीसरा भाग मध्याह्न है और चौथा अपराह्न। पूर्वाह्न सूर्योदय से दिन के मध्य तक चलता है।
प्रदोष काल सूर्यास्त के बाद रात का पहला पाँचवाँ भाग है — नई दिल्ली में भरी गर्मी में लगभग 2 घंटे और कड़ाके की सर्दी में लगभग 2 घंटे 45 मिनट। निशीथ काल रात के पंद्रह मुहूर्तों में आठवाँ है, यानी आधी रात के आसपास का समय। अरुणोदय सूर्योदय से पहले के 96 मिनट हैं। चंद्रोदय वह पल है जब चंद्रमा का केंद्र क्षितिज पर आता है; नरक चतुर्दशी का समय-खंड भोर से पहले के चंद्रोदय से सूर्योदय तक चलता है। इस पेज के सारे समय भारतीय मानक समय (IST) में हैं।
जब निर्णायक तिथि समय-खंड के बीच में शुरू या ख़त्म होती है, तो कार्ड पहले समय-खंड का वह भाग देता है जिसमें तिथि है, फिर पूरा समय-खंड। जन्माष्टमी और राम नवमी अपवाद हैं: उनका समय-खंड जन्म का समय है, इसलिए वह पूरा दिया जाता है; तिथि का आरंभ और अंत भी कार्ड पर लिखा है।
अमांत और पूर्णिमांत महीनों के नाम
उत्तर भारत में चांद्र मास एक पूर्णिमा से अगली पूर्णिमा तक गिना जाता है (पूर्णिमांत)। महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत में अमावस्या से अमावस्या तक (अमांत)। शुक्ल पक्ष का नाम दोनों में एक ही रहता है। कृष्ण पक्ष में उत्तर भारत अगले महीने का नाम ले लेता है — दिवाली की रात उत्तर प्रदेश में कार्तिक अमावस्या है और महाराष्ट्र में आश्विन अमावस्या। रात एक ही है, नाम दो।
कार्ड पर पहले उत्तर भारतीय नाम है, और जहाँ अमांत नाम अलग है वहाँ वह भी लिखा है, ताकि आप अपने घर के पंचांग से तारीख़ मिला सकें।
दूसरे कैलेंडर में दिन अलग क्यों हो सकता है
जगह से फ़र्क पड़ता है। कोलकाता में सूर्योदय नई दिल्ली से आधे घंटे से एक घंटे तक पहले होता है (मौसम के अनुसार), इसलिए जो तिथि दिल्ली के सूर्योदय से ठीक पहले ख़त्म होती है, वह पूर्व के शहरों में सूर्योदय पर बनी रह सकती है। यहाँ की तारीख़ें नई दिल्ली की हैं; उत्तर भारत के ज़्यादातर हिस्से में यही दिन माने जाते हैं, पर जो त्योहार अपने समय-खंड के किनारे पर हो, वह दूसरी जगह एक दिन आगे-पीछे हो सकता है।
परंपरा से भी फ़र्क पड़ता है। यह कैलेंडर स्मार्त परंपरा मानता है, जो उत्तर भारत के ज़्यादातर घरों में चलती है। इस्कॉन और दूसरे वैष्णव कैलेंडर एकादशी, जन्माष्टमी और राम नवमी के लिए अपने नियम मानते हैं और कभी-कभी अगला दिन रखते हैं; जहाँ ऐसा है, कार्ड में लिखा है। कुछ त्योहारों की क्षेत्रीय तारीख़ें भी होती हैं, जैसे दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में हनुमान जयंती। घर की पूजा के लिए आपके पुरोहित या स्थानीय मंदिर का कैलेंडर ही अंतिम है।
स्रोत और यह कैलेंडर कैसे बनता है
नियम निर्णय सिंधु (कमलाकर भट्ट, 17वीं सदी) और धर्म सिंधु (काशीनाथ उपाध्याय, 18वीं सदी) के शास्त्रीय निर्णय हैं, जैसे उत्तर भारत के पंचांग उन्हें लागू करते हैं। जिस दिन के लिए कोई शास्त्रीय निर्णय उद्धृत नहीं है, जैसे करवा चौथ या गुरु पूर्णिमा, उसके कार्ड पर लिखा है कि वह उत्तर भारतीय पंचांगों की पद्धति पर है; जो दिन परंपरा से माने जाते हैं — छठ, लोहड़ी, होली, तुलसी विवाह, देव दीपावली — उन्हें परंपरा लिखा गया है। सूर्य और चंद्रमा की स्थिति Swiss Ephemeris से, लाहिड़ी अयनांश के साथ आती है। कोई साल लाइव होने से पहले हर तारीख़ नई दिल्ली के एक प्रकाशित पंचांग से मिलाई जाती है।
मुहूर्त गाइड
विवाह और नए घर में प्रवेश की तारीख़ें मौसम के अपने नियमों से चलती हैं। ये लेख बताते हैं कि 2026–27 में कौन-से नियम मायने रखते हैं।
- सिंहस्थ गुरु 2026–27 और विवाह की तारीख़ें — सिंह राशि के गुरु: ग्रंथ क्या कहते हैं, और दोनों मतों से विवाह का मौसम
- खरमास 2026–27 — घंटे तक की तारीख़ें, क्या टालें और क्या नहीं
- मुहूर्त की तारीख़ें अलग क्यों होती हैं — दो पंचांगों की तारीख़ें न मिलने के नौ कारण
त्योहारों की तारीख़ों से जुड़े सवाल
- 2027 में दिवाली कब है?
- दिवाली (लक्ष्मी पूजा) शुक्रवार, 29 अक्टूबर 2027 को है। लक्ष्मी पूजा के नियम में प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद का समय) में अमावस्या चाहिए। कार्तिक अमावस्या (28 अक्टूबर 20:49 – 29 अक्टूबर 19:07) उस शाम के प्रदोष काल के एक भाग में रहती है: नई दिल्ली में 17:39–20:13 में से 17:39–19:07।
- 2027 में धनतेरस कब है?
- धनतेरस बुधवार, 27 अक्टूबर 2027 को है। इसके नियम (यम दीपदान) में प्रदोष काल में कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी चाहिए, और उस शाम के पूरे प्रदोष काल (नई दिल्ली में 17:41–20:15) में यही तिथि है।
- 2027 में होली कब है?
- होलिका दहन रविवार, 21 मार्च 2027 को और रंगों वाली होली सोमवार, 22 मार्च 2027 को है। भद्रा आधी रात के बाद, 22 मार्च को 05:15 तक है, और भद्रा पुच्छ (01:27–02:32) भी आधी रात के बाद पड़ता है। इसलिए होलिका दहन प्रदोष काल में, भद्रा रहते हुए, होता है — भद्रा मुख (02:32–04:21) में कभी नहीं। कुछ पंचांग एक दूसरा समय भी देते हैं — भद्रा समाप्त होने के बाद, 22 मार्च को 05:15 से सूर्योदय (06:23) तक; वे इसे वाराणसी (काशी) के पंडितों का नियम बताते हैं।
- 2027 में छठ पूजा की तारीख़ें क्या हैं?
- नहाय-खाय मंगलवार, 2 नवंबर 2027 को, खरना बुधवार, 3 नवंबर 2027 को, संध्या अर्घ्य गुरुवार, 4 नवंबर 2027 को और उषा अर्घ्य शुक्रवार, 5 नवंबर 2027 को। मुख्य दिन वह है जब सूर्यास्त के समय कार्तिक शुक्ल षष्ठी हो (नई दिल्ली में 17:34)।
- 2027 में रक्षाबंधन कब है?
- रक्षाबंधन मंगलवार, 17 अगस्त 2027 को है। पूर्णिमा 12:59 तक है — सूर्योदय के बाद तीन मुहूर्त से अधिक — और भद्रा सूर्योदय से पहले समाप्त हो चुकी है, इसलिए राखी उसी सुबह बाँधी जाती है। यहाँ नई दिल्ली के लिए दिया गया समय 05:51–12:59 है।
- 2027 में जन्माष्टमी कब है?
- कृष्ण जन्माष्टमी (स्मार्त) बुधवार, 25 अगस्त 2027 को है। इसका नियम निशीथ काल (आधी रात के आसपास) देखता है: नई दिल्ली में 00:01–00:46 (26 अगस्त)। 24 अगस्त 2027 को मध्यरात्रि में अष्टमी है, पर 25 अगस्त 2027 को सूर्योदय पर अष्टमी और मध्यरात्रि में रोहिणी है — यह योग अधिक बलवान है, इसलिए वही दिन माना गया। इस्कॉन और वैष्णव मंदिर अपना नियम मानते हैं (अष्टमी और रोहिणी, सप्तमी कभी नहीं); कुछ वर्षों में उनका दिन इससे एक दिन बाद होता है, इसलिए अपने मंदिर का कैलेंडर देखें।
- 2027 में देवउठनी एकादशी कब है?
- देवउठनी एकादशी (स्मार्त) बुधवार, 10 नवंबर 2027 को है। इस्कॉन और दूसरे वैष्णव कैलेंडर एकादशी के कुछ और नियम मानते हैं और कुछ वर्षों में एक दिन बाद व्रत रखते हैं; अपने मंदिर का कैलेंडर देखें।
- क्या ये तारीख़ें पूरे भारत में एक जैसी हैं?
- ये नई दिल्ली के लिए निकाली गई हैं और उत्तर भारत के ज़्यादातर हिस्से में लागू होती हैं। सूर्योदय और चंद्रोदय का समय जगह के साथ बदलता है, इसलिए जिस त्योहार की तिथि अपने समय-खंड के पास ख़त्म होती है, वह दूसरे शहर में एक दिन अलग पड़ सकता है; दक्षिण भारत और वैष्णव कैलेंडर कुछ नियम अपने मानते हैं।
- ये तारीख़ें कैसे निकाली जाती हैं?
- सूर्य और चंद्रमा की स्थिति (Swiss Ephemeris, लाहिड़ी अयनांश) से यह कैलेंडर हर तिथि का आरंभ और अंत निकालता है, फिर नई दिल्ली के लिए हर त्योहार का नियम लागू करता है कि दिन के किस समय तिथि होनी चाहिए। निर्णायक तिथि, उसका समय, नियम का स्रोत और दूसरा संभावित दिन हर त्योहार के साथ लिखा है।