खरमास उत्तर भारत में साल के उन दो महीनों का नाम है जब सूर्य धनु या मीन राशि में होते हैं। हर बार लगभग तीस दिन तक बहुत-से परिवार विवाह और कुछ दूसरे संस्कार नहीं करते। रोज़मर्रा का जीवन, पूजा-पाठ और काम-काज हमेशा की तरह चलते रहते हैं।
इस लेख में 2026–27 की तारीख़ें हैं, यह नियम कहाँ से आया, ग्रंथ क्या टालते हैं और परंपरा क्या जोड़ती है, और किन कामों पर कोई रोक नहीं है।
खरमास 2026–27 की तारीख़ें
खरमास सूर्य से गिना जाता है, इसलिए यह संक्रांति पर — जिस क्षण सूर्य नई निरयण राशि में प्रवेश करते हैं — शुरू और समाप्त होता है, अमावस्या या पूर्णिमा पर नहीं। इसी कारण इसकी तारीख़ें हर साल लगभग एक-सी रहती हैं।
| खरमास | शुरू (सूर्य का प्रवेश) | समाप्त (सूर्य अगली राशि में) |
|---|---|---|
| धनु खरमास | 16 दिसंबर 2026, लगभग 10:25 IST | 14 जनवरी 2027, लगभग 21:10 IST (मकर संक्रांति) |
| मीन खरमास | 15 मार्च 2027, लगभग 07:00 IST | 14 अप्रैल 2027, लगभग 15:28 IST (मेष संक्रांति) |
| अगला धनु खरमास | 16 दिसंबर 2027, लगभग 16:38 IST | मकर संक्रांति, जनवरी 2028 के मध्य में |
समय भारत (IST) के हैं, Swiss Ephemeris और लाहिड़ी अयनांश से निकाले गए हैं। 14 जनवरी 2027 को सूर्य सूर्यास्त के बाद मकर में आते हैं, इसलिए आपके पंचांग में मकर संक्रांति का पर्व और उसका पुण्यकाल 15 जनवरी को हो सकता है — अपने स्थानीय पंचांग में देख लीजिए।
किसी पंचांग की तारीख़ इनसे एक दिन आगे-पीछे दो और कारणों से भी हो सकती है। बहुत-से पंचांग संक्रांति के आसपास के घंटे भी टालते हैं — बी.वी. रमन, उदाहरण के लिए, दोनों ओर 16 घड़ी, यानी लगभग साढ़े छह घंटे गिनते हैं — इसलिए ठीक सीमा पर पड़ने वाली तारीख़ छूट सकती है। और दूसरे अयनांश वाला पंचांग संक्रांति का क्षण ही अलग रखता है: रमन के अयनांश से यह लगभग डेढ़ दिन पहले आती है।
यह नियम कहाँ से आया
मुहूर्त चिंतामणि — राम दैवज्ञ का लगभग 1600 ई. में लिखा मुहूर्त ग्रंथ — अपने विवाह प्रकरण में वे महीने गिनाता है, सूर्य की राशि से, जिनमें विवाह होते हैं: सूर्य मेष, वृषभ, मिथुन, वृश्चिक, मकर या कुंभ में हों। धनु और मीन इस सूची में नहीं हैं। (कर्क से तुला तक भी नहीं हैं, पर वे महीने ज़्यादातर चातुर्मास में पड़ते हैं, जो उन्हें वैसे भी बंद कर देता है।)
यानी इसका शास्त्रीय आधार विवाह का एक नियम है, जो सूर्य की राशि से लिखा गया है। यही ग्रंथ अपने अलग नियमों से घर बनाने की शुरुआत को इन दोनों महीनों से, और नए घर में प्रवेश को दिसंबर-जनवरी वाले महीने से बाहर रखता है; अगले हिस्से में इनका ब्योरा है। "खरमास" शब्द ग्रंथ में नहीं है; यह लोक-प्रचलित नाम है। इसके पीछे एक प्रसिद्ध लोककथा है: इन महीनों में सूर्य के घोड़े विश्राम करते हैं और रथ खर (गधे) खींचते हैं, इसलिए सूर्य का तेज कम रहता है। यह कथा है, नियम नहीं — पर ज़्यादातर लोग इस महीने को इसी से याद रखते हैं।
कुछ हिंदी पंचांग और अख़बार इस अवधि को मलमास भी कहते हैं। यही शब्द अधिक मास के लिए भी चलता है, जो एक अलग चीज़ है — और अक्टूबर 2026 से दिसंबर 2027 के बीच कोई अधिक मास नहीं है।
खरमास में क्या टाला जाता है
- विवाह। यही हिस्सा ऊपर के शास्त्रीय नियम पर टिका है, और लगभग हर उत्तर भारतीय पंचांग खरमास में विवाह की कोई तारीख़ नहीं दिखाता।
- घर बनाना और नए घर में प्रवेश — ग्रंथों के अनुसार भी। भूमि पूजन और निर्माण की शुरुआत के लिए मुहूर्त चिंतामणि का वास्तु प्रकरण अपने महीनों में धनु और मीन के सूर्य को नहीं गिनता, और वहीं उद्धृत नारद दोनों से सावधान करते हैं। नए घर में प्रवेश के लिए इसी ग्रंथ का गृहप्रवेश प्रकरण सूर्य का उत्तरायण (मकर संक्रांति से सूर्य के कर्क में जाने तक) माँगता है, और इसका संस्कार प्रकरण गृह प्रवेश को मुंडन और जनेऊ (उपनयन) के साथ उन कामों में गिनता है जो दक्षिणायन में नहीं होते। दिसंबर-जनवरी का खरमास पूरा दक्षिणायन में पड़ता है, इसलिए ग्रंथ उसमें ये तीनों काम रोकते हैं। नारद कार्तिक और मार्गशीर्ष को नए घर के लिए "मध्यम" महीने मानते हैं। कुछ पंचांग गृह प्रवेश केवल चंद्र मास देखकर चुनते हैं, इसीलिए वे दिसंबर की तारीख़ें भी देते हैं। पुराने घर में लौटना, या नुक़सान के बाद दोबारा बने घर में जाना अलग बात है: उसके लिए ग्रंथ ऐसी कोई जाँच नहीं माँगता।
- दूसरे संस्कार, परंपरा से। बहुत-से परिवार खरमास में सगाई और मकान या ज़मीन की ख़रीद भी टालते हैं। मार्च-अप्रैल का खरमास उत्तरायण में पड़ता है, फिर भी बहुत-से परिवार उसमें मुंडन, जनेऊ और गृह प्रवेश के लिए रुकते हैं; तब ग्रंथ हर संस्कार के अपने महीने देखते हैं, और पंचांगों में अंतर रहता है। इन सबका पालन कितनी कड़ाई से होता है, यह परिवार और क्षेत्र पर निर्भर है।
- क्षेत्रीय नाम और अंतर। गुजरात में इसी अवधि को कमुरता कहते हैं। तमिल परंपरा अपने सौर मासों से चलती है और खरमास से पूरी तरह मेल नहीं खाती: मार्गझी (सूर्य धनु में) में आम तौर पर विवाह नहीं होते, जबकि पंगुनी (सूर्य मीन में) को अलग-अलग पंचांग अलग तरह से देखते हैं। दक्षिण के परिवार अपने पंचांगम के अनुसार चलें।