मुंडन — ग्रंथों में चूड़ाकरण या चौल — बच्चे के पहले बाल उतारने का संस्कार है, और यह साल के एक तय मौसम में ही होता है। मुहूर्त चिंतामणि, जिसे रामदैवज्ञ ने लगभग 1600 ईस्वी में लिखा, इसे सूर्य के उत्तरायण तक सीमित रखता है, इसलिए हर साल का बड़ा हिस्सा मुंडन के लिए बंद रहता है। 2027 में यह मौसम जनवरी के मध्य से जुलाई के आरंभ तक है, और इसके भीतर लग्न को भी इस संस्कार के अपने नियमों पर खरा उतरना होता है — जिससे बहुत कम दिन बचते हैं।
यह लेख नियम उनके स्रोतों के साथ बताता है — मौसम, तिथि, वार और नक्षत्र, लग्न, समय और बच्चे का वर्ष — दिखाता है कि 2027 में ये कैसे पड़ते हैं, और वे बातें गिनाता है जो कोई सार्वजनिक सूची आपके बच्चे के लिए नहीं जाँच सकती।
साल के पेज के लिए दिन बहुत कम हैं: नई दिल्ली के लिए 2027 में प्रचलित मत में 3 दिन (जून में 3) और कड़े मत में 1 (जून में 1) बचते हैं, इसलिए मुंडन मुहूर्त 2027 का अलग पेज नहीं है; मुफ़्त मुहूर्त खोजक आपके अपने शहर के मुंडन के दिन दोनों मतों में, उनके समय के साथ, देता है।
नियम एक नज़र में
- मौसम: उत्तरायण, यानी सूर्य मकर से मिथुन तक, मार्च–अप्रैल के खरमास के बिना, और शुक्र या गुरु के अस्त में कभी नहीं। सूर्य 14 जनवरी 2027 की रात 21:10 बजे (IST) मकर में आते हैं, इसलिए नवंबर-दिसंबर 2026 में मुंडन की कोई तारीख़ नहीं है।
- दिन: द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी या त्रयोदशी; सोमवार, बुधवार, गुरुवार या शुक्रवार; और मृदु, चर या क्षिप्र नक्षत्र।
- लग्न: शुभ ग्रह की राशि, आठवाँ भाव शुक्र के सिवा ख़ाली, और केंद्र में सूर्य, मंगल या शनि नहीं।
- समय: केवल दिन में, रात में कभी नहीं; कड़ा मत पूर्वाह्न ही रखता है।
- बच्चे का वर्ष: वही जो आपका परिवार मानता है — मुहूर्त चिंतामणि में तीसरा या कोई विषम वर्ष।
दोनों मत केवल वे समय रखते हैं जिनका लग्न मुंडन के लग्न-नियमों पर खरा है — किसी की जन्म कुंडली देखे बिना (नीचे देखें)। नई दिल्ली के लिए इससे प्रचलित मत में 3 दिन बचते हैं — बुधवार 2 जून, सोमवार 7 जून और सोमवार 14 जून 2027 — और कड़े मत में 1, यानी 2 जून। समय नई दिल्ली के हैं, IST में, Swiss Ephemeris और लाहिड़ी अयनांश से निकाले गए; दूसरे शहरों में कुछ मिनट का, और कभी-कभी एक दिन का, अंतर होता है।
बच्चे का कौन-सा वर्ष
ग्रंथ वर्ष का फ़ैसला परिवार पर छोड़ते हैं। मुहूर्त चिंतामणि का संस्कार प्रकरण तीसरा वर्ष या कोई विषम वर्ष बताता है — "अपने कुल की रीति से" — और मनुस्मृति पहला या तीसरा वर्ष। बहुत-से परिवार पहला, तीसरा या पाँचवाँ वर्ष मानते हैं। कुछ छपे पंचांग यह भी लिखते हैं कि बेटी का मुंडन सम वर्ष में होता है; यह नियम हमें मुहूर्त चिंतामणि में नहीं मिला — आपके परिवार में माना जाता हो तो मानिए।
सार्वजनिक सूची बच्चे की उम्र नहीं जानती, इसलिए उसकी हर तारीख़ किसी भी बच्चे के लिए है: अपने परिवार के वर्ष में पड़ने वाली तारीख़ चुनें। यह साइट बच्चे के वर्ष जन्म की तारीख़ से गिनती है — पहला वर्ष जन्म की तारीख़ से पहले जन्मदिन के एक दिन पहले तक चलता है।
मौसम: उत्तरायण, खरमास को छोड़कर
मुहूर्त चिंतामणि मुंडन उत्तरायण में करने को कहता है — जब सूर्य मकर, कुंभ, मीन, मेष, वृष और मिथुन से गुज़रते हैं — और छपे पंचांग भी यही लगाते हैं। वे मीन के सूर्य वाला महीना, यानी मार्च–अप्रैल का खरमास, भी छोड़ते हैं। इसलिए नई दिल्ली में 2027 का मौसम ऐसे खुलता और बंद होता है (IST):
| अवधि | मुंडन के लिए |
|---|---|
| 14 जनवरी 2027, 21:10 तक | दोनों मतों में बंद: दक्षिणायन |
| 14 जनवरी 21:10 – 15 मार्च 07:00 | खुला: सूर्य मकर और कुंभ में |
| 15 मार्च 07:00 – 14 अप्रैल 15:28 | दोनों मतों में बंद: खरमास, सूर्य मीन में |
| 14 अप्रैल 15:28 – 6 जुलाई 20:42 | खुला: सूर्य मेष, वृष और मिथुन में |
| 6 जुलाई 20:42 – 17 सितंबर 22:48 | दोनों मतों में बंद: शुक्र अस्त |
| 17 जुलाई 2027, 05:48 से | दोनों मतों में बंद: दक्षिणायन, जनवरी 2028 तक |
खुली अवधियों के भीतर कड़ा मत और भी दिन बंद करता है:
- सिंहस्थ गुरु। गुरु 25 जनवरी 2027 (01:31 IST) तक और फिर 26 जून 2027 (05:18 IST) से मघा या पूर्वाफाल्गुनी के पहले चरण में हैं। मुहूर्त चिंतामणि मुंडन को उन कामों में गिनता है जो सिंह के गुरु में नहीं किए जाते; कई पंचांग यह नियम नहीं लगाते। सिंहस्थ गुरु वाला लेख नियम और उसके क्षेत्र समझाता है।
- चैत्र का चांद्र मास, 7 अप्रैल से 6 मई 2027: मुहूर्त चिंतामणि इसे मुंडन के लिए छोड़ता है।
- शुक्र के अस्त से पहले के "वृद्ध" दिन, 29 जून से 6 जुलाई 2027: धर्मसिंधु के मध्यम मत के सात दिन।
दो तरह के दिन दोनों मतों में बंद हैं। मुहूर्त चिंतामणि के संस्कार प्रकरण में उद्धृत गर्ग संक्रांति (सूर्य के राशि बदलने) और ग्रहण के दिन कोई शुभ काम नहीं करने देते, "समय आ जाने पर भी"। प्रचलित मत संक्रांति का पुण्य दिन वैसे ही छोड़ता है जैसे छपे पंचांग गिनते हैं, और कड़ा मत रात में होने वाली संक्रांति का दिन भी। 2027 में 6 फ़रवरी का सूर्य ग्रहण वह दिन बंद करता है।
तिथि, वार और नक्षत्र
- तिथि: किसी भी पक्ष की द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी या त्रयोदशी — मुहूर्त चिंतामणि के संस्कार प्रकरण में उद्धृत वसिष्ठ की सूची; बी.वी. रमन की मुहूर्त भी यही देती है।
- वार: सोमवार, बुधवार, गुरुवार या शुक्रवार (मुहूर्त चिंतामणि)। कड़ा मत सोमवार केवल शुक्ल पक्ष में रखता है, जैसा वहाँ उद्धृत पराशर कहते हैं; 2027 के दोनों सोमवार, 7 और 14 जून, शुक्ल पक्ष में ही पड़ते हैं।
- नक्षत्र: पुनर्वसु, मृगशिरा, धनिष्ठा, श्रवण, रेवती, पुष्य, चित्रा, अश्विनी या हस्त सबसे अच्छे, और स्वाती, शतभिषा या ज्येष्ठा भी — यानी मृदु, चर और क्षिप्र नक्षत्र, ज्येष्ठा के साथ और अनुराधा के बिना, जैसा मुहूर्त चिंतामणि देता है; रमन पहले नौ को श्रेष्ठ गिनते हैं।
- क्षय तिथि कभी नहीं, यानी वह तिथि जो यहाँ किसी सूर्योदय पर न हो: मुहूर्त चिंतामणि इसे कर्णवेध के लिए मना करता है, और मिलाए गए दिनों में आज के एक पंचांग ने भी इसमें कोई संस्कार दिन नहीं छापा।
- नक्षत्र का वर्ज्य काल कभी नहीं — उसकी त्याज्य घटियाँ, यानी ग्रंथ हर नक्षत्र के लिए जितनी घटी बताता है उसके बाद की चार घटी, नक्षत्र की अपनी अवधि के अनुपात में (मुहूर्त चिंतामणि, विवाह प्रकरण: हर शुभ कार्य में वर्जित; उसकी टीका में उद्धृत ज्योतिःसागर इसे मुंडन जैसे संस्कारों में विघ्नकारी बताता है)।
- पंचांग की बाक़ी बातें: भद्रा (विष्टि करण) नहीं, व्यतिपात या वैधृति योग नहीं, गंडांत नहीं, और हर समय में से राहु काल, यमगंड और गुलिक काटे जाते हैं — इस साइट की हर सूची के नियम।