2027 में नई दिल्ली के लिए नामकरण मुहूर्त के 19 दिन हैं। यह प्रचलित मत है: नामकरण के वे नियम जो छपे पंचांग बताते हैं (नक्षत्र, तिथि, वार और लग्न)। ग्रंथों के कड़े मत में एक भी दिन नहीं है। दोनों मत केवल वे समय रखते हैं जिनका लग्न इस संस्कार के नियमों पर खरा है — किसी की जन्म कुंडली देखे बिना। कड़ा मत इनमें से 19 दिन छोड़ता है: । सबसे ज़्यादा दिन मई (3), जुलाई (3) और सितंबर (3) में हैं; जनवरी, मार्च और दिसंबर में कोई दिन नहीं। जन्म के 11वें या 12वें दिन मुहूर्त की ज़रूरत नहीं; ये दिन बाद में होने वाले नामकरण के लिए हैं।
प्रचलित मत
19 दिन (18 फ़रवरी – 25 नवंबर)
कड़ा मत
कोई नहीं
सबसे ज़्यादा दिन
मई (3), जुलाई (3) और सितंबर (3)
कोई दिन नहीं
जनवरी, मार्च और दिसंबर
मौसम
कोई भी महीना (कड़ा मत: केवल उत्तरायण)
बच्चे की उम्र
11वें या 12वें दिन के बाद (उस दिन मुहूर्त ज़रूरी नहीं)
समय
IST, दिन का पहला भाग
नई दिल्ली (28.61° उ., 77.21° पू.) के लिए IST में, Swiss Ephemeris और लाहिड़ी अयनांश से गणना — किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का फ़र्क़ होता है। प्रचलित मत को एक छपे पंचांग के नामकरण वाले दिनों से मिलाया गया है: नई दिल्ली, मुंबई व कोलकाता के लिए 14 जनवरी 2027 से पखवाड़े भर, और उन्हीं शहरों के लिए 16 से 22 नवंबर 2026 तक और फ़रवरी से अक्टूबर 2027 के 11 चुने हुए दिन (नीचे देखें)।
2027 की सभी 19 तारीख़ें एक नज़र में
प्रचलित मत की तारीख़ें महीनेवार, और कड़ा मत उनमें से क्या रखता है। हर तारीख़ का समय नीचे के कार्डों में है।
जनवरी: किसी भी मत में कोई दिन नहीं
फ़रवरी: 18 और 22 (2 दिन); कड़ा मत इनमें से कोई नहीं रखता
मार्च: किसी भी मत में कोई दिन नहीं
अप्रैल: 8 और 21 (2 दिन); कड़ा मत इनमें से कोई नहीं रखता
मई: 12, 17 और 21 (3 दिन); कड़ा मत इनमें से कोई नहीं रखता
जून: 2 (1 दिन); कड़ा मत इसे छोड़ता है
जुलाई: 5, 19 और 21 (3 दिन); कड़ा मत इनमें से कोई नहीं रखता
अगस्त: 6 और 11 (2 दिन); कड़ा मत इनमें से कोई नहीं रखता
सितंबर: 2, 3 और 13 (3 दिन); कड़ा मत इनमें से कोई नहीं रखता
अक्टूबर: 1 और 4 (2 दिन); कड़ा मत इनमें से कोई नहीं रखता
नवंबर: 25 (1 दिन); कड़ा मत इसे छोड़ता है
दिसंबर: किसी भी मत में कोई दिन नहीं
प्रचलित मत 2027 में 12 दिनों को "बहुत अच्छा" मानता है — साथ में सबसे अच्छे समय का नक्षत्र: गुरुवार 18 फ़रवरी (पुनर्वसु); गुरुवार 8 अप्रैल (अश्विनी); बुधवार 12 मई (पुष्य); सोमवार 17 मई (हस्त); सोमवार 5 जुलाई (पुनर्वसु और पुष्य); शुक्रवार 6 अगस्त (उत्तराफाल्गुनी); बुधवार 11 अगस्त (अनुराधा); गुरुवार 2 सितंबर (उत्तराफाल्गुनी); शुक्रवार 3 सितंबर (हस्त); सोमवार 13 सितंबर (धनिष्ठा); शुक्रवार 1 अक्टूबर (चित्रा); सोमवार 4 अक्टूबर (अनुराधा)। बच्चे के अपने नक्षत्र इनमें से किसी दिन को कमज़ोर बना सकते हैं (नीचे देखें)।
शनिवार या रविवार को 2027 में कोई तारीख़ नहीं पड़ती।
वार के अनुसार: सोमवार को 6, बुधवार को 5, गुरुवार को 4 और शुक्रवार को 4; पक्ष के अनुसार, शुक्ल पक्ष में 12 और कृष्ण पक्ष में 7 (पहले समय की तिथि से)।
दो मत, दो सूचियाँ
छपे पंचांग और ग्रंथ हर नियम पर एकमत नहीं, इसलिए यह पेज दो सूचियाँ देता है। प्रचलित मत: नामकरण के वे नियम जो छपे पंचांग बताते हैं (नक्षत्र, तिथि, वार और लग्न)। कड़ा मत उन्हीं समयों से शुरू होकर ये भी लगाता है: नामकरण केवल उत्तरायण में, सूर्य, शनि या मंगल की राशि का लग्न नहीं, लग्न के आठवें भाव में राहु और केतु की भी गिनती और सूर्य के राशि-प्रवेश वाला पूरा दिन। कड़े मत का हर समय प्रचलित मत के किसी समय के भीतर होता है, इसलिए कड़ी सूची उसी सूची का छोटा रूप है, कोई अलग सूची नहीं।
सिंहस्थ गुरु या शुक्र-गुरु अस्त यहाँ नामकरण नहीं रोकते: मुहूर्त चिंतामणि की टीका बाद के नामकरण के लिए अस्त नहीं देखती, और छपे पंचांग इस पर कोई मौसम नहीं लगाते। कड़ा मत बाद का नामकरण उत्तरायण तक रखता है (पीयूषधारा में उद्धृत कश्यप), सूर्य, शनि और मंगल की राशियों का लग्न छोड़ता है और लग्न के आठवें भाव में राहु-केतु को भी गिनता है: वह प्रचलित मत के 19 दिन बंद करता है। नामकरण की गाइड हर नक्षत्र चरण के नाम अक्षर देती है।
कौन-सी सूची मानें, यह परिवार का फ़ैसला है। आपका परिवार ग्रंथों को कड़ाई से मानता है तो कड़ा मत देखें; छपे पंचांग से चलता है तो प्रचलित मत। मुहूर्त की तारीख़ें अलग क्यों होती हैं में दो पंचांगों के अलग होने के बाक़ी कारण हैं।
प्रचलित मत को एक बहुप्रचलित पंचांग के रोज़ वाले नामकरण टूल से दिन-ब-दिन मिलाया गया है: नई दिल्ली, मुंबई व कोलकाता के लिए 14 जनवरी 2027 से पखवाड़े भर, और उन्हीं शहरों के लिए 16 से 22 नवंबर 2026 तक और फ़रवरी से अक्टूबर 2027 के 11 चुने हुए दिन। वह पंचांग संस्कारों की कोई सालाना सूची नहीं छापता, इसलिए यह 86 पेजों का एक नमूना है। उसने वहाँ चार तारीख़ों पर 11 दिन दिए, और प्रचलित मत ये सभी 11 रखता है और ऐसा कोई दिन नहीं जोड़ता जो उसने न दिया हो। जहाँ समय अलग है, वहाँ यहाँ कोई नियम ज़्यादा कड़ाई से लगा है: राहु काल, यमगंड और गुलिक, जिन्हें यह साइट हटाती है और वह पंचांग अपने कार्ड पर बताकर भी रखता है; और 1 अक्टूबर 2027 को चित्रा के वर्ज्य काल का पहला भाग, जिसे मुहूर्त चिंतामणि उस पंचांग से थोड़ा पहले शुरू करता है।
नामकरण मुहूर्त की तारीख़ें 2027: महीनेवार
हर तारीख़ के साथ नई दिल्ली के लिए मुहूर्त का समय (IST), उस समय के नक्षत्र और तिथि, और एक श्रेणी दी है। जिस दिन कड़ा मत समय छोटा करता है या दिन बंद करता है, उस कार्ड पर यह लिखा है; जहाँ कुछ नहीं लिखा, वहाँ दोनों मत एक हैं। एक बार में एक सूची देखने के लिए मत चुनें।
सूची का हर दिन नियमों के अनुसार शुद्ध है। "बहुत अच्छा", "अच्छा" और "सामान्य" शास्त्रीय बातों (जैसे नक्षत्र, वार, शुक्ल पक्ष) से बना मोटा क्रम है — कोई संभावना या गारंटी नहीं।
जनवरी 2027 0 दिन
प्रचलित मत: इस महीने कोई मुहूर्त नहीं — मुख्य कारण: अनुपयुक्त नक्षत्र (14 दिन), वर्जित वार (14 दिन), रिक्ता तिथि (9 दिन)।
कड़ा मत: इसमें भी कोई नहीं।
फ़रवरी 2027 2 दिन
कड़ा मत: इस महीने कोई मुहूर्त नहीं — प्रचलित मत के 2 दिन इसके नियमों से बंद हैं: नियमों पर खरा लग्न नहीं (2 दिन)।
गुरुवार, 18 फ़रवरी
बहुत अच्छा
13:12–13:42
नक्षत्र: पुनर्वसु तिथि: शुक्ल द्वादशी
कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं
मिथुन लग्न, उसके आठवें भाव में राहु — कड़ा मत नामकरण के लिए आठवें भाव में राहु-केतु को भी गिनता है मुहूर्त चिंतामणि, संस्कार प्रकरण
सोमवार, 22 फ़रवरी
अच्छा
12:56–13:43
नक्षत्र: उत्तराफाल्गुनी तिथि: कृष्ण द्वितीया
कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं
मिथुन लग्न, उसके आठवें भाव में राहु — कड़ा मत नामकरण के लिए आठवें भाव में राहु-केतु को भी गिनता है मुहूर्त चिंतामणि, संस्कार प्रकरण
मार्च 2027 0 दिन
प्रचलित मत: इस महीने कोई मुहूर्त नहीं — मुख्य कारण: अनुपयुक्त नक्षत्र (18 दिन), वर्जित वार (13 दिन), रिक्ता तिथि (11 दिन)।
कड़ा मत: इसमें भी कोई नहीं।
अप्रैल 2027 2 दिन
कड़ा मत: इस महीने कोई मुहूर्त नहीं — प्रचलित मत के 2 दिन इसके नियमों से बंद हैं: नियमों पर खरा लग्न नहीं (2 दिन)।
गुरुवार, 8 अप्रैल
बहुत अच्छा
10:49–12:09
नक्षत्र: अश्विनी तिथि: शुक्ल द्वितीया
कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं
मिथुन लग्न, उसके आठवें भाव में राहु — कड़ा मत नामकरण के लिए आठवें भाव में राहु-केतु को भी गिनता है मुहूर्त चिंतामणि, संस्कार प्रकरण
बुधवार, 21 अप्रैल
अच्छा
09:08–10:08
नक्षत्र: स्वाती तिथि: कृष्ण प्रतिपदा
कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं
मिथुन लग्न, उसके आठवें भाव में राहु — कड़ा मत नामकरण के लिए आठवें भाव में राहु-केतु को भी गिनता है मुहूर्त चिंतामणि, संस्कार प्रकरण
मई 2027 3 दिन
कड़ा मत: इस महीने कोई मुहूर्त नहीं — प्रचलित मत के 3 दिन इसके नियमों से बंद हैं: नियमों पर खरा लग्न नहीं (3 दिन)।
बुधवार, 12 मई
बहुत अच्छा
08:56–09:55
नक्षत्र: पुष्य तिथि: शुक्ल सप्तमी
कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं
मिथुन लग्न, उसके आठवें भाव में राहु — कड़ा मत नामकरण के लिए आठवें भाव में राहु-केतु को भी गिनता है मुहूर्त चिंतामणि, संस्कार प्रकरण
सोमवार, 17 मई
बहुत अच्छा
08:54–09:36
नक्षत्र: हस्त तिथि: शुक्ल द्वादशी
कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं
मिथुन लग्न, उसके आठवें भाव में राहु — कड़ा मत नामकरण के लिए आठवें भाव में राहु-केतु को भी गिनता है मुहूर्त चिंतामणि, संस्कार प्रकरण
शुक्रवार, 21 मई
अच्छा
08:53–09:20
नक्षत्र: अनुराधा तिथि: कृष्ण प्रतिपदा
कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं
मिथुन लग्न, उसके आठवें भाव में राहु — कड़ा मत नामकरण के लिए आठवें भाव में राहु-केतु को भी गिनता है मुहूर्त चिंतामणि, संस्कार प्रकरण
जून 2027 1 दिन
कड़ा मत: इस महीने कोई मुहूर्त नहीं — प्रचलित मत का 1 दिन इसके नियमों से बंद है: नियमों पर खरा लग्न नहीं।
बुधवार, 2 जून
अच्छा
06:23–07:07
नक्षत्र: अश्विनी तिथि: कृष्ण द्वादशी
कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं
मिथुन लग्न, उसके आठवें भाव में राहु — कड़ा मत नामकरण के लिए आठवें भाव में राहु-केतु को भी गिनता है मुहूर्त चिंतामणि, संस्कार प्रकरण
जुलाई 2027 3 दिन
कड़ा मत: इस महीने कोई मुहूर्त नहीं — प्रचलित मत के 3 दिन इसके नियमों से बंद हैं: दक्षिणायन (2 दिन), नियमों पर खरा लग्न नहीं (3 दिन)।
सोमवार, 5 जुलाई
बहुत अच्छा
08:57–10:41
नक्षत्र: पुनर्वसु, पुष्य तिथि: शुक्ल द्वितीया
कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं
सिंह लग्न — कड़ा मत नामकरण के लिए सूर्य, शनि और मंगल की राशियों का लग्न छोड़ता है जगन्मोहन में गुरु (मुहूर्त चिंतामणि के संस्कार प्रकरण की पीयूषधारा टीका में उद्धृत)
सोमवार, 19 जुलाई
अच्छा
09:02–10:06
नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा तिथि: कृष्ण प्रतिपदा
कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं
सिंह लग्न — कड़ा मत नामकरण के लिए सूर्य, शनि और मंगल की राशियों का लग्न छोड़ता है जगन्मोहन में गुरु (मुहूर्त चिंतामणि के संस्कार प्रकरण की पीयूषधारा टीका में उद्धृत)
सूर्य कर्क में — दक्षिणायन; कड़ा मत नामकरण के लिए उत्तरायण ही लेता है कश्यप (मुहूर्त चिंतामणि के संस्कार प्रकरण की पीयूषधारा टीका में उद्धृत)
बुधवार, 21 जुलाई
अच्छा
09:02–09:58
नक्षत्र: धनिष्ठा तिथि: कृष्ण तृतीया
कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं
सिंह लग्न — कड़ा मत नामकरण के लिए सूर्य, शनि और मंगल की राशियों का लग्न छोड़ता है जगन्मोहन में गुरु (मुहूर्त चिंतामणि के संस्कार प्रकरण की पीयूषधारा टीका में उद्धृत)
सूर्य कर्क में — दक्षिणायन; कड़ा मत नामकरण के लिए उत्तरायण ही लेता है कश्यप (मुहूर्त चिंतामणि के संस्कार प्रकरण की पीयूषधारा टीका में उद्धृत)
अगस्त 2027 2 दिन
कड़ा मत: इस महीने कोई मुहूर्त नहीं — प्रचलित मत के 2 दिन इसके नियमों से बंद हैं: दक्षिणायन (2 दिन), नियमों पर खरा लग्न नहीं (2 दिन)।
शुक्रवार, 6 अगस्त
बहुत अच्छा
06:42–07:25
नक्षत्र: उत्तराफाल्गुनी तिथि: शुक्ल पंचमी
कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं
सिंह लग्न — कड़ा मत नामकरण के लिए सूर्य, शनि और मंगल की राशियों का लग्न छोड़ता है जगन्मोहन में गुरु (मुहूर्त चिंतामणि के संस्कार प्रकरण की पीयूषधारा टीका में उद्धृत)
सूर्य कर्क में — दक्षिणायन; कड़ा मत नामकरण के लिए उत्तरायण ही लेता है कश्यप (मुहूर्त चिंतामणि के संस्कार प्रकरण की पीयूषधारा टीका में उद्धृत)
बुधवार, 11 अगस्त
बहुत अच्छा
06:23–07:27
नक्षत्र: अनुराधा तिथि: शुक्ल दशमी
कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं
सिंह लग्न — कड़ा मत नामकरण के लिए सूर्य, शनि और मंगल की राशियों का लग्न छोड़ता है जगन्मोहन में गुरु (मुहूर्त चिंतामणि के संस्कार प्रकरण की पीयूषधारा टीका में उद्धृत)
सूर्य कर्क में — दक्षिणायन; कड़ा मत नामकरण के लिए उत्तरायण ही लेता है कश्यप (मुहूर्त चिंतामणि के संस्कार प्रकरण की पीयूषधारा टीका में उद्धृत)
सितंबर 2027 3 दिन
कड़ा मत: इस महीने कोई मुहूर्त नहीं — प्रचलित मत के 3 दिन इसके नियमों से बंद हैं: दक्षिणायन (3 दिन), नियमों पर खरा लग्न नहीं (3 दिन)।
गुरुवार, 2 सितंबर
बहुत अच्छा
11:49–13:37
नक्षत्र: उत्तराफाल्गुनी तिथि: शुक्ल द्वितीया
कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं
सूर्य सिंह में — दक्षिणायन; कड़ा मत नामकरण के लिए उत्तरायण ही लेता है कश्यप (मुहूर्त चिंतामणि के संस्कार प्रकरण की पीयूषधारा टीका में उद्धृत)
वृश्चिक लग्न — कड़ा मत नामकरण के लिए सूर्य, शनि और मंगल की राशियों का लग्न छोड़ता है जगन्मोहन में गुरु (मुहूर्त चिंतामणि के संस्कार प्रकरण की पीयूषधारा टीका में उद्धृत)
शुक्रवार, 3 सितंबर
बहुत अच्छा
12:21–13:36
नक्षत्र: हस्त तिथि: शुक्ल तृतीया
कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं
सूर्य सिंह में — दक्षिणायन; कड़ा मत नामकरण के लिए उत्तरायण ही लेता है कश्यप (मुहूर्त चिंतामणि के संस्कार प्रकरण की पीयूषधारा टीका में उद्धृत)
वृश्चिक लग्न — कड़ा मत नामकरण के लिए सूर्य, शनि और मंगल की राशियों का लग्न छोड़ता है जगन्मोहन में गुरु (मुहूर्त चिंतामणि के संस्कार प्रकरण की पीयूषधारा टीका में उद्धृत)
सोमवार, 13 सितंबर
बहुत अच्छा
12:22–13:20
नक्षत्र: धनिष्ठा तिथि: शुक्ल त्रयोदशी
कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं
सूर्य सिंह में — दक्षिणायन; कड़ा मत नामकरण के लिए उत्तरायण ही लेता है कश्यप (मुहूर्त चिंतामणि के संस्कार प्रकरण की पीयूषधारा टीका में उद्धृत)
वृश्चिक लग्न — कड़ा मत नामकरण के लिए सूर्य, शनि और मंगल की राशियों का लग्न छोड़ता है जगन्मोहन में गुरु (मुहूर्त चिंतामणि के संस्कार प्रकरण की पीयूषधारा टीका में उद्धृत)
अक्टूबर 2027 2 दिन
कड़ा मत: इस महीने कोई मुहूर्त नहीं — प्रचलित मत के 2 दिन इसके नियमों से बंद हैं: दक्षिणायन (2 दिन), नियमों पर खरा लग्न नहीं (2 दिन)।
शुक्रवार, 1 अक्टूबर
बहुत अच्छा
12:14–13:22
नक्षत्र: चित्रा तिथि: शुक्ल द्वितीया
कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं
धनु लग्न, उसके आठवें भाव में केतु — कड़ा मत नामकरण के लिए आठवें भाव में राहु-केतु को भी गिनता है मुहूर्त चिंतामणि, संस्कार प्रकरण
सूर्य कन्या में — दक्षिणायन; कड़ा मत नामकरण के लिए उत्तरायण ही लेता है कश्यप (मुहूर्त चिंतामणि के संस्कार प्रकरण की पीयूषधारा टीका में उद्धृत)
सोमवार, 4 अक्टूबर
बहुत अच्छा
09:44–10:41
12:10–13:20
नक्षत्र: अनुराधा तिथि: शुक्ल पंचमी
कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं
सूर्य कन्या में — दक्षिणायन; कड़ा मत नामकरण के लिए उत्तरायण ही लेता है कश्यप (मुहूर्त चिंतामणि के संस्कार प्रकरण की पीयूषधारा टीका में उद्धृत)
धनु लग्न, उसके आठवें भाव में केतु — कड़ा मत नामकरण के लिए आठवें भाव में राहु-केतु को भी गिनता है मुहूर्त चिंतामणि, संस्कार प्रकरण
वृश्चिक लग्न — कड़ा मत नामकरण के लिए सूर्य, शनि और मंगल की राशियों का लग्न छोड़ता है जगन्मोहन में गुरु (मुहूर्त चिंतामणि के संस्कार प्रकरण की पीयूषधारा टीका में उद्धृत)
नवंबर 2027 1 दिन
कड़ा मत: इस महीने कोई मुहूर्त नहीं — प्रचलित मत का 1 दिन इसके नियमों से बंद है: दक्षिणायन, नियमों पर खरा लग्न नहीं।
गुरुवार, 25 नवंबर
अच्छा
12:24–13:11
नक्षत्र: चित्रा तिथि: कृष्ण त्रयोदशी
कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं
कुंभ लग्न — कड़ा मत नामकरण के लिए सूर्य, शनि और मंगल की राशियों का लग्न छोड़ता है जगन्मोहन में गुरु (मुहूर्त चिंतामणि के संस्कार प्रकरण की पीयूषधारा टीका में उद्धृत)
सूर्य वृश्चिक में — दक्षिणायन; कड़ा मत नामकरण के लिए उत्तरायण ही लेता है कश्यप (मुहूर्त चिंतामणि के संस्कार प्रकरण की पीयूषधारा टीका में उद्धृत)
दिसंबर 2027 0 दिन
प्रचलित मत: इस महीने कोई मुहूर्त नहीं — मुख्य कारण: अनुपयुक्त नक्षत्र (15 दिन), वर्जित वार (12 दिन), रिक्ता तिथि (9 दिन)।
कड़ा मत: इसमें भी कोई नहीं।
2027 में नामकरण के लिए बंद अवधियाँ
ये अवधियाँ नई दिल्ली में नामकरण रोकती हैं; इनका समय पंचांग गणना से मिनट तक निकाला गया है (IST)। "दोनों मत" का अर्थ है कि इस पेज की हर सूची इन्हें छोड़ती है; "कड़ा मत" का अर्थ है कि केवल कड़ी सूची।
दक्षिणायन (सूर्य कर्क से धनु तक) कड़ा मत
14 जनवरी 2027, 21:10 तक
सूर्य का दक्षिणी मार्ग: छपे पंचांग इसमें भी बाद का नामकरण देते हैं, इसलिए प्रचलित मत इसे रखता है; कड़ा मत नामकरण केवल उत्तरायण में रखता है (मुहूर्त चिंतामणि की पीयूषधारा टीका में उद्धृत कश्यप: जिस संस्कार का समय बीत गया, वह उत्तरायण में किया जाता है)।
दक्षिणायन (सूर्य कर्क से धनु तक) कड़ा मत
17 जुलाई 2027, 05:48 से 15 जनवरी 2028, 03:24 तक
सूर्य का दक्षिणी मार्ग: छपे पंचांग इसमें भी बाद का नामकरण देते हैं, इसलिए प्रचलित मत इसे रखता है; कड़ा मत नामकरण केवल उत्तरायण में रखता है (मुहूर्त चिंतामणि की पीयूषधारा टीका में उद्धृत कश्यप: जिस संस्कार का समय बीत गया, वह उत्तरायण में किया जाता है)।
संक्रांतियाँ: सूर्य का हर राशि में प्रवेश
मुहूर्त चिंतामणि के संस्कार प्रकरण में उद्धृत गर्ग संक्रांति के दिन कोई शुभ काम नहीं करने देते। प्रचलित मत उसका पुण्य दिन वैसे छोड़ता है जैसे छपे पंचांग गिनते हैं — सूर्य के राशि-प्रवेश का दिन, या सूर्यास्त के बाद प्रवेश हो तो अगला दिन; कड़ा मत प्रवेश वाला दिन भी छोड़ता है। 2027 में नई दिल्ली के लिए सूर्य के राशि-प्रवेश, IST में:
मकर: सूर्य का प्रवेश 14 जनवरी 2027, 21:10
कुंभ: सूर्य का प्रवेश 13 फ़रवरी 2027, 10:09
मीन: सूर्य का प्रवेश 15 मार्च 2027, 07:00
मेष: सूर्य का प्रवेश 14 अप्रैल 2027, 15:28
वृष: सूर्य का प्रवेश 15 मई 2027, 12:19
मिथुन: सूर्य का प्रवेश 15 जून 2027, 18:55
कर्क: सूर्य का प्रवेश 17 जुलाई 2027, 05:48
सिंह: सूर्य का प्रवेश 17 अगस्त 2027, 14:13
कन्या: सूर्य का प्रवेश 17 सितंबर 2027, 14:10
तुला: सूर्य का प्रवेश 18 अक्टूबर 2027, 02:08
वृश्चिक: सूर्य का प्रवेश 17 नवंबर 2027, 01:58
धनु: सूर्य का प्रवेश 16 दिसंबर 2027, 16:38
नई दिल्ली में कोई भी सूची इन अवधियों के कारण नामकरण नहीं रोकती। छपे पंचांग इन अवधियों में नामकरण नहीं रोकते, और टीका बाद के नामकरण के लिए अस्त नहीं देखती; होलाष्टक को मुहूर्त चिंतामणि केवल ब्यास, रावी और सतलुज के क्षेत्र और पुष्कर में मानता है। अगर आपका परिवार इनमें से कोई मानता है, तो वे तारीख़ें छोड़ दें (IST):
सिंहस्थ गुरु (गुरु मघा या पूर्वाफाल्गुनी के पहले चरण में): 31 अक्टूबर 2026, 12:02 – 25 जनवरी 2027, 01:31; 26 जून 2027, 05:18 – 15 सितंबर 2027, 09:56 — इस सूची में इसके 8 दिन हैं: 5, 19 और 21 जुलाई; 6 और 11 अगस्त; 2, 3 और 13 सितंबर
सिंहस्थ गुरु (गुरु सिंह के बाक़ी भाग में): 15 सितंबर 2027, 09:56 – 26 नवंबर 2027, 18:45 — इस सूची में इसके 3 दिन हैं: 1 और 4 अक्टूबर; 25 नवंबर
शुक्र अस्त: 6 जुलाई 2027, 20:42 – 17 सितंबर 2027, 22:48 — इस सूची में इसके 7 दिन हैं: 19 और 21 जुलाई; 6 और 11 अगस्त; 2, 3 और 13 सितंबर
गुरु अस्त: 16 अगस्त 2027, 19:42 – 15 सितंबर 2027, 03:12 — इस सूची में इसके 3 दिन हैं: 2, 3 और 13 सितंबर
खरमास: 16 दिसंबर 2026, 10:25 – 14 जनवरी 2027, 21:10; 15 मार्च 2027, 07:00 – 14 अप्रैल 2027, 15:28; 16 दिसंबर 2027, 16:38 – 15 जनवरी 2028, 03:24 — इस सूची में इसके 1 दिन है: 8 अप्रैल
चातुर्मास: 13 जुलाई 2027, 12:09 – 10 नवंबर 2027, 09:11 — इस सूची में इसके 9 दिन हैं: 19 और 21 जुलाई; 6 और 11 अगस्त; 2, 3 और 13 सितंबर; 1 और 4 अक्टूबर
होलाष्टक: 15 मार्च 2027, 10:51 – 22 मार्च 2027, 16:13
ये तारीख़ें कैसे चुनी गईं
जन्म के 11वें या 12वें दिन — या जिस दिन आपके परिवार का सूतक ख़त्म होता है — नामकरण के लिए मुहूर्त की ज़रूरत नहीं (मुहूर्त चिंतामणि, संस्कार प्रकरण); ये सूचियाँ बाद में होने वाले नामकरण के लिए हैं।
चंद्रमा का नक्षत्र: स्थिर, मृदु, क्षिप्र और चर नक्षत्र — अश्विनी, रोहिणी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, उत्तराफाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तराभाद्रपदा और रेवती (मुहूर्त चिंतामणि, संस्कार प्रकरण; छपे पंचांग भी यही लेते हैं)।
तिथि: केवल दोनों पक्षों की प्रतिपदा, द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी या त्रयोदशी (छपे पंचांग ये नौ तिथियाँ लेते हैं; मुहूर्त चिंतामणि केवल पर्व और रिक्ता तिथि मना करता है, यानी वह षष्ठी भी लेता, जिसे यह सूची छोड़ती है)।
वार: केवल सोमवार, बुधवार, गुरुवार या शुक्रवार — रविवार, मंगलवार या शनिवार कभी नहीं (मुहूर्त चिंतामणि, संस्कार प्रकरण; छपे पंचांग भी यही लगाते हैं)।
समय: पूर्वाह्न सबसे अच्छा, मध्याह्न मध्यम; दिन के तीन-पाँचवें भाग के बाद का समय — अपराह्न — और रात छोड़े गए (छपे पंचांग: अपराह्न से पहले; मुहूर्त चिंतामणि के संस्कार प्रकरण में उद्धृत बृहस्पति: दोपहर बाद कभी नहीं)। बाद के नामकरण में शुक्र और गुरु का अस्त नहीं देखा जाता (टीका), और प्रचलित मत में कोई मौसम इसे नहीं रोकता — वह छपे पंचांगों की तरह साल के दोनों अयनों में बाद का नामकरण देता है; कड़ा मत इसे उत्तरायण तक रखता है (नीचे)।
लग्न, जिसे दोनों मत देखते हैं: केवल वे समय जिनका लग्न चर राशि न हो — मेष, कर्क, तुला या मकर कभी नहीं — आठवाँ भाव ख़ाली हो (मुहूर्त चिंतामणि, संस्कार प्रकरण; छपे पंचांगों की तरह सात ग्रहों से पढ़ा गया, कड़ा मत राहु-केतु को भी गिनता है), लग्न में कोई पाप ग्रह न हो और सूर्य, मंगल या शनि की पूरी दृष्टि उस पर न हो (जैसे छपे पंचांग लगाते हैं)। हर समय ऐसा कम से कम एक घटी का हिस्सा है; जिस दिन ऐसा कोई हिस्सा नहीं, वह दिन बंद है।
क्षय तिथि में कभी नहीं — वह तिथि जो यहाँ किसी सूर्योदय पर न हो (मुहूर्त चिंतामणि, संस्कार प्रकरण: कर्णवेध के लिए वर्जित; मिलाए गए दिनों में आज के एक पंचांग ने भी इसमें कोई संस्कार दिन नहीं छापा)।
दिन के नक्षत्र के वर्ज्य काल में कभी नहीं — उसकी त्याज्य घटियाँ: ग्रंथ हर नक्षत्र के लिए जितनी घटी बताता है, उसके बाद की चार घटी, नक्षत्र की अपनी अवधि के अनुपात में (अश्विनी में 50 के बाद, पुनर्वसु में 30 के बाद, पुष्य और चित्रा में 20 के बाद, मूल में 56 के बाद, इत्यादि — मुहूर्त चिंतामणि, विवाह प्रकरण: हर शुभ कार्य में वर्जित)। मिलाए गए दिनों पर आज के एक पंचांग के संस्कार टूल ने पुनर्वसु और पुष्य में यही समय छिपाया, और अश्विनी और चित्रा में एक घटी बाद से; बलवान चंद्रमा वाला अपवाद, जो टीका उद्धृत करती है, नहीं लगाया गया।
संक्रांति या ग्रहण के दिन कभी नहीं: मुहूर्त चिंतामणि के संस्कार प्रकरण में उद्धृत गर्ग तब कोई शुभ काम नहीं करने देते, "समय आ जाने पर भी"। प्रचलित मत संक्रांति का पुण्य दिन वैसे छोड़ता है जैसे छपे पंचांग गिनते हैं — सूर्य सूर्यास्त के बाद राशि बदले तो अगला दिन; कड़ा मत राशि-प्रवेश वाला दिन भी छोड़ता है।
भद्रा (विष्टि करण) नहीं: इसे पूरा टाला गया है। इसके वास और पुच्छ के बारीक नियम नहीं लगाए गए, इसलिए यह सूची उन पंचांगों से कड़ी है जो उन्हें लगाते हैं।
योग: व्यतिपात या वैधृति कभी नहीं; बाक़ी अशुभ योगों का केवल आरंभ का भाग हटाया गया — विष्कम्भ 5 घटी, अतिगण्ड 6 घटी, शूल 7 घटी, गण्ड 6 घटी, व्याघात 9 घटी, वज्र 9 घटी, परिघ का पहला आधा (एक घटी = 24 मिनट; मुहूर्त चिंतामणि, शुभाशुभ प्रकरण)।
गंडांत: आश्लेषा, ज्येष्ठा और रेवती का अंतिम चरण और मघा, मूल और अश्विनी का पहला चरण हटाया गया (कालप्रकाशिका; मुहूर्त चिंतामणि इसे अपने विवाह प्रकरण में कहता है)।
राहु काल, यमगंड और गुलिक — वार के हिसाब से दिन के आठवें भाग — मुहूर्त के हर समय से हटाए गए (दक्षिण भारतीय परंपरा, कालप्रकाशिका)। कालप्रकाशिका ख़ुद गुलिक को अशुभ नहीं मानती; कई पंचांगों की तरह ये सूचियाँ उसे फिर भी हटाती हैं, इसलिए यहाँ ये थोड़ी कड़ी हैं।
हर समय में कम से कम एक घटी (24 मिनट) शुद्ध होनी चाहिए, और एक दिन में ज़्यादा से ज़्यादा तीन समय दिखाए गए हैं।
श्रेणी: "बहुत अच्छा", "अच्छा" और "सामान्य" नक्षत्र की श्रेणी, पसंदीदा वार (सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार) और शुक्ल पक्ष से बना मोटा क्रम है — कोई संभावना नहीं।
कड़ा मत क्या जोड़ता है
नामकरण केवल उत्तरायण में — सूर्य मकर, कुंभ, मीन, मेष, वृष या मिथुन में (मुहूर्त चिंतामणि की पीयूषधारा टीका में उद्धृत कश्यप: जिस संस्कार का समय बीत गया, वह उत्तरायण में किया जाता है)।
सूर्य, शनि या मंगल की राशि का लग्न नहीं — मेष, सिंह, वृश्चिक, मकर या कुंभ (मुहूर्त चिंतामणि की पीयूषधारा टीका में उद्धृत जगन्मोहन में गुरु)।
लग्न के आठवें भाव में राहु और केतु की भी गिनती: ग्रंथ आठवाँ भाव ख़ाली चाहते हैं, और कड़ा मत उसे नौ ग्रहों से पढ़ता है, जबकि छपे पंचांग और प्रचलित मत सात ग्रह गिनते हैं।
सूर्य के राशि-प्रवेश वाला दिन भी, उस पुण्य दिन के अलावा जिसे प्रचलित मत छोड़ता है (मुहूर्त चिंतामणि के संस्कार प्रकरण में उद्धृत गर्ग)।
होलाष्टक, फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से पूर्णिमा तक: मुहूर्त चिंतामणि (शुभाशुभ प्रकरण, शीघ्रबोध के हवाले से) इसे केवल ब्यास, रावी और सतलुज के क्षेत्र और पुष्कर में मानता है; नई दिल्ली में नहीं।
जो इन सूचियों में नहीं, वह आपके हाथ में
बच्चे की कुंडली और ठीक पल: दोनों मत केवल वे समय रखते हैं जिनका लग्न ऊपर के नियमों पर खरा है, किसी की जन्म कुंडली देखे बिना। लग्न के जो नियम बच्चे की अपनी कुंडली पढ़ते हैं — बच्चे की जन्म राशि या लग्न से आठवीं राशि का लग्न कभी नहीं — और नवांश, पंडित जी पर छोड़े गए हैं, या व्यक्तिगत मुहूर्त पर, जो बच्चे की कुंडली पढ़ता है।
बच्चा: आपके परिवार की परंपरा वाली उम्र, बच्चे का अपना तारा बल और चंद्र बल, और बच्चे का जन्म मास किसी सार्वजनिक सूची को पता नहीं होते।
बच्चे के जन्म नक्षत्र से नाम का पहला अक्षर (शतपद चक्र) इस पेज पर नहीं है: नाम अक्षरों वाली गाइड देखें।
ग्रहण पृथ्वी पर कहीं भी दिखे, गिना गया है (कड़ा पाठ); वृद्धि तिथि, तिथि गंडांत, दग्ध और विष तिथि-वार योग, चंद्र बल का वेध, तिथि और वार की वे विष घटियाँ जो टीका दैवज्ञ मनोहर से उद्धृत करती है, और वर्ज्य काल का वह अपवाद जो टीका बलवान चंद्रमा के लिए देती है, किसी मत में नहीं लगाए गए।
इस पेज पर बताए नियमों के अलावा परिवार और स्थान की परंपराएँ।
अपने शहर या अपनी तारीख़ों के लिए
नक्षत्र या तिथि हर जगह एक ही पल बदलती है, पर हर जगह का सूर्योदय, सूर्यास्त और राहु काल अपना होता है, इसलिए दूसरे शहर का समय कुछ मिनट आगे-पीछे होता है, और बदलाव के पास वाला दिन छूट या जुड़ सकता है। मुहूर्त खोजक आपके शहर और आपकी तारीख़ों के लिए नामकरण की सूची के दोनों मत निकालता है, एक बार में तीन महीने तक, और उसके नतीजों में नीचे वाली व्यक्तिगत जाँच भी मिलती है। किसी महीने से शुरू करें:
कुंडली से व्यक्तिगत मुहूर्त
सबके लिए बनी सूची बच्चे के अपने नक्षत्र या आपके परिवार की परंपरा वाली उम्र नहीं देख सकती। मुहूर्त चिंतामणि का गोचर प्रकरण दो व्यक्तिगत जाँचें जोड़ता है: तारा बल, यानी जन्म नक्षत्र से गिना गया दिन का नक्षत्र, और चंद्र बल, यानी जन्म राशि से गिनी गई चंद्रमा की राशि। जो दिन आम तौर पर अच्छा है, वह किसी एक व्यक्ति के लिए कमज़ोर हो सकता है।
व्यक्तिगत नामकरण मुहूर्त बच्चे की सहेजी हुई कुंडली पढ़ता है: हर दिन का तारा बल और चंद्र बल, आपके परिवार की परंपरा वाली उम्र, हर समय के भीतर इस काम के लिए ठीक लग्न का समय, जन्म नक्षत्र से नाम के पहले अक्षर, एक मुहूर्त पत्र (पीडीएफ़) और रिमाइंडर। पूरे काम के लिए 101 सिक्के: भुगतान से पहले आप देखते हैं कि बच्चे की कुंडली की जाँच से पहले कितने दिन खुले हैं, और अगर कोई दिन बच्चे की कुंडली के अनुसार शुद्ध न निकले, तो कुछ नहीं कटता। या एक तारीख़ जाँचने के लिए 50 सिक्के — ये उसके जवाब के लिए हैं, तारीख़ शुद्ध निकले या नहीं।
या इस सूची की किसी एक तारीख़ के बारे में AI ज्योतिषी से पूछें: वह आपकी कुंडली में दर्ज स्थान के लिए दिन पढ़ता है और अपने जवाब के पीछे का नियम बताता है।
साइन इन करें, फिर बच्चे की कुंडली चुनें या जोड़ें, और शहर।
किसी तारीख़ को कुंडली से जाँचें
तारीख़ और काम लिखें। अगली स्क्रीन पर साइन इन करें और जन्म विवरण एक बार जोड़ें — आपका सवाल चैट में इंतज़ार करेगा।
नई दिल्ली के लिए प्रचलित मत में 19 दिन और कड़े मत में एक भी दिन नहीं। सबसे ज़्यादा दिन मई (3), जुलाई (3) और सितंबर (3) में हैं। जनवरी, मार्च और दिसंबर में कोई दिन नहीं। इस पेज पर हर तारीख़ का समय IST में दिया है।
क्या 11वें या 12वें दिन के नामकरण के लिए मुहूर्त चाहिए?
नहीं। मुहूर्त चिंतामणि का संस्कार प्रकरण नामकरण के लिए जन्म का 11वाँ या 12वाँ दिन बताता है, और उस दिन मुहूर्त की ज़रूरत नहीं; जिन परिवारों का सूतक किसी और दिन ख़त्म होता है, वे अपना दिन रखते हैं। ये सूचियाँ बाद में होने वाले नामकरण के लिए हैं, जब दिन को अपनी जाँच में शुद्ध होना होता है।
नाम किस अक्षर से शुरू हो?
ग्रंथ पहला अक्षर बच्चे के जन्म नक्षत्र के चरण (पाद) से लेते हैं — शतपद चक्र, जो 27 नक्षत्रों में से हर एक को चार अक्षर देता है। हमारी नाम अक्षरों वाली गाइड सभी 108 अक्षर देवनागरी में देती है, और व्यक्तिगत मुहूर्त कुंडली से आपके बच्चे के अपने चरण के अक्षर बताता है।
क्या खरमास, चातुर्मास या शुक्र अस्त में नामकरण हो सकता है?
हाँ, प्रचलित मत में। छपे पंचांग खरमास, चातुर्मास या होलाष्टक के कारण नामकरण नहीं रोकते, और मुहूर्त चिंतामणि की टीका बाद के नामकरण में शुक्र का अस्त नहीं देखती। केवल संक्रांति या ग्रहण का दिन छोड़ा जाता है (वहाँ उद्धृत गर्ग)। कड़ा मत बाद का नामकरण उत्तरायण तक रखता है (टीका में उद्धृत कश्यप), इसलिए वह दक्षिणायन के महीने छोड़ता है।
क्या नामकरण दोपहर बाद हो सकता है?
ग्रंथ पूर्वाह्न को सबसे अच्छा, मध्याह्न को मध्यम मानते हैं और अपराह्न व रात को छोड़ते हैं (मुहूर्त चिंतामणि में उद्धृत बृहस्पति)। इसलिए इस पेज का हर समय वहीं ख़त्म होता है जहाँ अपराह्न शुरू होता है — दिन के तीन-पाँचवें भाग पर, जैसे छपे पंचांग नामकरण ख़त्म करते हैं।
क्या नामकरण की ये तारीख़ें मेरे शहर के लिए भी यही हैं?
ज़्यादातर, पर मिनट तक नहीं। नक्षत्र या तिथि हर जगह एक ही पल बदलती है, पर सूर्योदय, सूर्यास्त और राहु काल स्थानीय हैं, इसलिए दूसरे शहर का समय कुछ मिनट आगे-पीछे शुरू और ख़त्म होता है, और जहाँ कोई बदलाव समय के किनारे के पास पड़ता है, वहाँ कोई दिन छूट या जुड़ सकता है। मुहूर्त खोजक आपके शहर के लिए दोनों मत निकालता है।