हिंदू त्योहार 2026 — नई दिल्ली की तिथियाँ
18 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक इस कैलेंडर में प्रमुख 19 व्रत-त्योहार हैं: दशहरा — 20 अक्टूबर (मंगलवार); करवा चौथ — 29 अक्टूबर (गुरुवार); दिवाली — 8 नवंबर (रविवार); छठ पूजा — 15 नवंबर (रविवार)।
अक्टूबर 2026 आश्विन · कार्तिक
दुर्गा अष्टमी
सोमवार, 19 अक्टूबर 2026
- निर्णायक तिथि
- आश्विन शुक्ल अष्टमी · 18 अक्टूबर 08:29 – 19 अक्टूबर 10:52
- निर्णय का समय
- सूर्योदय — 06:24
- नियम
- सूर्योदय के समय आश्विन शुक्ल अष्टमी — नवमी-युक्त, सप्तमी-विद्ध नहीं: दो सूर्योदयों पर हो तो पहला, पूरा दिन; सूर्योदय के बाद एक घटी (24 मिनट) से कम रहे, या नवमी किसी सूर्योदय पर न हो, तो पिछला दिन।
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसारइस दिन का पंचांग
स्रोत
निर्णय सिंधु और धर्म सिंधु: महाष्टमी का निर्णय (नवमी-युक्त, सप्तमी-विद्ध नहीं; दो सूर्योदय, अल्प अष्टमी और क्षय नवमी पर धर्म सिंधु)
दशहरा (विजयादशमी)
मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026
- निर्णायक तिथि
- आश्विन शुक्ल दशमी · 20 अक्टूबर 12:51 – 21 अक्टूबर 14:12
- निर्णय का समय
- अपराह्न — 13:14–15:30
- नियम
- आश्विन शुक्ल दशमी जो अपराह्न में हो; दो दिन हो तो पहला दिन।
- 21 अक्टूबर 2026 को भी अपराह्न में यह तिथि है; यह कैलेंडर 20 अक्टूबर 2026 मानता है।
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसारइस दिन का पंचांग
स्रोत
निर्णय सिंधु और धर्म सिंधु: विजयादशमी (अपराह्न) का निर्णय
शरद पूर्णिमा (कोजागरी)
रविवार, 25 अक्टूबर 2026
- निर्णायक तिथि
- आश्विन पूर्णिमा · 25 अक्टूबर 11:57 – 26 अक्टूबर 09:42
- निर्णय का समय
- निशीथ काल — 23:40 – 00:31 (26 अक्टूबर)
- नियम
- आश्विन पूर्णिमा जो निशीथ काल (मध्यरात्रि) में हो — लक्ष्मी की कोजागरी रात।
- सूर्योदय वाली पूर्णिमा (आश्विन पूर्णिमा — व्रत और स्नान) 26 अक्टूबर 2026 को है।
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसारइस दिन का पंचांग
स्रोत
निर्णय सिंधु और धर्म सिंधु: कोजागर (निशीथ-व्यापिनी पूर्णिमा) का निर्णय
करवा चौथ
गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026
- निर्णायक तिथि
- कार्तिक कृष्ण चतुर्थी · 29 अक्टूबर 01:07 – 29 अक्टूबर 22:11 (अमांत पंचांग में आश्विन)
- निर्णय का समय
- चंद्रोदय — 20:17
- नियम
- कृष्ण चतुर्थी (उत्तर भारत में कार्तिक, अमांत आश्विन) जो चंद्रोदय के समय हो।
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसारइस दिन का पंचांग
स्रोत
उत्तर भारतीय पंचांगों की पद्धति: चंद्रोदय-व्यापिनी कृष्ण चतुर्थी
नवंबर 2026 कार्तिक
अहोई अष्टमी
रविवार, 1 नवंबर 2026
- निर्णायक तिथि
- कार्तिक कृष्ण अष्टमी · 1 नवंबर 14:52 – 2 नवंबर 13:11 (अमांत पंचांग में आश्विन)
- निर्णय का समय
- प्रदोष काल — 17:36–20:12
- नियम
- कृष्ण अष्टमी (उत्तर भारत में कार्तिक) जो शाम के प्रदोष काल में हो — तारे देखने का समय।
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसारइस दिन का पंचांग
स्रोत
उत्तर भारतीय पंचांगों की पद्धति: प्रदोष-व्यापिनी कृष्ण अष्टमी
धनतेरस
शुक्रवार, 6 नवंबर 2026
- निर्णायक तिथि
- कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी · 6 नवंबर 10:31 – 7 नवंबर 10:48 (अमांत पंचांग में आश्विन)
- निर्णय का समय
- प्रदोष काल — 17:33–20:10
- नियम
- कृष्ण त्रयोदशी (उत्तर भारत में कार्तिक) जो प्रदोष काल में हो (यम दीपदान)।
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार
स्रोत
निर्णय सिंधु और धर्म सिंधु: त्रयोदशी के यम दीपदान (प्रदोष काल में) का निर्णय
नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली)
रविवार, 8 नवंबर 2026
- निर्णायक तिथि
- कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी · 7 नवंबर 10:48 – 8 नवंबर 11:28 (अमांत पंचांग में आश्विन)
- निर्णय का समय
- चंद्रोदय से सूर्योदय तक (भोर से पहले) — 05:41–06:38
- नियम
- कृष्ण चतुर्दशी (उत्तर भारत में कार्तिक) जो चंद्रोदय और सूर्योदय के बीच हो — अभ्यंग स्नान का समय।
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार
स्रोत
उत्तर भारतीय पंचांगों की पद्धति: चंद्रोदय से सूर्योदय के बीच की कृष्ण चतुर्दशी, अभ्यंग स्नान के लिए
दिवाली (लक्ष्मी पूजा)
रविवार, 8 नवंबर 2026
- निर्णायक तिथि
- कार्तिक अमावस्या · 8 नवंबर 11:28 – 9 नवंबर 12:32 (अमांत पंचांग में आश्विन)
- निर्णय का समय
- प्रदोष काल — 17:32–20:09
- नियम
- अमावस्या (उत्तर भारत में कार्तिक, अमांत आश्विन) जो प्रदोष काल में हो।
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार
स्रोत
निर्णय सिंधु और धर्म सिंधु: दीपावली (लक्ष्मी पूजा: प्रदोष-व्यापिनी अमावस्या) का निर्णय
गोवर्धन पूजा
मंगलवार, 10 नवंबर 2026
- निर्णायक तिथि
- कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा · 9 नवंबर 12:32 – 10 नवंबर 14:01
- निर्णय का समय
- सूर्योदय — 06:39
- नियम
- सुबह की कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा: सूर्योदय वाली प्रतिपदा, या किसी सूर्योदय पर न हो तो जिस दिन शुरू हो।
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार
स्रोत
निर्णय सिंधु और धर्म सिंधु: बलि प्रतिपदा और गोवर्धन (सुबह की प्रतिपदा) का निर्णय
भाई दूज
बुधवार, 11 नवंबर 2026
- निर्णायक तिथि
- कार्तिक शुक्ल द्वितीया · 10 नवंबर 14:01 – 11 नवंबर 15:54
- निर्णय का समय
- अपराह्न — 13:10–15:20
- नियम
- कार्तिक शुक्ल द्वितीया (यम द्वितीया) जो अपराह्न में हो; दो दिन हो तो दूसरा दिन (तृतीया-युक्त द्वितीया)।
- 10 नवंबर 2026 को भी अपराह्न में यह तिथि है; यह कैलेंडर 11 नवंबर 2026 मानता है।
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार
स्रोत
निर्णय सिंधु और धर्म सिंधु: यम द्वितीया (अपराह्न) का निर्णय; निर्णय सिंधु: युग्म तिथियों का नियम (जैसे द्वितीया के साथ तृतीया, चतुर्थी के साथ पंचमी, अष्टमी के साथ नवमी)
छठ: नहाय-खाय
शुक्रवार, 13 नवंबर 2026
- सूर्योदय पर तिथि
- कार्तिक शुक्ल चतुर्थी · 12 नवंबर 18:10 – 13 नवंबर 20:43
- समय
- सूर्योदय — 06:42
- नियम
- छठ का पहला दिन, संध्या अर्घ्य से दो दिन पहले: स्नान और एक बार सात्विक भोजन।
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार
स्रोत
बिहार और पूर्वांचल की परंपरा: सूर्यास्त के समय की षष्ठी को संध्या अर्घ्य, और उसके आगे-पीछे के दिन
छठ: खरना (लोहंडा)
शनिवार, 14 नवंबर 2026
- सूर्योदय पर तिथि
- कार्तिक शुक्ल पंचमी · 13 नवंबर 20:43 – 14 नवंबर 23:24
- समय
- सूर्यास्त — 17:28
- नियम
- छठ का दूसरा दिन: दिन भर उपवास, शाम को खीर का प्रसाद; फिर 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू।
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार
स्रोत
बिहार और पूर्वांचल की परंपरा: सूर्यास्त के समय की षष्ठी को संध्या अर्घ्य, और उसके आगे-पीछे के दिन
छठ पूजा (संध्या अर्घ्य)
रविवार, 15 नवंबर 2026
- निर्णायक तिथि
- कार्तिक शुक्ल षष्ठी · 14 नवंबर 23:24 – 16 नवंबर 02:02
- निर्णय का समय
- सूर्यास्त — 17:28
- नियम
- कार्तिक शुक्ल षष्ठी जो सूर्यास्त के समय हो — डूबते सूर्य को संध्या अर्घ्य।
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार
स्रोत
बिहार और पूर्वांचल की परंपरा: सूर्यास्त के समय की षष्ठी को संध्या अर्घ्य, और उसके आगे-पीछे के दिन
छठ: उषा अर्घ्य
सोमवार, 16 नवंबर 2026
- सूर्योदय पर तिथि
- कार्तिक शुक्ल सप्तमी · 16 नवंबर 02:02 – 17 नवंबर 04:20
- समय
- सूर्योदय — 06:44
- नियम
- छठ का चौथा दिन: उगते सूर्य को अर्घ्य, फिर पारण।
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार
स्रोत
बिहार और पूर्वांचल की परंपरा: सूर्यास्त के समय की षष्ठी को संध्या अर्घ्य, और उसके आगे-पीछे के दिन
देवउठनी एकादशी
शुक्रवार, 20 नवंबर 2026
- निर्णायक तिथि
- कार्तिक शुक्ल एकादशी · 20 नवंबर 07:16 – 21 नवंबर 06:32
- निर्णय का समय
- जिस दिन यह चलती है (किसी सूर्योदय पर नहीं) — 07:16 – 06:32 (21 नवंबर)
- नियम
- कार्तिक शुक्ल एकादशी (प्रबोधिनी), स्मार्त नियम: सूर्योदय वाली एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहली; किसी पर न हो तो जिस दिन शुरू हो।
- यह तिथि सूर्योदय के बाद शुरू होकर अगले सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाती है (क्षय तिथि), इसलिए 20 नवंबर 2026 को, जिस दिन यह चलती है, मानी जाती है।
- 20 नवंबर 2026 को अरुणोदय में दशमी है, इसलिए वैष्णव (इस्कॉन) 21 नवंबर 2026 को व्रत रखते हैं (गौण एकादशी)।
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार
स्रोत
निर्णय सिंधु और धर्म सिंधु: एकादशी का निर्णय (स्मार्त: सूर्योदय वाली एकादशी; वैष्णव: अरुणोदय में दशमी से विद्ध एकादशी नहीं)
तुलसी विवाह
शनिवार, 21 नवंबर 2026
- निर्णायक तिथि
- कार्तिक शुक्ल द्वादशी · 21 नवंबर 06:32 – 22 नवंबर 04:57
- निर्णय का समय
- सूर्योदय — 06:48
- नियम
- सूर्योदय के समय कार्तिक शुक्ल द्वादशी (परंपरा; कुछ परिवार एकादशी की शाम को करते हैं)।
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार
स्रोत
परंपरा: सूर्योदय वाली कार्तिक शुक्ल द्वादशी (कुछ परिवार एकादशी की शाम)
कार्तिक पूर्णिमा
मंगलवार, 24 नवंबर 2026
- निर्णायक तिथि
- कार्तिक पूर्णिमा · 23 नवंबर 23:43 – 24 नवंबर 20:24
- निर्णय का समय
- सूर्योदय — 06:50
- नियम
- सूर्योदय के समय कार्तिक पूर्णिमा — कार्तिक स्नान का दिन।
समय नई दिल्ली (IST) के अनुसार
स्रोत
उत्तर भारतीय पंचांगों की पद्धति: सूर्योदय वाली कार्तिक पूर्णिमा
देव दीपावली (वाराणसी)
मंगलवार, 24 नवंबर 2026
- निर्णायक तिथि
- कार्तिक पूर्णिमा · 23 नवंबर 23:43 – 24 नवंबर 20:24
- निर्णय का समय
- प्रदोष काल — 17:08–19:47
- नियम
- कार्तिक पूर्णिमा जो वाराणसी में प्रदोष काल में हो — घाटों पर दीपदान (काशी की परंपरा)।
समय वाराणसी (IST) के अनुसार
स्रोत
वाराणसी (काशी) की परंपरा: वहाँ प्रदोष-व्यापिनी कार्तिक पूर्णिमा
त्योहार की तारीख़ कैसे तय होती है
हर हिंदू त्योहार किसी तिथि से जुड़ा है। तिथि चंद्र-दिन है — वह समय जिसमें चंद्रमा सूर्य से 12 अंश आगे बढ़ता है। तिथि किसी भी घड़ी शुरू होकर किसी भी घड़ी ख़त्म हो सकती है, इसलिए वह अक्सर दो तारीख़ों में फैली रहती है। इसीलिए त्योहार की तारीख़ सिर्फ़ "तिथि वाला दिन" नहीं होती।
हर त्योहार का नियम बताता है कि दिन के किस समय उसकी तिथि होनी चाहिए। दिवाली की लक्ष्मी पूजा के लिए प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद का समय) में अमावस्या चाहिए। जन्माष्टमी के लिए निशीथ काल (आधी रात) में अष्टमी, राम नवमी और गणेश चतुर्थी के लिए मध्याह्न में तिथि, दशहरा और भाई दूज के लिए अपराह्न में, करवा चौथ के लिए चंद्रोदय पर और नरक चतुर्दशी के लिए चंद्रोदय से सूर्योदय के बीच तिथि चाहिए। बहुत-से व्रत और स्नान के दिन बस सूर्योदय के समय की तिथि — उदया तिथि — लेते हैं।
त्योहार उसी दिन होता है जिस दिन तिथि उस समय-खंड में हो। अगर तिथि दो दिन उस समय में हो, या किसी भी दिन न हो, तो त्योहार के नियम में यह भी तय है कि कौन-सा दिन लिया जाए; हर त्योहार के कार्ड में लिखा है कि यह कैलेंडर कौन-सा दिन मानता है, और दूसरा दिन भी, जिसमें तिथि रहती है।
यहाँ इस्तेमाल हुए समय-खंड
सूर्योदय और सूर्यास्त वही मानक समय हैं जो पंचांगों में छपते हैं — नई दिल्ली में सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर, वायुमंडलीय अपवर्तन के सामान्य हिसाब के साथ। सूर्योदय से सूर्यास्त तक के दिन को पाँच बराबर भागों में बाँटा जाता है; तीसरा भाग मध्याह्न है और चौथा अपराह्न। पूर्वाह्न सूर्योदय से दिन के मध्य तक चलता है।
प्रदोष काल सूर्यास्त के बाद रात का पहला पाँचवाँ भाग है — नई दिल्ली में भरी गर्मी में लगभग 2 घंटे और कड़ाके की सर्दी में लगभग 2 घंटे 45 मिनट। निशीथ काल रात के पंद्रह मुहूर्तों में आठवाँ है, यानी आधी रात के आसपास का समय। अरुणोदय सूर्योदय से पहले के 96 मिनट हैं। चंद्रोदय वह पल है जब चंद्रमा का केंद्र क्षितिज पर आता है; नरक चतुर्दशी का समय-खंड भोर से पहले के चंद्रोदय से सूर्योदय तक चलता है। इस पेज के सारे समय भारतीय मानक समय (IST) में हैं।
जब निर्णायक तिथि समय-खंड के बीच में शुरू या ख़त्म होती है, तो कार्ड पहले समय-खंड का वह भाग देता है जिसमें तिथि है, फिर पूरा समय-खंड। जन्माष्टमी और राम नवमी अपवाद हैं: उनका समय-खंड जन्म का समय है, इसलिए वह पूरा दिया जाता है; तिथि का आरंभ और अंत भी कार्ड पर लिखा है।
अमांत और पूर्णिमांत महीनों के नाम
उत्तर भारत में चांद्र मास एक पूर्णिमा से अगली पूर्णिमा तक गिना जाता है (पूर्णिमांत)। महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत में अमावस्या से अमावस्या तक (अमांत)। शुक्ल पक्ष का नाम दोनों में एक ही रहता है। कृष्ण पक्ष में उत्तर भारत अगले महीने का नाम ले लेता है — दिवाली की रात उत्तर प्रदेश में कार्तिक अमावस्या है और महाराष्ट्र में आश्विन अमावस्या। रात एक ही है, नाम दो।
कार्ड पर पहले उत्तर भारतीय नाम है, और जहाँ अमांत नाम अलग है वहाँ वह भी लिखा है, ताकि आप अपने घर के पंचांग से तारीख़ मिला सकें।
दूसरे कैलेंडर में दिन अलग क्यों हो सकता है
जगह से फ़र्क पड़ता है। कोलकाता में सूर्योदय नई दिल्ली से आधे घंटे से एक घंटे तक पहले होता है (मौसम के अनुसार), इसलिए जो तिथि दिल्ली के सूर्योदय से ठीक पहले ख़त्म होती है, वह पूर्व के शहरों में सूर्योदय पर बनी रह सकती है। यहाँ की तारीख़ें नई दिल्ली की हैं; उत्तर भारत के ज़्यादातर हिस्से में यही दिन माने जाते हैं, पर जो त्योहार अपने समय-खंड के किनारे पर हो, वह दूसरी जगह एक दिन आगे-पीछे हो सकता है।
परंपरा से भी फ़र्क पड़ता है। यह कैलेंडर स्मार्त परंपरा मानता है, जो उत्तर भारत के ज़्यादातर घरों में चलती है। इस्कॉन और दूसरे वैष्णव कैलेंडर एकादशी, जन्माष्टमी और राम नवमी के लिए अपने नियम मानते हैं और कभी-कभी अगला दिन रखते हैं; जहाँ ऐसा है, कार्ड में लिखा है। कुछ त्योहारों की क्षेत्रीय तारीख़ें भी होती हैं, जैसे दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में हनुमान जयंती। घर की पूजा के लिए आपके पुरोहित या स्थानीय मंदिर का कैलेंडर ही अंतिम है।
स्रोत और यह कैलेंडर कैसे बनता है
नियम निर्णय सिंधु (कमलाकर भट्ट, 17वीं सदी) और धर्म सिंधु (काशीनाथ उपाध्याय, 18वीं सदी) के शास्त्रीय निर्णय हैं, जैसे उत्तर भारत के पंचांग उन्हें लागू करते हैं। जिस दिन के लिए कोई शास्त्रीय निर्णय उद्धृत नहीं है, जैसे करवा चौथ या गुरु पूर्णिमा, उसके कार्ड पर लिखा है कि वह उत्तर भारतीय पंचांगों की पद्धति पर है; जो दिन परंपरा से माने जाते हैं — छठ, लोहड़ी, होली, तुलसी विवाह, देव दीपावली — उन्हें परंपरा लिखा गया है। सूर्य और चंद्रमा की स्थिति Swiss Ephemeris से, लाहिड़ी अयनांश के साथ आती है। कोई साल लाइव होने से पहले हर तारीख़ नई दिल्ली के एक प्रकाशित पंचांग से मिलाई जाती है।
मुहूर्त गाइड
विवाह और नए घर में प्रवेश की तारीख़ें मौसम के अपने नियमों से चलती हैं। ये लेख बताते हैं कि 2026–27 में कौन-से नियम मायने रखते हैं।
- सिंहस्थ गुरु 2026–27 और विवाह की तारीख़ें — सिंह राशि के गुरु: ग्रंथ क्या कहते हैं, और दोनों मतों से विवाह का मौसम
- खरमास 2026–27 — घंटे तक की तारीख़ें, क्या टालें और क्या नहीं
- मुहूर्त की तारीख़ें अलग क्यों होती हैं — दो पंचांगों की तारीख़ें न मिलने के नौ कारण
त्योहारों की तारीख़ों से जुड़े सवाल
- 2026 में दिवाली कब है?
- दिवाली (लक्ष्मी पूजा) रविवार, 8 नवंबर 2026 को है। लक्ष्मी पूजा के नियम में प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद का समय) में अमावस्या चाहिए, और कार्तिक अमावस्या (8 नवंबर 11:28 – 9 नवंबर 12:32) उस शाम के पूरे प्रदोष काल (नई दिल्ली में 17:32–20:09) में रहती है।
- 2026 में धनतेरस कब है?
- धनतेरस शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को है। इसके नियम (यम दीपदान) में प्रदोष काल में कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी चाहिए, और उस शाम के पूरे प्रदोष काल (नई दिल्ली में 17:33–20:10) में यही तिथि है।
- 2026 में छठ पूजा की तारीख़ें क्या हैं?
- नहाय-खाय शुक्रवार, 13 नवंबर 2026 को, खरना शनिवार, 14 नवंबर 2026 को, संध्या अर्घ्य रविवार, 15 नवंबर 2026 को और उषा अर्घ्य सोमवार, 16 नवंबर 2026 को। मुख्य दिन वह है जब सूर्यास्त के समय कार्तिक शुक्ल षष्ठी हो (नई दिल्ली में 17:28)।
- कुछ कैलेंडर 2026 में देवउठनी एकादशी का दिन अलग क्यों बताते हैं?
- यह कैलेंडर स्मार्त दिन, शुक्रवार, 20 नवंबर 2026, मानता है। यह तिथि सूर्योदय के बाद शुरू होकर अगले सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाती है (क्षय तिथि), इसलिए 20 नवंबर 2026 को, जिस दिन यह चलती है, मानी जाती है। 20 नवंबर 2026 को अरुणोदय में दशमी है, इसलिए वैष्णव (इस्कॉन) 21 नवंबर 2026 को व्रत रखते हैं (गौण एकादशी)।
- क्या ये तारीख़ें पूरे भारत में एक जैसी हैं?
- ये नई दिल्ली के लिए निकाली गई हैं और उत्तर भारत के ज़्यादातर हिस्से में लागू होती हैं। सूर्योदय और चंद्रोदय का समय जगह के साथ बदलता है, इसलिए जिस त्योहार की तिथि अपने समय-खंड के पास ख़त्म होती है, वह दूसरे शहर में एक दिन अलग पड़ सकता है; दक्षिण भारत और वैष्णव कैलेंडर कुछ नियम अपने मानते हैं।
- ये तारीख़ें कैसे निकाली जाती हैं?
- सूर्य और चंद्रमा की स्थिति (Swiss Ephemeris, लाहिड़ी अयनांश) से यह कैलेंडर हर तिथि का आरंभ और अंत निकालता है, फिर नई दिल्ली के लिए हर त्योहार का नियम लागू करता है कि दिन के किस समय तिथि होनी चाहिए। निर्णायक तिथि, उसका समय, नियम का स्रोत और दूसरा संभावित दिन हर त्योहार के साथ लिखा है।