रविवार, 1 नवंबर
अच्छा- 06:33–12:04
- 13:28–14:50
नक्षत्र: पुष्य तिथि: कृष्ण सप्तमी
1 नवंबर से 31 दिसंबर 2026 तक नई दिल्ली के लिए प्रचलित मत में ज़मीन या मकान की खरीद के 30 दिन हैं। ये वे दिन हैं जो किसी भी वार मुहूर्त चिंतामणि के नक्षत्र-वर्गों और तिथि, योग व करण के नियमों पर खरे उतरते हैं; यह उस पंचांग से अलग परंपरा है जिससे हमने मिलान किया, जो केवल गुरुवार और शुक्रवार और अपने नक्षत्र लेता है (नीचे देखें)। कड़ा मत (संक्रांति के घंटे) इनमें से 29 दिन रखता है। संक्रांति के ये घंटे 1 और दिन का समय भी छोटा करते हैं। खरमास, चातुर्मास और सिंहस्थ गुरु किसी भी सूची में ज़मीन या मकान की खरीद नहीं रोकते।
नई दिल्ली (28.61° उ., 77.21° पू.) के लिए IST में, Swiss Ephemeris और लाहिड़ी अयनांश से गणना — किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं। दूसरे शहरों में समय कुछ मिनट आगे-पीछे होता है। प्रचलित मत को एक प्रकाशित पंचांग की संपत्ति सूची से मिलाया गया है: नई दिल्ली का पूरा 2027। वह पंचांग दूसरी परंपरा पर चलता है, इसलिए दोनों सूचियों के दिन कुछ हद तक ही मिलते हैं (नीचे देखें)।
प्रचलित मत की तारीख़ें महीनेवार, और कड़ा मत उनमें से क्या रखता है। हर तारीख़ का समय नीचे के कार्डों में है।
प्रचलित मत इस अवधि में 1 दिन को "बहुत अच्छा" मानता है — साथ में सबसे अच्छे समय का नक्षत्र: शुक्रवार 20 नवंबर (उत्तराभाद्रपदा)। आपके अपने नक्षत्र इस दिन को आपके लिए कमज़ोर बना सकते हैं (नीचे देखें)।
शनिवार या रविवार को: 1, 7, 15, 21, 28 और 29 नवंबर; 5, 6, 12, 19 और 20 दिसंबर — कुल 30 दिनों में से 11।
खरीद के लिए खरमास एक परंपरा है, जो यहाँ नहीं लगाई गई; जो परिवार इसे मानता है, वह इनमें से 8 तारीख़ें छोड़ेगा: 16, 19, 20, 21, 22, 25, 30 और 31 दिसंबर (16 दिसंबर को केवल खरमास वाले घंटे)।
धनतेरस (शुक्रवार, 6 नवंबर 2026) इस सूची में है: 07:10–07:58, 09:21–10:42 और 12:05–14:48 (IST)।
दीवाली (8 नवंबर) इस सूची में नहीं है: लक्ष्मी पूजा अमावस्या को होती है, और ये सूचियाँ अमावस्या छोड़ती हैं।
छपे पंचांग और ग्रंथ हर नियम पर एक राय नहीं रखते, इसलिए यह पेज दो सूचियाँ देता है। प्रचलित मत नियमों को वैसे लगाता है, जैसे कई छपे पंचांग लगाते हैं। कड़ा मत उन्हीं समयों से शुरू करता है और ये नियम भी जोड़ता है: हर संक्रांति के दोनों ओर 16 घटी (6 घंटे 24 मिनट) और जिन क्षेत्रों में मुहूर्त चिंतामणि इसे मानता है, वहाँ होलाष्टक। कड़े मत का हर समय प्रचलित मत के किसी समय के भीतर ही होता है — यानी कड़ी सूची उसी सूची का छोटा रूप है, कोई अलग सूची नहीं।
जिन नियमों पर ये सूचियाँ चलती हैं, उनमें ज़मीन या मकान की खरीद के लिए कोई मौसम नहीं: सिंहस्थ गुरु, शुक्र-गुरु अस्त, खरमास और चातुर्मास विवाह और नए घर पर लगते हैं, खरीद पर नहीं। इसलिए यहाँ कड़ा मत केवल संक्रांति के घंटे (और जिन क्षेत्रों में ग्रंथ इसे मानता है, वहाँ होलाष्टक) जोड़ता है: वह प्रचलित मत का 1 दिन बंद करता है और 1 और दिन का समय छोटा करता है।
कौन-सी सूची मानें, यह परिवार का फ़ैसला है। आपका परिवार ग्रंथों को कड़ाई से मानता है तो कड़ा मत देखें; छपे पंचांग से चलता है तो प्रचलित मत। मुहूर्त की तारीख़ें अलग क्यों होती हैं में दो पंचांगों के अलग होने के बाक़ी कारण हैं।
उस पंचांग की संपत्ति सूची दूसरी परंपरा पर चलती है: केवल गुरुवार और शुक्रवार, अपने ग्यारह नक्षत्र, और तिथि, योग या करण का कोई नियम नहीं। यह सूची हर वार लेती है, नक्षत्रों की श्रेणी मुहूर्त चिंतामणि के वर्गों से तय करती है और तिथि, योग व करण के वही नियम लगाती है जो वाहन की सूची, इसलिए दोनों के दिन कुछ हद तक ही मिलते हैं। यहाँ हर दिन के साथ उसका नक्षत्र और वार लिखा है, ताकि उस परंपरा को मानने वाला परिवार ऐसा दिन चुन सके जो दोनों सूचियों में हो।
हर तारीख़ के साथ नई दिल्ली के लिए मुहूर्त का समय (IST), उस समय के नक्षत्र और तिथि, और एक श्रेणी दी है। जिस दिन कड़ा मत समय छोटा करता है या दिन बंद करता है, उस कार्ड पर यह लिखा है; जहाँ कुछ नहीं लिखा, वहाँ दोनों मत एक हैं। एक बार में एक सूची देखने के लिए मत चुनें।
सूची का हर दिन नियमों के अनुसार शुद्ध है। "बहुत अच्छा", "अच्छा" और "सामान्य" शास्त्रीय बातों (जैसे नक्षत्र, वार, शुक्ल पक्ष) से बना मोटा क्रम है — कोई संभावना या गारंटी नहीं।
नक्षत्र: पुष्य तिथि: कृष्ण सप्तमी
नक्षत्र: हस्त तिथि: कृष्ण द्वादशी, कृष्ण त्रयोदशी
नक्षत्र: चित्रा तिथि: कृष्ण त्रयोदशी
नक्षत्र: विशाखा तिथि: शुक्ल प्रतिपदा
नक्षत्र: अनुराधा तिथि: शुक्ल प्रतिपदा, शुक्ल द्वितीया
नक्षत्र: अनुराधा तिथि: शुक्ल द्वितीया
नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा तिथि: शुक्ल षष्ठी
नक्षत्र: श्रवण तिथि: शुक्ल सप्तमी
कड़ा मत: समय कम — 06:45–08:04, 09:25–10:45, 12:06–13:19
नक्षत्र: उत्तराभाद्रपदा तिथि: शुक्ल एकादशी
नक्षत्र: रेवती तिथि: शुक्ल द्वादशी
नक्षत्र: कृत्तिका तिथि: पूर्णिमा
नक्षत्र: रोहिणी तिथि: कृष्ण प्रतिपदा, कृष्ण द्वितीया
नक्षत्र: मृगशिरा तिथि: कृष्ण द्वितीया, कृष्ण तृतीया
नक्षत्र: पुनर्वसु, पुष्य तिथि: कृष्ण पंचमी
नक्षत्र: पुष्य तिथि: कृष्ण षष्ठी
नक्षत्र: उत्तराफाल्गुनी तिथि: कृष्ण दशमी
नक्षत्र: हस्त, चित्रा तिथि: कृष्ण एकादशी
नक्षत्र: चित्रा, स्वाती तिथि: कृष्ण द्वादशी
नक्षत्र: स्वाती, विशाखा तिथि: कृष्ण त्रयोदशी
नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा तिथि: शुक्ल तृतीया
नक्षत्र: श्रवण, धनिष्ठा तिथि: शुक्ल पंचमी
नक्षत्र: धनिष्ठा, शतभिषा तिथि: शुक्ल षष्ठी
10:25 पर सूर्य धनु में आते हैं और खरमास शुरू होता है — खरीद में खरमास मानने वाले परिवार उससे पहले के घंटे लेते हैं (परंपरा)।
नक्षत्र: शतभिषा तिथि: शुक्ल सप्तमी
कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं
नक्षत्र: रेवती तिथि: शुक्ल दशमी
नक्षत्र: अश्विनी तिथि: शुक्ल एकादशी
नक्षत्र: कृत्तिका तिथि: शुक्ल द्वादशी
नक्षत्र: कृत्तिका, रोहिणी तिथि: शुक्ल त्रयोदशी
नक्षत्र: पुनर्वसु तिथि: कृष्ण द्वितीया
नक्षत्र: उत्तराफाल्गुनी तिथि: कृष्ण सप्तमी, कृष्ण अष्टमी
नक्षत्र: हस्त तिथि: कृष्ण अष्टमी
इन सूचियों में ज़मीन या मकान की खरीद के लिए कोई मौसम बंद नहीं। केवल कड़ा मत नीचे दिए संक्रांति के घंटे टालता है। बाक़ी अवधियाँ उनकी तारीख़ों के साथ उन परिवारों के लिए दी हैं, जो इन्हें खरीद में भी मानते हैं।
कड़ा मत सूर्य के राशि में आने के पल के दोनों ओर 16 घटी (6 घंटे 24 मिनट) टालता है (बी.वी. रमन, मुहूर्त; कालप्रकाशिका की 30 घटी नहीं ली गईं)। इस अवधि की संक्रांतियाँ, नई दिल्ली के लिए, IST में:
कोई भी सूची सिंहस्थ गुरु, शुक्र-गुरु अस्त, खरमास, चातुर्मास या होलाष्टक के कारण ज़मीन या मकान की खरीद नहीं रोकती। मुहूर्त चिंतामणि में जिन कामों को सिंहस्थ और अस्त से दूर रखा गया है, उनमें खरीद का नाम नहीं। होलाष्टक: मुहूर्त चिंतामणि (शुभाशुभ प्रकरण, शीघ्रबोध के हवाले से) इसे केवल ब्यास, रावी और सतलुज के क्षेत्र और पुष्कर में मानता है; उत्तर भारत में बहुत-से परिवार इसे परंपरा से मानते हैं, पर ये सूचियाँ नई दिल्ली में इसे नहीं लगातीं। अगर आपका परिवार इनमें से किसी में खरीद टालता है, तो ये तारीख़ें छोड़ दें (IST):
नक्षत्र या तिथि हर जगह एक ही पल बदलते हैं, पर हर जगह का सूर्योदय, सूर्यास्त और राहु काल अपना होता है — इसलिए दूसरे शहर में समय कुछ मिनट आगे-पीछे होता है, और किसी बदलाव के पास वाला दिन जुड़ या हट सकता है। मुहूर्त खोजक आपके शहर और आपकी तारीख़ों के लिए संपत्ति खरीद की दोनों सूचियाँ निकालता है, एक बार में तीन महीने तक। किसी महीने से शुरू करें:
सबके लिए बनी सूची आपके अपने नक्षत्र नहीं देख सकती। मुहूर्त चिंतामणि का गोचर प्रकरण दो निजी जाँचें जोड़ता है: तारा बल — उस दिन का नक्षत्र आपके जन्म नक्षत्र से गिना हुआ — और चंद्र बल — चंद्रमा की राशि आपकी जन्म चंद्र राशि से गिनी हुई। जो दिन आम तौर पर अच्छा है, वह आपके लिए कमज़ोर हो सकता है।
इस सूची की किसी तारीख़ के बारे में AI ज्योतिषी से पूछें। वह आपकी कुंडली से दोनों जाँचें करता है, आपकी कुंडली में सहेजी जगह के लिए उस दिन का समय पढ़ता है और अपने जवाब के पीछे का नियम बताता है।
तारीख़ और काम लिखिए। अगली स्क्रीन पर साइन इन कीजिए और एक बार जन्म विवरण भरिए — सवाल आपकी चैट में तैयार मिलेगा।
इन सूचियों के पीछे के नियम, उनके स्रोतों के साथ: