2027 में नई दिल्ली के लिए कर्णवेध मुहूर्त के 17 दिन हैं। यह प्रचलित मत है: कर्णवेध के वे नियम जो छपे पंचांग बताते हैं (नक्षत्र, तिथि, वार, मौसम और लग्न)। ग्रंथों के कड़े मत में इनमें से 7 दिन हैं। दोनों मत केवल वे समय रखते हैं जिनका लग्न इस संस्कार के नियमों पर खरा है — किसी की जन्म कुंडली देखे बिना। कड़ा मत इनमें से 10 दिन छोड़ता है: सिंहस्थ गुरु से 6, मास के नियम से 4 और अस्त के आसपास के दिनों से 1 (एक दिन दो नियमों में भी आ सकता है)। सबसे ज़्यादा दिन जनवरी (3), मई (3) और नवंबर (3) में हैं; मार्च और अगस्त से अक्टूबर में कोई दिन नहीं। बच्चे की उम्र से मेल खाने वाली तारीख़ चुनें: 12वाँ या 16वाँ दिन, छठा, सातवाँ या आठवाँ महीना, या कोई विषम वर्ष (मुहूर्त चिंतामणि)।
प्रचलित मत
17 दिन (20 जनवरी – 9 दिसंबर)
कड़ा मत
7 दिन (11 फ़रवरी – 7 जून)
सबसे ज़्यादा दिन
जनवरी (3), मई (3) और नवंबर (3)
कोई दिन नहीं
मार्च और अगस्त से अक्टूबर
मौसम
खरमास और चातुर्मास में नहीं
बच्चे की उम्र
12वाँ या 16वाँ दिन, छठे से आठवें महीने तक, या कोई विषम वर्ष
समय
IST, दिन का पहला भाग
नई दिल्ली (28.61° उ., 77.21° पू.) के लिए IST में, Swiss Ephemeris और लाहिड़ी अयनांश से गणना — किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का फ़र्क़ होता है। प्रचलित मत को एक छपे पंचांग के कर्णवेध वाले दिनों से मिलाया गया है: नई दिल्ली, मुंबई व कोलकाता के लिए 14 से 26 जनवरी 2027 तक, और उन्हीं शहरों के लिए 16 से 22 नवंबर 2026 तक और 12 व 25 फ़रवरी 2027 (नीचे देखें)।
2027 की सभी 17 तारीख़ें एक नज़र में
प्रचलित मत की तारीख़ें महीनेवार, और कड़ा मत उनमें से क्या रखता है। हर तारीख़ का समय नीचे के कार्डों में है।
जनवरी: 20, 22 और 27 (3 दिन); कड़ा मत इनमें से कोई नहीं रखता
फ़रवरी: 11 और 18 (2 दिन); कड़ा मत भी ये सब रखता है
मार्च: किसी भी मत में कोई दिन नहीं
अप्रैल: 29 (1 दिन); कड़ा मत इसे छोड़ता है
मई: 12, 17 और 21 (3 दिन); कड़ा मत भी ये सब रखता है
जून: 2 और 7 (2 दिन); कड़ा मत भी ये सब रखता है
जुलाई: 5 (1 दिन); कड़ा मत इसे छोड़ता है
अगस्त: किसी भी मत में कोई दिन नहीं
सितंबर: किसी भी मत में कोई दिन नहीं
अक्टूबर: किसी भी मत में कोई दिन नहीं
नवंबर: 11, 24 और 25 (3 दिन); कड़ा मत इनमें से कोई नहीं रखता
दिसंबर: 3 और 9 (2 दिन); कड़ा मत इनमें से कोई नहीं रखता
प्रचलित मत 2027 में 11 दिनों को "बहुत अच्छा" मानता है — साथ में सबसे अच्छे समय का नक्षत्र: बुधवार 20 जनवरी (मृगशिरा); शुक्रवार 22 जनवरी (पुनर्वसु और पुष्य); गुरुवार 11 फ़रवरी (रेवती); गुरुवार 18 फ़रवरी (पुनर्वसु); बुधवार 12 मई (पुष्य); सोमवार 17 मई (हस्त); सोमवार 7 जून (पुनर्वसु); सोमवार 5 जुलाई (पुष्य); गुरुवार 11 नवंबर (रेवती); शुक्रवार 3 दिसंबर (श्रवण); गुरुवार 9 दिसंबर (रेवती)। बच्चे के अपने नक्षत्र इनमें से किसी दिन को कमज़ोर बना सकते हैं (नीचे देखें)।
शनिवार या रविवार को 2027 में कोई तारीख़ नहीं पड़ती।
वार के अनुसार: सोमवार को 3, बुधवार को 5, गुरुवार को 6 और शुक्रवार को 3; पक्ष के अनुसार, शुक्ल पक्ष में 11 और कृष्ण पक्ष में 6 (पहले समय की तिथि से)।
दो मत, दो सूचियाँ
छपे पंचांग और ग्रंथ हर नियम पर एकमत नहीं, इसलिए यह पेज दो सूचियाँ देता है। प्रचलित मत: कर्णवेध के वे नियम जो छपे पंचांग बताते हैं (नक्षत्र, तिथि, वार, मौसम और लग्न)। कड़ा मत उन्हीं समयों से शुरू होकर ये भी लगाता है: सिंहस्थ गुरु और मकर गुरु (क्षेत्र के अनुसार), शुक्र या गुरु के अस्त होने से पहले और उदय के बाद के 7-7 दिन, चैत्र और पौष का चांद्र मास, लग्न के आठवें भाव में राहु और केतु की भी गिनती और सूर्य के राशि-प्रवेश वाला पूरा दिन। कड़े मत का हर समय प्रचलित मत के किसी समय के भीतर होता है, इसलिए कड़ी सूची उसी सूची का छोटा रूप है, कोई अलग सूची नहीं।
सबसे बड़ा फ़र्क़ सिंहस्थ गुरु का है, यानी गुरु का सिंह राशि में होना: मुहूर्त चिंतामणि कर्णवेध (कान छेदन) को उन कामों में गिनता है जो इसमें नहीं किए जाते, और कई पंचांग यह नियम नहीं लगाते। गुरु 31 अक्टूबर 2026, 12:02 से 25 जनवरी 2027, 01:31 तक और 26 जून 2027, 05:18 से 15 सितंबर 2027, 09:56 तक (IST) मघा या पूर्वाफाल्गुनी के पहले चरण में है — ग्रंथ इसे हर क्षेत्र में वर्जित मानते हैं; 15 सितंबर 2027, 09:56 से 26 नवंबर 2027, 18:45 तक (IST) वह सिंह के बाक़ी भाग में है — इसे वे नई दिल्ली में भी वर्जित मानते हैं। सिंहस्थ गुरु की गाइड यह नियम और इसके क्षेत्र समझाती है, और खरमास 2026–27 सूर्य के धनु और मीन वाले दो महीनों के बारे में बताता है।
कौन-सी सूची मानें, यह परिवार का फ़ैसला है। आपका परिवार ग्रंथों को कड़ाई से मानता है तो कड़ा मत देखें; छपे पंचांग से चलता है तो प्रचलित मत। मुहूर्त की तारीख़ें अलग क्यों होती हैं में दो पंचांगों के अलग होने के बाक़ी कारण हैं।
प्रचलित मत को एक बहुप्रचलित पंचांग के कर्णवेध वाले दिनों से दिन-ब-दिन मिलाया गया है: नई दिल्ली, मुंबई व कोलकाता के लिए 14 से 26 जनवरी 2027 तक, और उन्हीं शहरों के लिए 16 से 22 नवंबर 2026 तक और 12 व 25 फ़रवरी 2027। वह पंचांग संस्कारों की कोई सालाना सूची नहीं छापता, केवल रोज़ का एक टूल देता है, इसलिए यह 66 पेजों का एक नमूना है: उसने वहाँ तीन तारीख़ों पर 9 दिन दिए, और प्रचलित मत उनमें से 6 रखता है और कोई नया दिन नहीं जोड़ता; बाक़ी 3, तीनों शहरों में 12 फ़रवरी 2027, अश्विनी के पहले चरण में पड़ते हैं — गंडांत का वह चरण जिसे यह साइट हटाती है और उस पंचांग का संस्कार टूल नहीं हटाता। जिन दिनों दोनों दिन देते हैं, वहाँ समय केवल वहीं अलग है जहाँ यह साइट राहु काल, यमगंड और गुलिक या एक घटी से छोटा समय हटाती है, और समय वहीं ख़त्म होता है जहाँ अपराह्न शुरू होता है, जैसे उस पंचांग में।
कर्णवेध मुहूर्त की तारीख़ें 2027: महीनेवार
हर तारीख़ के साथ नई दिल्ली के लिए मुहूर्त का समय (IST), उस समय के नक्षत्र और तिथि, और एक श्रेणी दी है। जिस दिन कड़ा मत समय छोटा करता है या दिन बंद करता है, उस कार्ड पर यह लिखा है; जहाँ कुछ नहीं लिखा, वहाँ दोनों मत एक हैं। एक बार में एक सूची देखने के लिए मत चुनें।
सूची का हर दिन नियमों के अनुसार शुद्ध है। "बहुत अच्छा", "अच्छा" और "सामान्य" शास्त्रीय बातों (जैसे नक्षत्र, वार, शुक्ल पक्ष) से बना मोटा क्रम है — कोई संभावना या गारंटी नहीं।
जनवरी 2027 3 दिन
कड़ा मत: इस महीने कोई मुहूर्त नहीं — प्रचलित मत के 3 दिन इसके नियमों से बंद हैं: अनुपयुक्त महीना (3 दिन), सिंहस्थ गुरु (2 दिन)।
बुधवार, 20 जनवरी
बहुत अच्छा
10:10–11:12
नक्षत्र: मृगशिरा तिथि: शुक्ल त्रयोदशी
कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं
पौष — कड़ा मत कर्णवेध के लिए यह महीना छोड़ता है मुहूर्त चिंतामणि, संस्कार प्रकरण
सिंहस्थ गुरु — गुरु मघा नक्षत्र में (हर क्षेत्र में वर्जित) मुहूर्त चिंतामणि, शुभाशुभ प्रकरण, और धर्मसिंधु
शुक्रवार, 22 जनवरी
बहुत अच्छा
10:02–11:12
13:03–13:36
नक्षत्र: पुनर्वसु, पुष्य तिथि: पूर्णिमा
कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं
पौष — कड़ा मत कर्णवेध के लिए यह महीना छोड़ता है मुहूर्त चिंतामणि, संस्कार प्रकरण
सिंहस्थ गुरु — गुरु मघा नक्षत्र में (हर क्षेत्र में वर्जित) मुहूर्त चिंतामणि, शुभाशुभ प्रकरण, और धर्मसिंधु
बुधवार, 27 जनवरी
अच्छा
10:03–11:03
नक्षत्र: हस्त तिथि: कृष्ण षष्ठी
कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं
पौष — कड़ा मत कर्णवेध के लिए यह महीना छोड़ता है मुहूर्त चिंतामणि, संस्कार प्रकरण
फ़रवरी 2027 2 दिन
गुरुवार, 11 फ़रवरी
बहुत अच्छा
08:44–09:49
नक्षत्र: रेवती तिथि: शुक्ल पंचमी
गुरुवार, 18 फ़रवरी
बहुत अच्छा
08:22–09:36
नक्षत्र: पुनर्वसु तिथि: शुक्ल द्वादशी
मार्च 2027 0 दिन
प्रचलित मत: इस महीने कोई मुहूर्त नहीं — मुख्य कारण: खरमास (17 दिन), अनुपयुक्त नक्षत्र (24 दिन), वर्जित वार (13 दिन)।
कड़ा मत: इसमें भी कोई नहीं।
अप्रैल 2027 1 दिन
कड़ा मत: इस महीने कोई मुहूर्त नहीं — प्रचलित मत का 1 दिन इसके नियमों से बंद है: अनुपयुक्त महीना।
गुरुवार, 29 अप्रैल
अच्छा
07:22–08:32
नक्षत्र: श्रवण तिथि: कृष्ण अष्टमी
कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं
चैत्र — कड़ा मत कर्णवेध के लिए यह महीना छोड़ता है मुहूर्त चिंतामणि, संस्कार प्रकरण
मई 2027 3 दिन
बुधवार, 12 मई
बहुत अच्छा
05:50–07:13
नक्षत्र: पुष्य तिथि: शुक्ल सप्तमी
सोमवार, 17 मई
बहुत अच्छा
05:30–07:11
नक्षत्र: हस्त तिथि: शुक्ल द्वादशी
शुक्रवार, 21 मई
अच्छा
05:28–07:05
नक्षत्र: अनुराधा तिथि: कृष्ण प्रतिपदा
जून 2027 2 दिन
बुधवार, 2 जून
अच्छा
05:24–06:18
नक्षत्र: अश्विनी तिथि: कृष्ण द्वादशी
सोमवार, 7 जून
बहुत अच्छा
05:23–05:58
नक्षत्र: पुनर्वसु तिथि: शुक्ल तृतीया
जुलाई 2027 1 दिन
कड़ा मत: इस महीने कोई मुहूर्त नहीं — प्रचलित मत का 1 दिन इसके नियमों से बंद है: सिंहस्थ गुरु, अस्त के आसपास के दिन।
सोमवार, 5 जुलाई
बहुत अच्छा
13:22–13:49
नक्षत्र: पुष्य तिथि: शुक्ल द्वितीया
कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं
सिंहस्थ गुरु — गुरु मघा नक्षत्र में (हर क्षेत्र में वर्जित) मुहूर्त चिंतामणि, शुभाशुभ प्रकरण, और धर्मसिंधु
शुक्र वृद्ध — अस्त होने से पहले के 7 दिन धर्मसिंधु (मध्यम मत: 7 दिन)
अगस्त 2027 0 दिन
प्रचलित मत: इस महीने कोई मुहूर्त नहीं — मुख्य कारण: चातुर्मास (31 दिन), शुक्र या गुरु अस्त (31 दिन), अनुपयुक्त नक्षत्र (25 दिन)।
कड़ा मत: इसमें भी कोई नहीं।
सितंबर 2027 0 दिन
प्रचलित मत: इस महीने कोई मुहूर्त नहीं — मुख्य कारण: चातुर्मास (30 दिन), शुक्र या गुरु अस्त (17 दिन), अनुपयुक्त नक्षत्र (24 दिन)।
कड़ा मत: इसमें भी कोई नहीं।
अक्टूबर 2027 0 दिन
प्रचलित मत: इस महीने कोई मुहूर्त नहीं — मुख्य कारण: चातुर्मास (31 दिन), अनुपयुक्त नक्षत्र (22 दिन), वर्जित वार (14 दिन)।
कड़ा मत: इसमें भी कोई नहीं।
नवंबर 2027 3 दिन
कड़ा मत: इस महीने कोई मुहूर्त नहीं — प्रचलित मत के 3 दिन इसके नियमों से बंद हैं: सिंहस्थ गुरु (3 दिन), नियमों पर खरा लग्न नहीं (3 दिन)।
गुरुवार, 11 नवंबर
बहुत अच्छा
10:44–11:32
नक्षत्र: रेवती तिथि: शुक्ल त्रयोदशी
कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं
धनु लग्न, उसके आठवें भाव में केतु — कड़ा मत कर्णवेध के लिए आठवें भाव में राहु-केतु को भी गिनता है मुहूर्त चिंतामणि, संस्कार प्रकरण
सिंहस्थ गुरु — गुरु सिंह राशि में 16°40′ के बाद (इस क्षेत्र में वर्जित) मुहूर्त चिंतामणि, शुभाशुभ प्रकरण, और धर्मसिंधु
बुधवार, 24 नवंबर
अच्छा
09:29–10:40
नक्षत्र: हस्त तिथि: कृष्ण एकादशी
कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं
धनु लग्न, उसके आठवें भाव में केतु — कड़ा मत कर्णवेध के लिए आठवें भाव में राहु-केतु को भी गिनता है मुहूर्त चिंतामणि, संस्कार प्रकरण
सिंहस्थ गुरु — गुरु सिंह राशि में 16°40′ के बाद (इस क्षेत्र में वर्जित) मुहूर्त चिंतामणि, शुभाशुभ प्रकरण, और धर्मसिंधु
गुरुवार, 25 नवंबर
अच्छा
08:38–09:29
नक्षत्र: चित्रा तिथि: कृष्ण द्वादशी
कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं
धनु लग्न, उसके आठवें भाव में केतु — कड़ा मत कर्णवेध के लिए आठवें भाव में राहु-केतु को भी गिनता है मुहूर्त चिंतामणि, संस्कार प्रकरण
सिंहस्थ गुरु — गुरु सिंह राशि में 16°40′ के बाद (इस क्षेत्र में वर्जित) मुहूर्त चिंतामणि, शुभाशुभ प्रकरण, और धर्मसिंधु
दिसंबर 2027 2 दिन
कड़ा मत: इस महीने कोई मुहूर्त नहीं — प्रचलित मत के 2 दिन इसके नियमों से बंद हैं: नियमों पर खरा लग्न नहीं (2 दिन)।
शुक्रवार, 3 दिसंबर
बहुत अच्छा
09:34–10:05
नक्षत्र: श्रवण तिथि: शुक्ल पंचमी
कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं
धनु लग्न, उसके आठवें भाव में केतु — कड़ा मत कर्णवेध के लिए आठवें भाव में राहु-केतु को भी गिनता है मुहूर्त चिंतामणि, संस्कार प्रकरण
गुरुवार, 9 दिसंबर
बहुत अच्छा
08:20–09:37
नक्षत्र: रेवती तिथि: शुक्ल एकादशी
कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं
धनु लग्न, उसके आठवें भाव में केतु — कड़ा मत कर्णवेध के लिए आठवें भाव में राहु-केतु को भी गिनता है मुहूर्त चिंतामणि, संस्कार प्रकरण
2027 में कर्णवेध के लिए बंद अवधियाँ
ये अवधियाँ नई दिल्ली में कर्णवेध (कान छेदन) रोकती हैं; इनका समय पंचांग गणना से मिनट तक निकाला गया है (IST)। "दोनों मत" का अर्थ है कि इस पेज की हर सूची इन्हें छोड़ती है; "कड़ा मत" का अर्थ है कि केवल कड़ी सूची।
सिंहस्थ गुरु: गुरु मघा या पूर्वाफाल्गुनी के पहले चरण में कड़ा मत
31 अक्टूबर 2026, 12:02 – 25 जनवरी 2027, 01:31
गुरु मघा या पूर्वाफाल्गुनी के पहले चरण में: कड़ा मत कर्णवेध (कान छेदन) हर क्षेत्र में वर्जित मानता है, केवल सूर्य के मेष में रहते नहीं (मुहूर्त चिंतामणि, शुभाशुभ प्रकरण, और धर्मसिंधु)।
खरमास (सूर्य धनु में) दोनों मत
16 दिसंबर 2026, 10:25 – 14 जनवरी 2027, 21:10
खरमास, सूर्य धनु में: छपे पंचांग कर्णवेध के लिए इसे छोड़ते हैं, इसलिए दोनों मत भी छोड़ते हैं।
खरमास (सूर्य मीन में) दोनों मत
15 मार्च 2027, 07:00 – 14 अप्रैल 2027, 15:28
खरमास, सूर्य मीन में: छपे पंचांग कर्णवेध के लिए इसे छोड़ते हैं, इसलिए दोनों मत भी छोड़ते हैं।
सिंहस्थ गुरु: गुरु मघा या पूर्वाफाल्गुनी के पहले चरण में कड़ा मत
26 जून 2027, 05:18 – 15 सितंबर 2027, 09:56
गुरु मघा या पूर्वाफाल्गुनी के पहले चरण में: कड़ा मत कर्णवेध (कान छेदन) हर क्षेत्र में वर्जित मानता है, केवल सूर्य के मेष में रहते नहीं (मुहूर्त चिंतामणि, शुभाशुभ प्रकरण, और धर्मसिंधु)।
शुक्र वृद्ध (अस्त से पहले) कड़ा मत
29 जून 2027, 20:42 – 6 जुलाई 2027, 20:42
ग्रह के अस्त होने से पहले के 7 दिन (वृद्ध — धर्मसिंधु का मध्यम मत): केवल कड़ा मत।
शुक्र अस्त दोनों मत
6 जुलाई 2027, 20:42 – 17 सितंबर 2027, 22:48
सूर्य सिद्धांत के अंशों से शुक्र अस्त है (10°, वक्री होने पर 8°): दोनों मत कर्णवेध (कान छेदन) वर्जित मानते हैं — मुहूर्त चिंतामणि का शुभाशुभ प्रकरण इसे अस्त से दूर रखे जाने वाले कामों में गिनाता है। जो पंचांग ग्रह के दिखने से अस्त गिनते हैं, उनमें कुछ दिनों का फ़र्क़ हो सकता है।
चातुर्मास दोनों मत
13 जुलाई 2027, 12:09 – 10 नवंबर 2027, 09:11
चातुर्मास (हरिशयन), देवशयनी से देवउठनी एकादशी तक: दोनों में से किसी मत में कर्णवेध नहीं (मुहूर्त चिंतामणि, संस्कार प्रकरण; छपे पंचांग भी यही लगाते हैं)।
गुरु वृद्ध (अस्त से पहले) कड़ा मत
9 अगस्त 2027, 19:42 – 16 अगस्त 2027, 19:42
ग्रह के अस्त होने से पहले के 7 दिन (वृद्ध — धर्मसिंधु का मध्यम मत): केवल कड़ा मत।
गुरु अस्त दोनों मत
16 अगस्त 2027, 19:42 – 15 सितंबर 2027, 03:12
सूर्य सिद्धांत के अंशों से गुरु अस्त है (11°): दोनों मत कर्णवेध (कान छेदन) वर्जित मानते हैं।
गुरु बाल्य (उदय के बाद) कड़ा मत
15 सितंबर 2027, 03:12 – 22 सितंबर 2027, 03:12
ग्रह के फिर उदय होने के बाद के 7 दिन (बाल्य — धर्मसिंधु का मध्यम मत): केवल कड़ा मत।
सिंहस्थ गुरु: गुरु सिंह के बाक़ी भाग में (क्षेत्रीय) कड़ा मत
15 सितंबर 2027, 09:56 – 26 नवंबर 2027, 18:45
गुरु सिंह के बाक़ी भाग में: कड़ा मत कर्णवेध (कान छेदन) गंगा और गोदावरी के बीच और गुजरात, बंगाल व ओडिशा में वर्जित मानता है; नई दिल्ली भी इसी में आता है।
शुक्र बाल्य (उदय के बाद) कड़ा मत
17 सितंबर 2027, 22:48 – 24 सितंबर 2027, 22:48
ग्रह के फिर उदय होने के बाद के 7 दिन (बाल्य — धर्मसिंधु का मध्यम मत): केवल कड़ा मत।
खरमास (सूर्य धनु में) दोनों मत
16 दिसंबर 2027, 16:38 – 15 जनवरी 2028, 03:24
खरमास, सूर्य धनु में: छपे पंचांग कर्णवेध के लिए इसे छोड़ते हैं, इसलिए दोनों मत भी छोड़ते हैं।
संक्रांतियाँ: सूर्य का हर राशि में प्रवेश
मुहूर्त चिंतामणि के संस्कार प्रकरण में उद्धृत गर्ग संक्रांति के दिन कोई शुभ काम नहीं करने देते। प्रचलित मत उसका पुण्य दिन वैसे छोड़ता है जैसे छपे पंचांग गिनते हैं — सूर्य के राशि-प्रवेश का दिन, या सूर्यास्त के बाद प्रवेश हो तो अगला दिन; कड़ा मत प्रवेश वाला दिन भी छोड़ता है। 2027 में नई दिल्ली के लिए सूर्य के राशि-प्रवेश, IST में:
मकर: सूर्य का प्रवेश 14 जनवरी 2027, 21:10
कुंभ: सूर्य का प्रवेश 13 फ़रवरी 2027, 10:09
मीन: सूर्य का प्रवेश 15 मार्च 2027, 07:00
मेष: सूर्य का प्रवेश 14 अप्रैल 2027, 15:28
वृष: सूर्य का प्रवेश 15 मई 2027, 12:19
मिथुन: सूर्य का प्रवेश 15 जून 2027, 18:55
कर्क: सूर्य का प्रवेश 17 जुलाई 2027, 05:48
सिंह: सूर्य का प्रवेश 17 अगस्त 2027, 14:13
कन्या: सूर्य का प्रवेश 17 सितंबर 2027, 14:10
तुला: सूर्य का प्रवेश 18 अक्टूबर 2027, 02:08
वृश्चिक: सूर्य का प्रवेश 17 नवंबर 2027, 01:58
धनु: सूर्य का प्रवेश 16 दिसंबर 2027, 16:38
नई दिल्ली में कोई भी सूची इन अवधियों के कारण कर्णवेध (कान छेदन) नहीं रोकती। होलाष्टक को मुहूर्त चिंतामणि केवल ब्यास, रावी और सतलुज के क्षेत्र और पुष्कर में मानता है। अगर आपका परिवार इनमें से कोई मानता है, तो वे तारीख़ें छोड़ दें (IST):
होलाष्टक: 15 मार्च 2027, 10:51 – 22 मार्च 2027, 16:13
ये तारीख़ें कैसे चुनी गईं
चंद्रमा का नक्षत्र: श्रवण, धनिष्ठा, पुनर्वसु और मृदु व क्षिप्र नक्षत्र — अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, चित्रा, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा और रेवती (मुहूर्त चिंतामणि, संस्कार प्रकरण; छपे पंचांग भी यही लेते हैं)।
मौसम: खरमास (सूर्य धनु या मीन में) और चातुर्मास (हरिशयन) में कभी नहीं — छपे पंचांग दोनों लगाते हैं, और मुहूर्त चिंतामणि हरिशयन का नाम लेता है। अधिक मास में कभी नहीं, शुक्र या गुरु के अस्त रहते कभी नहीं (सूर्य सिद्धांत के अंश: शुक्र 10°, वक्री होने पर 8°, गुरु 11°): कर्णवेध ग्रंथ की अस्त वाली सूची में है।
तिथि: रिक्ता तिथियों (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) और अमावस्या के सिवा कोई भी तिथि (छपे पंचांग भी यही लगाते हैं; मुहूर्त चिंतामणि क्षय तिथि भी छोड़ता है — नीचे)।
वार: केवल सोमवार, बुधवार, गुरुवार या शुक्रवार (मुहूर्त चिंतामणि, संस्कार प्रकरण; छपे पंचांग भी यही लगाते हैं)।
समय: केवल अपराह्न से पहले — दिन के अंतिम दो-पाँचवें भाग को छोड़ा गया है, जैसे छपे पंचांग करते हैं।
बच्चे की उम्र: जन्म का 12वाँ या 16वाँ दिन, छठा, सातवाँ या आठवाँ महीना, या कोई विषम वर्ष (मुहूर्त चिंतामणि, संस्कार प्रकरण; छपे पंचांग 10वाँ दिन भी जोड़ते हैं)। कर्णवेध परिवार का संस्कार है: बच्चे की सेहत के लिए डॉक्टर की सलाह पहले।
लग्न, जिसे दोनों मत देखते हैं: केवल वे समय जिनका लग्न शुक्र या गुरु की राशि हो — वृष, तुला, धनु या मीन — और आठवाँ भाव ख़ाली हो (मुहूर्त चिंतामणि, संस्कार प्रकरण, टीका सहित; सात ग्रहों से पढ़ा गया, जैसे छपे पंचांग मुंडन और नामकरण में पढ़ते हैं); वहाँ उद्धृत नारद सिंह, वृश्चिक और कुंभ भी छोड़ते हैं। हर समय ऐसा कम से कम एक घटी का हिस्सा है; जिस दिन ऐसा कोई हिस्सा नहीं, वह दिन बंद है।
क्षय तिथि में कभी नहीं — वह तिथि जो यहाँ किसी सूर्योदय पर न हो (मुहूर्त चिंतामणि, संस्कार प्रकरण)।
दिन के नक्षत्र के वर्ज्य काल में कभी नहीं — उसकी त्याज्य घटियाँ: ग्रंथ हर नक्षत्र के लिए जितनी घटी बताता है, उसके बाद की चार घटी, नक्षत्र की अपनी अवधि के अनुपात में (अश्विनी में 50 के बाद, पुनर्वसु में 30 के बाद, पुष्य और चित्रा में 20 के बाद, मूल में 56 के बाद, इत्यादि — मुहूर्त चिंतामणि, विवाह प्रकरण: हर शुभ कार्य में वर्जित)। मिलाए गए दिनों पर आज के एक पंचांग के संस्कार टूल ने पुनर्वसु और पुष्य में यही समय छिपाया, और अश्विनी और चित्रा में एक घटी बाद से; बलवान चंद्रमा वाला अपवाद, जो टीका उद्धृत करती है, नहीं लगाया गया।
संक्रांति या ग्रहण के दिन कभी नहीं: मुहूर्त चिंतामणि के संस्कार प्रकरण में उद्धृत गर्ग तब कोई शुभ काम नहीं करने देते, "समय आ जाने पर भी"। प्रचलित मत संक्रांति का पुण्य दिन वैसे छोड़ता है जैसे छपे पंचांग गिनते हैं — सूर्य सूर्यास्त के बाद राशि बदले तो अगला दिन; कड़ा मत राशि-प्रवेश वाला दिन भी छोड़ता है।
भद्रा (विष्टि करण) नहीं: इसे पूरा टाला गया है। इसके वास और पुच्छ के बारीक नियम नहीं लगाए गए, इसलिए यह सूची उन पंचांगों से कड़ी है जो उन्हें लगाते हैं।
योग: व्यतिपात या वैधृति कभी नहीं; बाक़ी अशुभ योगों का केवल आरंभ का भाग हटाया गया — विष्कम्भ 5 घटी, अतिगण्ड 6 घटी, शूल 7 घटी, गण्ड 6 घटी, व्याघात 9 घटी, वज्र 9 घटी, परिघ का पहला आधा (एक घटी = 24 मिनट; मुहूर्त चिंतामणि, शुभाशुभ प्रकरण)।
गंडांत: आश्लेषा, ज्येष्ठा और रेवती का अंतिम चरण और मघा, मूल और अश्विनी का पहला चरण हटाया गया (कालप्रकाशिका; मुहूर्त चिंतामणि इसे अपने विवाह प्रकरण में कहता है)।
राहु काल, यमगंड और गुलिक — वार के हिसाब से दिन के आठवें भाग — मुहूर्त के हर समय से हटाए गए (दक्षिण भारतीय परंपरा, कालप्रकाशिका)। कालप्रकाशिका ख़ुद गुलिक को अशुभ नहीं मानती; कई पंचांगों की तरह ये सूचियाँ उसे फिर भी हटाती हैं, इसलिए यहाँ ये थोड़ी कड़ी हैं।
हर समय में कम से कम एक घटी (24 मिनट) शुद्ध होनी चाहिए, और एक दिन में ज़्यादा से ज़्यादा तीन समय दिखाए गए हैं।
श्रेणी: "बहुत अच्छा", "अच्छा" और "सामान्य" नक्षत्र की श्रेणी, पसंदीदा वार (सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार) और शुक्ल पक्ष से बना मोटा क्रम है — कोई संभावना नहीं।
कड़ा मत क्या जोड़ता है
सिंहस्थ गुरु: गुरु मघा या पूर्वाफाल्गुनी के पहले चरण में हो तो कर्णवेध (कान छेदन) हर जगह वर्जित; सिंह के बाक़ी भाग में हो तो गंगा और गोदावरी के बीच और गुजरात, बंगाल व ओडिशा में वर्जित (नई दिल्ली भी इसी में आता है); सूर्य के मेष में रहते यह नियम नहीं लगता (मुहूर्त चिंतामणि, शुभाशुभ प्रकरण, और धर्मसिंधु)।
मकर गुरु: गुरु मकर में — केवल कोंकण, मगध, बंगाल और सिंध में वर्जित; नई दिल्ली में नहीं।
शुक्र या गुरु के अस्त होने से पहले के 7 दिन और उदय के बाद के 7 दिन (वृद्ध और बाल्य — धर्मसिंधु का मध्यम मत)।
चैत्र और पौष का चांद्र मास (मुहूर्त चिंतामणि, संस्कार प्रकरण)।
लग्न के आठवें भाव में राहु और केतु की भी गिनती: ग्रंथ आठवाँ भाव ख़ाली चाहते हैं, और कड़ा मत उसे नौ ग्रहों से पढ़ता है, जबकि छपे पंचांग और प्रचलित मत सात ग्रह गिनते हैं।
सूर्य के राशि-प्रवेश वाला दिन भी, उस पुण्य दिन के अलावा जिसे प्रचलित मत छोड़ता है (मुहूर्त चिंतामणि के संस्कार प्रकरण में उद्धृत गर्ग)।
होलाष्टक, फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से पूर्णिमा तक: मुहूर्त चिंतामणि (शुभाशुभ प्रकरण, शीघ्रबोध के हवाले से) इसे केवल ब्यास, रावी और सतलुज के क्षेत्र और पुष्कर में मानता है; नई दिल्ली में नहीं।
जो इन सूचियों में नहीं, वह आपके हाथ में
बच्चे की कुंडली और ठीक पल: दोनों मत केवल वे समय रखते हैं जिनका लग्न ऊपर के नियमों पर खरा है, किसी की जन्म कुंडली देखे बिना। लग्न के जो नियम बच्चे की अपनी कुंडली पढ़ते हैं — बच्चे की जन्म राशि या लग्न से आठवीं राशि का लग्न कभी नहीं — और नवांश, पंडित जी पर छोड़े गए हैं, या व्यक्तिगत मुहूर्त पर, जो बच्चे की कुंडली पढ़ता है।
बच्चा: आपके परिवार की परंपरा वाली उम्र, बच्चे का अपना तारा बल और चंद्र बल, और बच्चे का जन्म मास किसी सार्वजनिक सूची को पता नहीं होते।
बच्चे का जन्म नक्षत्र (जन्म तारा), जिसे ग्रंथ कान छेदन के लिए मना करता है, यहाँ नहीं देखा गया।
ग्रहण पृथ्वी पर कहीं भी दिखे, गिना गया है (कड़ा पाठ); वृद्धि तिथि, तिथि गंडांत, दग्ध और विष तिथि-वार योग, चंद्र बल का वेध, तिथि और वार की वे विष घटियाँ जो टीका दैवज्ञ मनोहर से उद्धृत करती है, और वर्ज्य काल का वह अपवाद जो टीका बलवान चंद्रमा के लिए देती है, किसी मत में नहीं लगाए गए।
इस पेज पर बताए नियमों के अलावा परिवार और स्थान की परंपराएँ।
अपने शहर या अपनी तारीख़ों के लिए
नक्षत्र या तिथि हर जगह एक ही पल बदलती है, पर हर जगह का सूर्योदय, सूर्यास्त और राहु काल अपना होता है, इसलिए दूसरे शहर का समय कुछ मिनट आगे-पीछे होता है, और बदलाव के पास वाला दिन छूट या जुड़ सकता है। मुहूर्त खोजक आपके शहर और आपकी तारीख़ों के लिए कर्णवेध की सूची के दोनों मत निकालता है, एक बार में तीन महीने तक, और उसके नतीजों में नीचे वाली व्यक्तिगत जाँच भी मिलती है। किसी महीने से शुरू करें:
कुंडली से व्यक्तिगत मुहूर्त
सबके लिए बनी सूची बच्चे के अपने नक्षत्र या आपके परिवार की परंपरा वाली उम्र नहीं देख सकती। मुहूर्त चिंतामणि का गोचर प्रकरण दो व्यक्तिगत जाँचें जोड़ता है: तारा बल, यानी जन्म नक्षत्र से गिना गया दिन का नक्षत्र, और चंद्र बल, यानी जन्म राशि से गिनी गई चंद्रमा की राशि। जो दिन आम तौर पर अच्छा है, वह किसी एक व्यक्ति के लिए कमज़ोर हो सकता है।
व्यक्तिगत कर्णवेध मुहूर्त बच्चे की सहेजी हुई कुंडली पढ़ता है: हर दिन का तारा बल और चंद्र बल, आपके परिवार की परंपरा वाली उम्र, हर समय के भीतर इस काम के लिए ठीक लग्न का समय, एक मुहूर्त पत्र (पीडीएफ़) और रिमाइंडर। पूरे काम के लिए 101 सिक्के: भुगतान से पहले आप देखते हैं कि बच्चे की कुंडली की जाँच से पहले कितने दिन खुले हैं, और अगर कोई दिन बच्चे की कुंडली के अनुसार शुद्ध न निकले, तो कुछ नहीं कटता। या एक तारीख़ जाँचने के लिए 50 सिक्के — ये उसके जवाब के लिए हैं, तारीख़ शुद्ध निकले या नहीं।
या इस सूची की किसी एक तारीख़ के बारे में AI ज्योतिषी से पूछें: वह आपकी कुंडली में दर्ज स्थान के लिए दिन पढ़ता है और अपने जवाब के पीछे का नियम बताता है।
साइन इन करें, फिर बच्चे की कुंडली चुनें या जोड़ें, और शहर।
किसी तारीख़ को कुंडली से जाँचें
तारीख़ और काम लिखें। अगली स्क्रीन पर साइन इन करें और जन्म विवरण एक बार जोड़ें — आपका सवाल चैट में इंतज़ार करेगा।
नई दिल्ली के लिए प्रचलित मत में 17 दिन और कड़े मत में 7 दिन। सबसे ज़्यादा दिन जनवरी (3), मई (3) और नवंबर (3) में हैं। मार्च और अगस्त से अक्टूबर में कोई दिन नहीं। इस पेज पर हर तारीख़ का समय IST में दिया है।
कर्णवेध (कान छेदन) कब होता है?
मुहूर्त चिंतामणि का संस्कार प्रकरण जन्म का 12वाँ या 16वाँ दिन, छठा, सातवाँ या आठवाँ महीना, या कोई विषम वर्ष बताता है; छपे पंचांग 10वाँ दिन भी जोड़ते हैं। बच्चे के जन्म मास या सम वर्ष में नहीं। सार्वजनिक सूची बच्चे की उम्र नहीं जानती, इसलिए उम्र से मेल खाने वाली तारीख़ चुनें; व्यक्तिगत मुहूर्त आपके परिवार का महीना या वर्ष लेता है।
2027 में मार्च में और अगस्त से अक्टूबर तक कर्णवेध की कोई तारीख़ क्यों नहीं है?
छपे पंचांगों की तरह खरमास छोड़ा गया है — सूर्य मीन में 15 मार्च 2027, 07:00 से 14 अप्रैल 2027, 15:28 तक (IST)। चातुर्मास 13 जुलाई 2027, 12:09 से 10 नवंबर 2027, 09:11 तक (IST) रहता है। शुक्र 6 जुलाई 2027, 20:42 से 17 सितंबर 2027, 22:48 तक और गुरु 16 अगस्त 2027, 19:42 से 15 सितंबर 2027, 03:12 तक (IST) अस्त हैं। उन महीनों के बाक़ी दिनों में कोई दिन अपनी जाँच — नक्षत्र, तिथि, वार, योग या करण — में शुद्ध नहीं निकलता। इसलिए उन महीनों में किसी भी सूची में कोई दिन नहीं।
2027 में कड़े मत में कर्णवेध के दिन कम क्यों हैं?
वह चैत्र और पौष के चांद्र मास भी छोड़ता है (मुहूर्त चिंतामणि) और सिंहस्थ गुरु व अस्त के आसपास के दिन भी लगाता है, जिन्हें कई पंचांग नहीं लगाते। कड़ा मत इनमें से 10 दिन छोड़ता है: सिंहस्थ गुरु से 6, मास के नियम से 4 और अस्त के आसपास के दिनों से 1 (एक दिन दो नियमों में भी आ सकता है)।
क्या खरमास या चातुर्मास में कर्णवेध हो सकता है?
किसी भी मत में नहीं: छपे पंचांग कान छेदन के लिए खरमास (सूर्य धनु या मीन में) और चातुर्मास छोड़ते हैं, और मुहूर्त चिंतामणि हरिशयन का नाम लेता है। शुक्र या गुरु का अस्त भी इसे रोकता है, क्योंकि कर्णवेध ग्रंथ की अस्त वाली सूची में है।
क्या कर्णवेध की ये तारीख़ें मेरे शहर के लिए भी यही हैं?
ज़्यादातर, पर मिनट तक नहीं। नक्षत्र या तिथि हर जगह एक ही पल बदलती है, पर सूर्योदय, सूर्यास्त और राहु काल स्थानीय हैं, इसलिए दूसरे शहर का समय कुछ मिनट आगे-पीछे शुरू और ख़त्म होता है, और जहाँ कोई बदलाव समय के किनारे के पास पड़ता है, वहाँ कोई दिन छूट या जुड़ सकता है। कड़ा मत कुछ नियम क्षेत्र के अनुसार भी पढ़ता है: सिंह का बाक़ी भाग, मकर गुरु और होलाष्टक। मुहूर्त खोजक आपके शहर के लिए दोनों मत निकालता है।