2027 में नई दिल्ली के लिए भूमि पूजन मुहूर्त के 33 दिन हैं। यह प्रचलित मत है: भूमि पूजन के लिए ग्रंथों के मुख्य नियम। ग्रंथों के कड़े मत में इनमें से 8 दिन हैं। कोई भी मत लग्न नहीं देखता। कड़ा मत इनमें से 25 दिन छोड़ता है: श्रीपति के मासों से 20, सिंहस्थ गुरु से 11, पंचक से 8 और संक्रांति के नियम से 2 (एक दिन दो नियमों में भी आ सकता है)। वह 1 और दिन का समय भी छोटा करता है। सबसे ज़्यादा दिन नवंबर (11), फ़रवरी (7) और मई (7) में हैं; जनवरी, अप्रैल और जून से अक्टूबर में कोई दिन नहीं। व्यक्तिगत मुहूर्त आपके प्लॉट का मुख और आपके परिवार की परंपरा भी देखता है।
प्रचलित मत
33 दिन (8 फ़रवरी – 13 दिसंबर)
कड़ा मत
8 दिन (8 मई – 13 दिसंबर)
सबसे ज़्यादा दिन
नवंबर (11), फ़रवरी (7) और मई (7)
कोई दिन नहीं
जनवरी, अप्रैल और जून से अक्टूबर
मास
मार्गशीर्ष, फाल्गुन, वैशाख, माघ, श्रावण या कार्तिक; सूर्य मिथुन, कन्या, धनु या मीन में नहीं
समय
IST, सूर्योदय से सूर्यास्त
नई दिल्ली (28.61° उ., 77.21° पू.) के लिए IST में, Swiss Ephemeris और लाहिड़ी अयनांश से गणना — किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का फ़र्क़ होता है। कोई भी मत लग्न नहीं देखता; यह सूची दूसरी सूचियों से कैसे मिलती है, यह नीचे है।
2027 की सभी 33 तारीख़ें एक नज़र में
प्रचलित मत की तारीख़ें महीनेवार, और कड़ा मत उनमें से क्या रखता है। हर तारीख़ का समय नीचे के कार्डों में है।
जनवरी: किसी भी मत में कोई दिन नहीं
फ़रवरी: 8, 11, 19, 22, 25, 26 और 27 (7 दिन); कड़ा मत इनमें से कोई नहीं रखता
मार्च: 4, 6, 10 और 15 (4 दिन); कड़ा मत इनमें से कोई नहीं रखता
अप्रैल: किसी भी मत में कोई दिन नहीं
मई: 8, 12, 15, 17, 20, 27 और 31 (7 दिन); कड़ा मत 15 और 31 मई छोड़ता है
जून: किसी भी मत में कोई दिन नहीं
जुलाई: किसी भी मत में कोई दिन नहीं
अगस्त: किसी भी मत में कोई दिन नहीं
सितंबर: किसी भी मत में कोई दिन नहीं
अक्टूबर: किसी भी मत में कोई दिन नहीं
नवंबर: 1, 4, 5, 8, 10, 11, 15, 19, 24, 25 और 26 (11 दिन); कड़ा मत इनमें से कोई नहीं रखता
दिसंबर: 2, 4, 9 और 13 (4 दिन); कड़ा मत 9 दिसंबर छोड़ता है
प्रचलित मत 2027 में 25 दिनों को "बहुत अच्छा" मानता है, सबसे ज़्यादा नवंबर (8) और मई (6) में; हर कार्ड पर उसकी श्रेणी लिखी है।
शनिवार को: 27 फ़रवरी; 6 मार्च; 8 और 15 मई; 4 दिसंबर — कुल 33 दिनों में से 5।
वार के अनुसार: सोमवार को 9, बुधवार को 4, गुरुवार को 10, शुक्रवार को 5 और शनिवार को 5; पक्ष के अनुसार, शुक्ल पक्ष में 20 और कृष्ण पक्ष में 13 (पहले समय की तिथि से)।
दो मत, दो सूचियाँ
ग्रंथ भूमि पूजन के लिए मुख्य नियम और कुछ और सावधानियाँ भी देते हैं, इसलिए यह पेज दो सूचियाँ देता है। प्रचलित मत: भूमि पूजन के लिए ग्रंथों के मुख्य नियम। कड़ा मत उन्हीं समयों से शुरू होकर ये भी लगाता है: सिंहस्थ गुरु और मकर गुरु (क्षेत्र के अनुसार), शुक्र या गुरु के अस्त होने से पहले और उदय के बाद के 7-7 दिन, केवल श्रीपति के सूर्य-राशि और मास वाले जोड़े, पंचक नहीं और हर संक्रांति के दोनों ओर 16 घटी (6 घंटे 24 मिनट)। कड़े मत का हर समय प्रचलित मत के किसी समय के भीतर होता है, इसलिए कड़ी सूची उसी सूची का छोटा रूप है, कोई अलग सूची नहीं।
सबसे बड़ा फ़र्क़ सिंहस्थ गुरु का है, यानी गुरु का सिंह राशि में होना: मुहूर्त चिंतामणि भूमि पूजन (नींव) को उन कामों में गिनता है जो इसमें नहीं किए जाते, और कई पंचांग यह नियम नहीं लगाते। गुरु 31 अक्टूबर 2026, 12:02 से 25 जनवरी 2027, 01:31 तक और 26 जून 2027, 05:18 से 15 सितंबर 2027, 09:56 तक (IST) मघा या पूर्वाफाल्गुनी के पहले चरण में है — ग्रंथ इसे हर क्षेत्र में वर्जित मानते हैं; 15 सितंबर 2027, 09:56 से 26 नवंबर 2027, 18:45 तक (IST) वह सिंह के बाक़ी भाग में है — इसे वे नई दिल्ली में भी वर्जित मानते हैं। सिंहस्थ गुरु की गाइड यह नियम और इसके क्षेत्र समझाती है, और खरमास 2026–27 सूर्य के धनु और मीन वाले दो महीनों के बारे में बताता है।
कौन-सी सूची मानें, यह परिवार का फ़ैसला है। आपका परिवार ग्रंथों को कड़ाई से मानता है तो कड़ा मत देखें; उनके मुख्य नियम मानता है तो प्रचलित मत। मुहूर्त की तारीख़ें अलग क्यों होती हैं में दो पंचांगों के अलग होने के बाक़ी कारण हैं।
यह साइट अपने प्रचलित मत को जिस पंचांग से मिलाती है, वह भूमि पूजन की कोई सालाना सूची नहीं देता; इसलिए दोनों मत सीधे मुहूर्त चिंतामणि के वास्तु प्रकरण और उसमें उद्धृत आचार्यों के नियम लगाते हैं। एक बहुपठित वेबसाइट की 2027 की सूची में 17 दिन हैं, जिनमें कई उसके अपने बताए महीनों और नक्षत्रों से बाहर हैं: इनमें से 9 इस प्रचलित मत में हैं, और बाक़ी 8 में से हर दिन यहाँ ग्रंथ के कम से कम एक नियम से बंद है — महीना या सूर्य की राशि (5 दिन; जून और जुलाई वाले दिन ऐसे महीनों में हैं जो न नारद देते हैं न बी.वी. रमन), नक्षत्र (5), भद्रा (2), कोई योग, ग्रंथ में न दी गई तिथि, या अस्त शुक्र।
भूमि पूजन की तारीख़ें 2027: महीनेवार
हर तारीख़ के साथ नई दिल्ली के लिए मुहूर्त का समय (IST), उस समय के नक्षत्र और तिथि, और एक श्रेणी दी है। जिस दिन कड़ा मत समय छोटा करता है या दिन बंद करता है, उस कार्ड पर यह लिखा है; जहाँ कुछ नहीं लिखा, वहाँ दोनों मत एक हैं। एक बार में एक सूची देखने के लिए मत चुनें।
सूची का हर दिन नियमों के अनुसार शुद्ध है। "बहुत अच्छा", "अच्छा" और "सामान्य" शास्त्रीय बातों (जैसे नक्षत्र, वार, शुक्ल पक्ष) से बना मोटा क्रम है — कोई संभावना या गारंटी नहीं।
जनवरी 2027 0 दिन
प्रचलित मत: इस महीने कोई मुहूर्त नहीं — मुख्य कारण: अनुपयुक्त महीना (24 दिन), अनुपयुक्त सूर्य राशि (14 दिन), अनुपयुक्त नक्षत्र (18 दिन)।
कड़ा मत: इसमें भी कोई नहीं।
फ़रवरी 2027 7 दिन
कड़ा मत: इस महीने कोई मुहूर्त नहीं — प्रचलित मत के 7 दिन इसके नियमों से बंद हैं: निर्माण के लिए अनुपयुक्त महीना (7 दिन), पंचक (2 दिन)।
सोमवार, 8 फ़रवरी
बहुत अच्छा
09:51–11:12
12:36–13:58
15:21–18:05
नक्षत्र: शतभिषा तिथि: शुक्ल द्वितीया
कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं
पंचक (चंद्रमा धनिष्ठा के उत्तरार्ध से रेवती तक) — भूमि पूजन के लिए वर्जित मुहूर्त चिंतामणि, वास्तु प्रकरण (हिंदी टीका)
माघ में सूर्य मकर में — भवन आरंभ के लिए श्रीपति के बताए मास-राशि जोड़ों में नहीं श्रीपति (मुहूर्त चिंतामणि के वास्तु प्रकरण में उद्धृत)
गुरुवार, 11 फ़रवरी
बहुत अच्छा
08:26–09:49
11:13–13:58
15:22–18:08
नक्षत्र: रेवती तिथि: शुक्ल पंचमी
कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं
पंचक (चंद्रमा धनिष्ठा के उत्तरार्ध से रेवती तक) — भूमि पूजन के लिए वर्जित मुहूर्त चिंतामणि, वास्तु प्रकरण (हिंदी टीका)
माघ में सूर्य मकर में — भवन आरंभ के लिए श्रीपति के बताए मास-राशि जोड़ों में नहीं श्रीपति (मुहूर्त चिंतामणि के वास्तु प्रकरण में उद्धृत)
शुक्रवार, 19 फ़रवरी
बहुत अच्छा
06:57–08:20
09:46–11:10
नक्षत्र: पुष्य तिथि: शुक्ल त्रयोदशी
कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं
माघ में सूर्य कुंभ में — भवन आरंभ के लिए श्रीपति के बताए मास-राशि जोड़ों में नहीं श्रीपति (मुहूर्त चिंतामणि के वास्तु प्रकरण में उद्धृत)
सोमवार, 22 फ़रवरी
बहुत अच्छा
12:35–14:00
15:26–18:16
नक्षत्र: उत्तराफाल्गुनी तिथि: कृष्ण द्वितीया
कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं
माघ में सूर्य कुंभ में — भवन आरंभ के लिए श्रीपति के बताए मास-राशि जोड़ों में नहीं श्रीपति (मुहूर्त चिंतामणि के वास्तु प्रकरण में उद्धृत)
गुरुवार, 25 फ़रवरी
बहुत अच्छा
08:17–09:33
11:09–14:00 अच्छा
15:27–18:18 अच्छा
नक्षत्र: चित्रा, स्वाती तिथि: कृष्ण पंचमी
कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं
माघ में सूर्य कुंभ में — भवन आरंभ के लिए श्रीपति के बताए मास-राशि जोड़ों में नहीं श्रीपति (मुहूर्त चिंतामणि के वास्तु प्रकरण में उद्धृत)
शुक्रवार, 26 फ़रवरी
अच्छा
06:50–08:15
09:42–10:13
नक्षत्र: स्वाती तिथि: कृष्ण षष्ठी
कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं
माघ में सूर्य कुंभ में — भवन आरंभ के लिए श्रीपति के बताए मास-राशि जोड़ों में नहीं श्रीपति (मुहूर्त चिंतामणि के वास्तु प्रकरण में उद्धृत)
शनिवार, 27 फ़रवरी
अच्छा
11:41–14:00
15:27–18:19
नक्षत्र: अनुराधा तिथि: कृष्ण सप्तमी
कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं
माघ में सूर्य कुंभ में — भवन आरंभ के लिए श्रीपति के बताए मास-राशि जोड़ों में नहीं श्रीपति (मुहूर्त चिंतामणि के वास्तु प्रकरण में उद्धृत)
मार्च 2027 4 दिन
कड़ा मत: इस महीने कोई मुहूर्त नहीं — प्रचलित मत के 4 दिन इसके नियमों से बंद हैं: निर्माण के लिए अनुपयुक्त महीना (2 दिन), संक्रांति के घंटे (1 दिन), पंचक (1 दिन)।
गुरुवार, 4 मार्च
बहुत अच्छा
08:11–09:38
11:06–14:00
15:28–18:22
नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा तिथि: कृष्ण द्वादशी
कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं
माघ में सूर्य कुंभ में — भवन आरंभ के लिए श्रीपति के बताए मास-राशि जोड़ों में नहीं श्रीपति (मुहूर्त चिंतामणि के वास्तु प्रकरण में उद्धृत)
शनिवार, 6 मार्च
अच्छा
08:10–09:36
11:05–12:04
नक्षत्र: धनिष्ठा तिथि: कृष्ण त्रयोदशी
कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं
माघ में सूर्य कुंभ में — भवन आरंभ के लिए श्रीपति के बताए मास-राशि जोड़ों में नहीं श्रीपति (मुहूर्त चिंतामणि के वास्तु प्रकरण में उद्धृत)
बुधवार, 10 मार्च
बहुत अच्छा
06:37–08:05
09:35–11:03
14:01–18:26
नक्षत्र: उत्तराभाद्रपदा, रेवती तिथि: शुक्ल द्वितीया, शुक्ल तृतीया
कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं
पंचक (चंद्रमा धनिष्ठा के उत्तरार्ध से रेवती तक) — भूमि पूजन के लिए वर्जित मुहूर्त चिंतामणि, वास्तु प्रकरण (हिंदी टीका)
सोमवार, 15 मार्च
बहुत अच्छा
06:32–07:00
नक्षत्र: रोहिणी तिथि: शुक्ल सप्तमी
कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं
संक्रांति — सूर्य 15 मार्च को 07:00 पर मीन में; इसके दोनों ओर 16 घटी (6 घंटे 24 मिनट) वर्जित बी.वी. रमन, मुहूर्त
अप्रैल 2027 0 दिन
प्रचलित मत: इस महीने कोई मुहूर्त नहीं — मुख्य कारण: अनुपयुक्त महीना (24 दिन), अनुपयुक्त सूर्य राशि (14 दिन), अनुपयुक्त नक्षत्र (22 दिन)।
कड़ा मत: इसमें भी कोई नहीं।
मई 2027 7 दिन
शनिवार, 8 मई
बहुत अच्छा
08:16–08:56
10:38–13:58
15:40–19:00
नक्षत्र: रोहिणी तिथि: शुक्ल द्वितीया, शुक्ल तृतीया
बुधवार, 12 मई
बहुत अच्छा
05:33–07:13
08:56–10:36
14:00–14:56
नक्षत्र: पुष्य तिथि: शुक्ल सप्तमी
शनिवार, 15 मई
बहुत अच्छा
12:01–13:59
15:42–19:04
नक्षत्र: उत्तराफाल्गुनी तिथि: शुक्ल दशमी, शुक्ल एकादशी
कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं
संक्रांति — सूर्य 15 मई को 12:19 पर वृष में; इसके दोनों ओर 16 घटी (6 घंटे 24 मिनट) वर्जित बी.वी. रमन, मुहूर्त
सोमवार, 17 मई
बहुत अच्छा
05:30–07:11
12:18–13:59
15:42–19:06
नक्षत्र: हस्त, चित्रा तिथि: शुक्ल द्वादशी, शुक्ल त्रयोदशी
गुरुवार, 20 मई
बहुत अच्छा
13:22–14:00
15:43–16:29
नक्षत्र: अनुराधा तिथि: पूर्णिमा
गुरुवार, 27 मई
अच्छा
17:19–19:11
नक्षत्र: धनिष्ठा तिथि: कृष्ण सप्तमी
कड़ा मत: समय कम — 17:19–17:49
पंचक (चंद्रमा धनिष्ठा के उत्तरार्ध से रेवती तक) — भूमि पूजन के लिए वर्जित मुहूर्त चिंतामणि, वास्तु प्रकरण (हिंदी टीका)
सोमवार, 31 मई
बहुत अच्छा
10:03–10:35
12:19–14:02
15:47–19:14
नक्षत्र: उत्तराभाद्रपदा, रेवती तिथि: कृष्ण एकादशी
कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं
पंचक (चंद्रमा धनिष्ठा के उत्तरार्ध से रेवती तक) — भूमि पूजन के लिए वर्जित मुहूर्त चिंतामणि, वास्तु प्रकरण (हिंदी टीका)
जून 2027 0 दिन
प्रचलित मत: इस महीने कोई मुहूर्त नहीं — मुख्य कारण: अनुपयुक्त महीना (26 दिन), अनुपयुक्त सूर्य राशि (16 दिन), अनुपयुक्त नक्षत्र (20 दिन)।
कड़ा मत: इसमें भी कोई नहीं।
जुलाई 2027 0 दिन
प्रचलित मत: इस महीने कोई मुहूर्त नहीं — मुख्य कारण: अनुपयुक्त महीना (31 दिन), शुक्र या गुरु अस्त (26 दिन), अनुपयुक्त सूर्य राशि (17 दिन)।
कड़ा मत: इसमें भी कोई नहीं।
अगस्त 2027 0 दिन
प्रचलित मत: इस महीने कोई मुहूर्त नहीं — मुख्य कारण: शुक्र या गुरु अस्त (31 दिन), अनुपयुक्त नक्षत्र (23 दिन), वर्जित वार (10 दिन)।
कड़ा मत: इसमें भी कोई नहीं।
सितंबर 2027 0 दिन
प्रचलित मत: इस महीने कोई मुहूर्त नहीं — मुख्य कारण: अनुपयुक्त महीना (30 दिन), शुक्र या गुरु अस्त (17 दिन), अनुपयुक्त सूर्य राशि (14 दिन)।
कड़ा मत: इसमें भी कोई नहीं।
अक्टूबर 2027 0 दिन
प्रचलित मत: इस महीने कोई मुहूर्त नहीं — मुख्य कारण: अनुपयुक्त महीना (29 दिन), अनुपयुक्त सूर्य राशि (17 दिन), अनुपयुक्त नक्षत्र (18 दिन)।
कड़ा मत: इसमें भी कोई नहीं।
नवंबर 2027 11 दिन
कड़ा मत: इस महीने कोई मुहूर्त नहीं — प्रचलित मत के 11 दिन इसके नियमों से बंद हैं: सिंहस्थ गुरु (11 दिन), निर्माण के लिए अनुपयुक्त महीना (11 दिन), पंचक (3 दिन)।
सोमवार, 1 नवंबर
बहुत अच्छा
06:33–07:55
09:19–09:57
नक्षत्र: अनुराधा तिथि: शुक्ल तृतीया
कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं
सिंहस्थ गुरु — गुरु सिंह राशि में 16°40′ के बाद (इस क्षेत्र में वर्जित) मुहूर्त चिंतामणि, शुभाशुभ प्रकरण, और धर्मसिंधु
कार्तिक में सूर्य तुला में — भवन आरंभ के लिए श्रीपति के बताए मास-राशि जोड़ों में नहीं श्रीपति (मुहूर्त चिंतामणि के वास्तु प्रकरण में उद्धृत)
गुरुवार, 4 नवंबर
बहुत अच्छा
15:26–17:34
नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा तिथि: शुक्ल षष्ठी
कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं
सिंहस्थ गुरु — गुरु सिंह राशि में 16°40′ के बाद (इस क्षेत्र में वर्जित) मुहूर्त चिंतामणि, शुभाशुभ प्रकरण, और धर्मसिंधु
कार्तिक में सूर्य तुला में — भवन आरंभ के लिए श्रीपति के बताए मास-राशि जोड़ों में नहीं श्रीपति (मुहूर्त चिंतामणि के वास्तु प्रकरण में उद्धृत)
शुक्रवार, 5 नवंबर
बहुत अच्छा
06:36–07:57
09:21–10:42
12:05–14:49
नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा तिथि: शुक्ल सप्तमी
कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं
सिंहस्थ गुरु — गुरु सिंह राशि में 16°40′ के बाद (इस क्षेत्र में वर्जित) मुहूर्त चिंतामणि, शुभाशुभ प्रकरण, और धर्मसिंधु
कार्तिक में सूर्य तुला में — भवन आरंभ के लिए श्रीपति के बताए मास-राशि जोड़ों में नहीं श्रीपति (मुहूर्त चिंतामणि के वास्तु प्रकरण में उद्धृत)
सोमवार, 8 नवंबर
बहुत अच्छा
06:38–07:59
09:22–10:42
12:05–13:26
नक्षत्र: शतभिषा तिथि: शुक्ल दशमी
कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं
पंचक (चंद्रमा धनिष्ठा के उत्तरार्ध से रेवती तक) — भूमि पूजन के लिए वर्जित मुहूर्त चिंतामणि, वास्तु प्रकरण (हिंदी टीका)
सिंहस्थ गुरु — गुरु सिंह राशि में 16°40′ के बाद (इस क्षेत्र में वर्जित) मुहूर्त चिंतामणि, शुभाशुभ प्रकरण, और धर्मसिंधु
कार्तिक में सूर्य तुला में — भवन आरंभ के लिए श्रीपति के बताए मास-राशि जोड़ों में नहीं श्रीपति (मुहूर्त चिंतामणि के वास्तु प्रकरण में उद्धृत)
बुधवार, 10 नवंबर
बहुत अच्छा
09:23–10:43
13:27–17:30
नक्षत्र: उत्तराभाद्रपदा तिथि: शुक्ल द्वादशी
कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं
पंचक (चंद्रमा धनिष्ठा के उत्तरार्ध से रेवती तक) — भूमि पूजन के लिए वर्जित मुहूर्त चिंतामणि, वास्तु प्रकरण (हिंदी टीका)
सिंहस्थ गुरु — गुरु सिंह राशि में 16°40′ के बाद (इस क्षेत्र में वर्जित) मुहूर्त चिंतामणि, शुभाशुभ प्रकरण, और धर्मसिंधु
कार्तिक में सूर्य तुला में — भवन आरंभ के लिए श्रीपति के बताए मास-राशि जोड़ों में नहीं श्रीपति (मुहूर्त चिंतामणि के वास्तु प्रकरण में उद्धृत)
गुरुवार, 11 नवंबर
बहुत अच्छा
08:02–09:22
10:44–13:26
14:48–17:29
नक्षत्र: रेवती तिथि: शुक्ल द्वादशी, शुक्ल त्रयोदशी
कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं
पंचक (चंद्रमा धनिष्ठा के उत्तरार्ध से रेवती तक) — भूमि पूजन के लिए वर्जित मुहूर्त चिंतामणि, वास्तु प्रकरण (हिंदी टीका)
सिंहस्थ गुरु — गुरु सिंह राशि में 16°40′ के बाद (इस क्षेत्र में वर्जित) मुहूर्त चिंतामणि, शुभाशुभ प्रकरण, और धर्मसिंधु
कार्तिक में सूर्य तुला में — भवन आरंभ के लिए श्रीपति के बताए मास-राशि जोड़ों में नहीं श्रीपति (मुहूर्त चिंतामणि के वास्तु प्रकरण में उद्धृत)
सोमवार, 15 नवंबर
बहुत अच्छा
07:29–08:03
09:25–10:44
12:06–13:26
नक्षत्र: रोहिणी तिथि: कृष्ण द्वितीया
कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं
सिंहस्थ गुरु — गुरु सिंह राशि में 16°40′ के बाद (इस क्षेत्र में वर्जित) मुहूर्त चिंतामणि, शुभाशुभ प्रकरण, और धर्मसिंधु
कार्तिक में सूर्य तुला में — भवन आरंभ के लिए श्रीपति के बताए मास-राशि जोड़ों में नहीं श्रीपति (मुहूर्त चिंतामणि के वास्तु प्रकरण में उद्धृत)
शुक्रवार, 19 नवंबर
अच्छा
06:47–08:06
09:27–10:46
12:07–14:46
नक्षत्र: पुष्य तिथि: कृष्ण षष्ठी
कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं
सिंहस्थ गुरु — गुरु सिंह राशि में 16°40′ के बाद (इस क्षेत्र में वर्जित) मुहूर्त चिंतामणि, शुभाशुभ प्रकरण, और धर्मसिंधु
कार्तिक में सूर्य वृश्चिक में — भवन आरंभ के लिए श्रीपति के बताए मास-राशि जोड़ों में नहीं श्रीपति (मुहूर्त चिंतामणि के वास्तु प्रकरण में उद्धृत)
बुधवार, 24 नवंबर
अच्छा
06:51–08:09
09:29–10:48
13:27–17:24
नक्षत्र: हस्त तिथि: कृष्ण एकादशी, कृष्ण द्वादशी
कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं
सिंहस्थ गुरु — गुरु सिंह राशि में 16°40′ के बाद (इस क्षेत्र में वर्जित) मुहूर्त चिंतामणि, शुभाशुभ प्रकरण, और धर्मसिंधु
कार्तिक में सूर्य वृश्चिक में — भवन आरंभ के लिए श्रीपति के बताए मास-राशि जोड़ों में नहीं श्रीपति (मुहूर्त चिंतामणि के वास्तु प्रकरण में उद्धृत)
गुरुवार, 25 नवंबर
बहुत अच्छा
08:11–09:29
10:49–13:27
14:47–17:24
नक्षत्र: चित्रा तिथि: कृष्ण द्वादशी, कृष्ण त्रयोदशी
कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं
सिंहस्थ गुरु — गुरु सिंह राशि में 16°40′ के बाद (इस क्षेत्र में वर्जित) मुहूर्त चिंतामणि, शुभाशुभ प्रकरण, और धर्मसिंधु
कार्तिक में सूर्य वृश्चिक में — भवन आरंभ के लिए श्रीपति के बताए मास-राशि जोड़ों में नहीं श्रीपति (मुहूर्त चिंतामणि के वास्तु प्रकरण में उद्धृत)
शुक्रवार, 26 नवंबर
अच्छा
06:52–08:10
नक्षत्र: स्वाती तिथि: कृष्ण त्रयोदशी
कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं
सिंहस्थ गुरु — गुरु सिंह राशि में 16°40′ के बाद (इस क्षेत्र में वर्जित) मुहूर्त चिंतामणि, शुभाशुभ प्रकरण, और धर्मसिंधु
कार्तिक में सूर्य वृश्चिक में — भवन आरंभ के लिए श्रीपति के बताए मास-राशि जोड़ों में नहीं श्रीपति (मुहूर्त चिंतामणि के वास्तु प्रकरण में उद्धृत)
दिसंबर 2027 4 दिन
गुरुवार, 2 दिसंबर
बहुत अच्छा
14:48–17:24
नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा तिथि: शुक्ल पंचमी
शनिवार, 4 दिसंबर
अच्छा
08:17–09:34
10:53–13:29
14:48–17:24
नक्षत्र: धनिष्ठा तिथि: शुक्ल षष्ठी
गुरुवार, 9 दिसंबर
बहुत अच्छा
08:20–09:37
नक्षत्र: रेवती तिथि: शुक्ल एकादशी
कड़ा मत: कोई मुहूर्त नहीं
पंचक (चंद्रमा धनिष्ठा के उत्तरार्ध से रेवती तक) — भूमि पूजन के लिए वर्जित मुहूर्त चिंतामणि, वास्तु प्रकरण (हिंदी टीका)
सोमवार, 13 दिसंबर
बहुत अच्छा
12:16–13:32
14:51–17:25
नक्षत्र: रोहिणी, मृगशिरा तिथि: पूर्णिमा
2027 में भूमि पूजन के लिए बंद अवधियाँ
ये अवधियाँ नई दिल्ली में भूमि पूजन (नींव) रोकती हैं; इनका समय पंचांग गणना से मिनट तक निकाला गया है (IST)। "दोनों मत" का अर्थ है कि इस पेज की हर सूची इन्हें छोड़ती है; "कड़ा मत" का अर्थ है कि केवल कड़ी सूची।
सिंहस्थ गुरु: गुरु मघा या पूर्वाफाल्गुनी के पहले चरण में कड़ा मत
31 अक्टूबर 2026, 12:02 – 25 जनवरी 2027, 01:31
गुरु मघा या पूर्वाफाल्गुनी के पहले चरण में: कड़ा मत भूमि पूजन (नींव) हर क्षेत्र में वर्जित मानता है, केवल सूर्य के मेष में रहते नहीं (मुहूर्त चिंतामणि, शुभाशुभ प्रकरण, और धर्मसिंधु)।
सूर्य धनु में दोनों मत
16 दिसंबर 2026, 10:25 से 14 जनवरी 2027, 21:10 तक
मुहूर्त चिंतामणि के वास्तु प्रकरण में उद्धृत नारद घर शुरू करने के लिए सूर्य के मिथुन, कन्या, धनु या मीन में रहने का समय छोड़ते हैं।
सूर्य मीन में दोनों मत
15 मार्च 2027, 07:00 से 14 अप्रैल 2027, 15:28 तक
मुहूर्त चिंतामणि के वास्तु प्रकरण में उद्धृत नारद घर शुरू करने के लिए सूर्य के मिथुन, कन्या, धनु या मीन में रहने का समय छोड़ते हैं।
सूर्य मिथुन में दोनों मत
15 जून 2027, 18:55 से 17 जुलाई 2027, 05:48 तक
मुहूर्त चिंतामणि के वास्तु प्रकरण में उद्धृत नारद घर शुरू करने के लिए सूर्य के मिथुन, कन्या, धनु या मीन में रहने का समय छोड़ते हैं।
सिंहस्थ गुरु: गुरु मघा या पूर्वाफाल्गुनी के पहले चरण में कड़ा मत
26 जून 2027, 05:18 – 15 सितंबर 2027, 09:56
गुरु मघा या पूर्वाफाल्गुनी के पहले चरण में: कड़ा मत भूमि पूजन (नींव) हर क्षेत्र में वर्जित मानता है, केवल सूर्य के मेष में रहते नहीं (मुहूर्त चिंतामणि, शुभाशुभ प्रकरण, और धर्मसिंधु)।
शुक्र वृद्ध (अस्त से पहले) कड़ा मत
29 जून 2027, 20:42 – 6 जुलाई 2027, 20:42
ग्रह के अस्त होने से पहले के 7 दिन (वृद्ध — धर्मसिंधु का मध्यम मत): केवल कड़ा मत।
शुक्र अस्त दोनों मत
6 जुलाई 2027, 20:42 – 17 सितंबर 2027, 22:48
सूर्य सिद्धांत के अंशों से शुक्र अस्त है (10°, वक्री होने पर 8°): दोनों मत भूमि पूजन (नींव) वर्जित मानते हैं — मुहूर्त चिंतामणि का शुभाशुभ प्रकरण इसे अस्त से दूर रखे जाने वाले कामों में गिनाता है। जो पंचांग ग्रह के दिखने से अस्त गिनते हैं, उनमें कुछ दिनों का फ़र्क़ हो सकता है।
गुरु वृद्ध (अस्त से पहले) कड़ा मत
9 अगस्त 2027, 19:42 – 16 अगस्त 2027, 19:42
ग्रह के अस्त होने से पहले के 7 दिन (वृद्ध — धर्मसिंधु का मध्यम मत): केवल कड़ा मत।
गुरु अस्त दोनों मत
16 अगस्त 2027, 19:42 – 15 सितंबर 2027, 03:12
सूर्य सिद्धांत के अंशों से गुरु अस्त है (11°): दोनों मत भूमि पूजन (नींव) वर्जित मानते हैं।
गुरु बाल्य (उदय के बाद) कड़ा मत
15 सितंबर 2027, 03:12 – 22 सितंबर 2027, 03:12
ग्रह के फिर उदय होने के बाद के 7 दिन (बाल्य — धर्मसिंधु का मध्यम मत): केवल कड़ा मत।
सिंहस्थ गुरु: गुरु सिंह के बाक़ी भाग में (क्षेत्रीय) कड़ा मत
15 सितंबर 2027, 09:56 – 26 नवंबर 2027, 18:45
गुरु सिंह के बाक़ी भाग में: कड़ा मत भूमि पूजन (नींव) गंगा और गोदावरी के बीच और गुजरात, बंगाल व ओडिशा में वर्जित मानता है; नई दिल्ली भी इसी में आता है।
सूर्य कन्या में दोनों मत
17 सितंबर 2027, 14:10 से 18 अक्टूबर 2027, 02:08 तक
मुहूर्त चिंतामणि के वास्तु प्रकरण में उद्धृत नारद घर शुरू करने के लिए सूर्य के मिथुन, कन्या, धनु या मीन में रहने का समय छोड़ते हैं।
शुक्र बाल्य (उदय के बाद) कड़ा मत
17 सितंबर 2027, 22:48 – 24 सितंबर 2027, 22:48
ग्रह के फिर उदय होने के बाद के 7 दिन (बाल्य — धर्मसिंधु का मध्यम मत): केवल कड़ा मत।
सूर्य धनु में दोनों मत
16 दिसंबर 2027, 16:38 से 15 जनवरी 2028, 03:24 तक
मुहूर्त चिंतामणि के वास्तु प्रकरण में उद्धृत नारद घर शुरू करने के लिए सूर्य के मिथुन, कन्या, धनु या मीन में रहने का समय छोड़ते हैं।
संक्रांतियाँ: सूर्य का हर राशि में प्रवेश
कड़ा मत सूर्य के राशि में आने के पल के दोनों ओर 16 घटी (6 घंटे 24 मिनट) टालता है (बी.वी. रमन, मुहूर्त)। 2027 की संक्रांतियाँ, नई दिल्ली के लिए, IST में:
मकर: सूर्य का प्रवेश 14 जनवरी 2027, 21:10; वर्जित 14 जनवरी 2027, 14:46 – 15 जनवरी 2027, 03:34
कुंभ: सूर्य का प्रवेश 13 फ़रवरी 2027, 10:09; वर्जित 13 फ़रवरी 2027, 03:45–16:33
मीन: सूर्य का प्रवेश 15 मार्च 2027, 07:00; वर्जित 15 मार्च 2027, 00:36–13:24
मेष: सूर्य का प्रवेश 14 अप्रैल 2027, 15:28; वर्जित 14 अप्रैल 2027, 09:04–21:52
वृष: सूर्य का प्रवेश 15 मई 2027, 12:19; वर्जित 15 मई 2027, 05:55–18:43
मिथुन: सूर्य का प्रवेश 15 जून 2027, 18:55; वर्जित 15 जून 2027, 12:31 – 16 जून 2027, 01:19
कर्क: सूर्य का प्रवेश 17 जुलाई 2027, 05:48; वर्जित 16 जुलाई 2027, 23:24 – 17 जुलाई 2027, 12:12
सिंह: सूर्य का प्रवेश 17 अगस्त 2027, 14:13; वर्जित 17 अगस्त 2027, 07:49–20:37
कन्या: सूर्य का प्रवेश 17 सितंबर 2027, 14:10; वर्जित 17 सितंबर 2027, 07:46–20:34
तुला: सूर्य का प्रवेश 18 अक्टूबर 2027, 02:08; वर्जित 17 अक्टूबर 2027, 19:44 – 18 अक्टूबर 2027, 08:32
वृश्चिक: सूर्य का प्रवेश 17 नवंबर 2027, 01:58; वर्जित 16 नवंबर 2027, 19:34 – 17 नवंबर 2027, 08:22
धनु: सूर्य का प्रवेश 16 दिसंबर 2027, 16:38; वर्जित 16 दिसंबर 2027, 10:14–23:02
नई दिल्ली में कोई भी सूची इन अवधियों के कारण भूमि पूजन (नींव) नहीं रोकती। जिन ग्रंथों पर ये सूचियाँ चलती हैं, उनमें चातुर्मास निर्माण का नियम नहीं (बहुत-से परिवार परंपरा से रुकते हैं); होलाष्टक को मुहूर्त चिंतामणि केवल ब्यास, रावी और सतलुज के क्षेत्र और पुष्कर में मानता है। अगर आपका परिवार इनमें से कोई मानता है, तो वे तारीख़ें छोड़ दें (IST):
चातुर्मास: 13 जुलाई 2027, 12:09 – 10 नवंबर 2027, 09:11 — इस सूची में इसके 4 दिन हैं: 1, 4, 5 और 8 नवंबर
होलाष्टक: 15 मार्च 2027, 10:51 – 22 मार्च 2027, 16:13
ये तारीख़ें कैसे चुनी गईं
चंद्रमा का नक्षत्र: स्थिर और मृदु नक्षत्र सबसे अच्छे — रोहिणी, मृगशिरा, उत्तराफाल्गुनी, चित्रा, अनुराधा, उत्तराषाढ़ा, उत्तराभाद्रपदा और रेवती — और पुष्य, हस्त, स्वाती, धनिष्ठा और शतभिषा भी (मुहूर्त चिंतामणि, वास्तु प्रकरण)।
मास: चांद्र मास मार्गशीर्ष, फाल्गुन, वैशाख, माघ, श्रावण या कार्तिक (अमांत गणना), और सूर्य मिथुन, कन्या, धनु या मीन में हो तो कभी नहीं (मुहूर्त चिंतामणि के वास्तु प्रकरण में उद्धृत नारद)। अधिक मास में कभी नहीं, शुक्र या गुरु के अस्त रहते कभी नहीं (सूर्य सिद्धांत के अंश: शुक्र 10°, वक्री होने पर 8°, गुरु 11°)।
तिथि: केवल दोनों पक्षों की द्वितीया, तृतीया, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी या त्रयोदशी, या पूर्णिमा — रिक्ता तिथि, अमावस्या, प्रतिपदा या अष्टमी नहीं (मुहूर्त चिंतामणि, वास्तु प्रकरण, हिंदी टीका सहित)।
वार: रविवार या मंगलवार कभी नहीं (मुहूर्त चिंतामणि, वास्तु प्रकरण)।
समय: केवल दिन का समय, सूर्योदय से सूर्यास्त तक।
दूसरी परंपरा: बी.वी. रमन (मुहूर्त) चैत्र, वैशाख, श्रावण, कार्तिक और माघ को महीने मानते हैं और मार्गशीर्ष, पौष और फाल्गुन को छोड़ते हैं — ये सूचियाँ मुहूर्त चिंतामणि में उद्धृत नारद और श्रीपति पर चलती हैं, और रमन के महीने साथ में बताती हैं।
ग्रहण के दिन कभी नहीं (मुहूर्त चिंतामणि के संस्कार प्रकरण में उद्धृत गर्ग: तब कोई शुभ काम नहीं, समय आ जाने पर भी)। ग्रहण पृथ्वी पर कहीं भी दिखे, गिना जाता है।
भद्रा (विष्टि करण) नहीं: इसे पूरा टाला गया है। इसके वास और पुच्छ के बारीक नियम नहीं लगाए गए, इसलिए यह सूची उन पंचांगों से कड़ी है जो उन्हें लगाते हैं।
योग: व्यतिपात या वैधृति कभी नहीं; बाक़ी अशुभ योगों का केवल आरंभ का भाग हटाया गया — विष्कम्भ 5 घटी, अतिगण्ड 6 घटी, शूल 7 घटी, गण्ड 6 घटी, व्याघात 9 घटी, वज्र 9 घटी, परिघ का पहला आधा (एक घटी = 24 मिनट; मुहूर्त चिंतामणि, शुभाशुभ प्रकरण)।
गंडांत: आश्लेषा, ज्येष्ठा और रेवती का अंतिम चरण और मघा, मूल और अश्विनी का पहला चरण हटाया गया (कालप्रकाशिका; मुहूर्त चिंतामणि इसे अपने विवाह प्रकरण में कहता है)।
राहु काल, यमगंड और गुलिक — वार के हिसाब से दिन के आठवें भाग — मुहूर्त के हर समय से हटाए गए (दक्षिण भारतीय परंपरा, कालप्रकाशिका)। कालप्रकाशिका ख़ुद गुलिक को अशुभ नहीं मानती; कई पंचांगों की तरह ये सूचियाँ उसे फिर भी हटाती हैं, इसलिए यहाँ ये थोड़ी कड़ी हैं।
हर समय में कम से कम एक घटी (24 मिनट) शुद्ध होनी चाहिए, और एक दिन में ज़्यादा से ज़्यादा तीन समय दिखाए गए हैं।
श्रेणी: "बहुत अच्छा", "अच्छा" और "सामान्य" नक्षत्र की श्रेणी, पसंदीदा वार (सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार) और शुक्ल पक्ष से बना मोटा क्रम है — कोई संभावना नहीं।
कड़ा मत क्या जोड़ता है
सिंहस्थ गुरु: गुरु मघा या पूर्वाफाल्गुनी के पहले चरण में हो तो भूमि पूजन (नींव) हर जगह वर्जित; सिंह के बाक़ी भाग में हो तो गंगा और गोदावरी के बीच और गुजरात, बंगाल व ओडिशा में वर्जित (नई दिल्ली भी इसी में आता है); सूर्य के मेष में रहते यह नियम नहीं लगता (मुहूर्त चिंतामणि, शुभाशुभ प्रकरण, और धर्मसिंधु)।
मकर गुरु: गुरु मकर में — केवल कोंकण, मगध, बंगाल और सिंध में वर्जित; नई दिल्ली में नहीं।
शुक्र या गुरु के अस्त होने से पहले के 7 दिन और उदय के बाद के 7 दिन (वृद्ध और बाल्य — धर्मसिंधु का मध्यम मत)।
श्रीपति के मास, मुहूर्त चिंतामणि के वास्तु प्रकरण में उद्धृत: सूर्य कुंभ में और फाल्गुन मास; सूर्य कर्क या सिंह में और श्रावण मास; सूर्य मकर में और पौष मास; सूर्य मेष या वृष में और वैशाख मास; सूर्य तुला या वृश्चिक में और मार्गशीर्ष मास। श्रीपति इन्हें घर के मुख से जोड़ते हैं — पहले तीन पूर्व या पश्चिम मुखी घर के लिए, आख़िरी दो उत्तर या दक्षिण मुखी घर के लिए; यह सार्वजनिक सूची मुख देखे बिना पाँचों जोड़े रखती है, इसलिए पूर्व या पश्चिम मुखी प्लॉट वाला परिवार कड़े मत के केवल पहले तीन जोड़ों वाले दिन ले, और उत्तर या दक्षिण मुखी प्लॉट वाला केवल आख़िरी दो वाले (व्यक्तिगत मुहूर्त आपके प्लॉट वाले जोड़े ही रखता है)।
पंचक नहीं — चंद्रमा धनिष्ठा के उत्तरार्ध से रेवती तक (मुहूर्त चिंतामणि, वास्तु प्रकरण की टीका; मांडव्य इसे खंभे खड़े करने पर लगाते हैं)।
हर संक्रांति के दोनों ओर 16 घटी (6 घंटे 24 मिनट) (बी.वी. रमन, मुहूर्त)।
होलाष्टक, फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से पूर्णिमा तक: मुहूर्त चिंतामणि (शुभाशुभ प्रकरण, शीघ्रबोध के हवाले से) इसे केवल ब्यास, रावी और सतलुज के क्षेत्र और पुष्कर में मानता है; नई दिल्ली में नहीं।
जो इन सूचियों में नहीं, वह आपके हाथ में
लग्न: ये सूचियाँ काम के पल की लग्न राशि नहीं देखतीं।
आपकी अपनी बातें: तारा बल और चंद्र बल आपके जन्म नक्षत्र और जन्म राशि पर निर्भर हैं। ये यहाँ नहीं देखे गए।
आपके प्लॉट के मुख के लिए श्रीपति का कौन सा जोड़ा है, यह यहाँ नहीं चुना गया (कड़ा मत मुख देखे बिना पाँचों रखता है), और पहले कहाँ खोदें तथा मालिक का सूर्य बल नहीं लगाए गए; फूस या लकड़ी का घर महीनों के नियम से बँधा नहीं, पर ये सूचियाँ हर घर पर यह नियम लगाती हैं।
ग्रहण पृथ्वी पर कहीं भी दिखे, गिना गया है (कड़ा पाठ); क्षय और वृद्धि तिथि, तिथि गंडांत, दग्ध और विष तिथि-वार योग और चंद्र बल का वेध किसी मत में नहीं लगाए गए।
इस पेज पर बताए नियमों के अलावा परिवार और स्थान की परंपराएँ।
अपने शहर या अपनी तारीख़ों के लिए
नक्षत्र या तिथि हर जगह एक ही पल बदलती है, पर हर जगह का सूर्योदय, सूर्यास्त और राहु काल अपना होता है, इसलिए दूसरे शहर का समय कुछ मिनट आगे-पीछे होता है, और बदलाव के पास वाला दिन छूट या जुड़ सकता है। मुहूर्त खोजक आपके शहर और आपकी तारीख़ों के लिए भूमि पूजन की सूची के दोनों मत निकालता है, एक बार में तीन महीने तक, और उसके नतीजों में नीचे वाली व्यक्तिगत जाँच भी मिलती है। किसी महीने से शुरू करें:
कुंडली से व्यक्तिगत मुहूर्त
सबके लिए बनी सूची आपके अपने नक्षत्र नहीं देख सकती। मुहूर्त चिंतामणि का गोचर प्रकरण दो व्यक्तिगत जाँचें जोड़ता है: तारा बल, यानी जन्म नक्षत्र से गिना गया दिन का नक्षत्र, और चंद्र बल, यानी जन्म राशि से गिनी गई चंद्रमा की राशि। जो दिन आम तौर पर अच्छा है, वह किसी एक व्यक्ति के लिए कमज़ोर हो सकता है।
व्यक्तिगत भूमि पूजन मुहूर्त आपकी सहेजी हुई कुंडली पढ़ता है: हर दिन का तारा बल और चंद्र बल, हर समय के भीतर इस काम के लिए ठीक लग्न का समय, आपके प्लॉट के मुख वाले महीने और आपके परिवार की परंपरा, एक मुहूर्त पत्र (पीडीएफ़) और रिमाइंडर। पूरे काम के लिए 101 सिक्के: भुगतान से पहले आप देखते हैं कि आपकी कुंडली की जाँच से पहले कितने दिन खुले हैं, और अगर कोई दिन आपकी कुंडली के अनुसार शुद्ध न निकले, तो कुछ नहीं कटता। या एक तारीख़ जाँचने के लिए 50 सिक्के — ये उसके जवाब के लिए हैं, तारीख़ शुद्ध निकले या नहीं।
या इस सूची की किसी एक तारीख़ के बारे में AI ज्योतिषी से पूछें: वह आपकी कुंडली में दर्ज स्थान के लिए दिन पढ़ता है और अपने जवाब के पीछे का नियम बताता है।
साइन इन करें, फिर अपनी कुंडली और शहर चुनें।
किसी तारीख़ को कुंडली से जाँचें
तारीख़ और काम लिखें। अगली स्क्रीन पर साइन इन करें और जन्म विवरण एक बार जोड़ें — आपका सवाल चैट में इंतज़ार करेगा।
नई दिल्ली के लिए प्रचलित मत में 33 दिन और कड़े मत में 8 दिन। सबसे ज़्यादा दिन नवंबर (11), फ़रवरी (7) और मई (7) में हैं। जनवरी, अप्रैल और जून से अक्टूबर में कोई दिन नहीं। इस पेज पर हर तारीख़ का समय IST में दिया है।
2027 में भूमि पूजन के लिए कौन-से महीने अच्छे हैं?
मुहूर्त चिंतामणि के वास्तु प्रकरण में उद्धृत नारद चांद्र मास मार्गशीर्ष, फाल्गुन, वैशाख, माघ, श्रावण या कार्तिक बताते हैं, और सूर्य मिथुन, कन्या, धनु या मीन में हो तो छोड़ते हैं। 2027 में नई दिल्ली के लिए: मार्गशीर्ष (1 जनवरी – 7 जनवरी), माघ (7 फ़रवरी – 8 मार्च), फाल्गुन (9 मार्च – 6 अप्रैल), वैशाख (7 मई – 4 जून), श्रावण (3 अगस्त – 31 अगस्त), कार्तिक (30 अक्टूबर – 28 नवंबर) और मार्गशीर्ष (29 नवंबर – 27 दिसंबर)।
क्या प्लॉट का मुख महीना बदल देता है?
मुहूर्त चिंतामणि में उद्धृत श्रीपति के नियम में हाँ: पूर्व या पश्चिम मुखी घर सूर्य के कुंभ में और फाल्गुन, कर्क या सिंह में और श्रावण, या मकर में और पौष में शुरू होता है; उत्तर या दक्षिण मुखी घर सूर्य के मेष या वृष में और वैशाख, या तुला या वृश्चिक में और मार्गशीर्ष में। यहाँ कड़ा मत पाँचों जोड़े रखता है; व्यक्तिगत मुहूर्त आपके प्लॉट वाले रखता है।
क्या खरमास या चातुर्मास में भूमि पूजन हो सकता है?
खरमास में नहीं: नारद घर शुरू करने के लिए सूर्य के धनु और मीन में रहने का समय छोड़ते हैं, इसलिए यहाँ दोनों मत वे महीने बंद रखते हैं। जिन ग्रंथों पर ये सूचियाँ चलती हैं, उनमें चातुर्मास निर्माण का नियम नहीं; बहुत-से परिवार परंपरा से देवउठनी एकादशी तक रुकते हैं।
कुछ सूचियाँ भूमि पूजन के दूसरे महीने क्यों बताती हैं?
सभी ग्रंथ एक जैसे महीने नहीं देते। मुहूर्त चिंतामणि में उद्धृत नारद और श्रीपति वे महीने देते हैं जो ये सूचियाँ लेती हैं; बी.वी. रमन चैत्र, वैशाख, श्रावण, कार्तिक और माघ बताते हैं, और मार्गशीर्ष, पौष और फाल्गुन छोड़ते हैं। कुछ सूचियाँ इन दोनों में से किसी पर नहीं चलतीं: एक बहुपठित वेबसाइट की 2027 की सूची ज्येष्ठ और आषाढ़ में भी दिन देती है, जो इनमें से कोई परंपरा नहीं देती। व्यक्तिगत मुहूर्त में आपका परिवार दोनों में से कोई भी परंपरा चुन सकता है।
क्या भूमि पूजन की ये तारीख़ें मेरे शहर के लिए भी यही हैं?
ज़्यादातर, पर मिनट तक नहीं। नक्षत्र या तिथि हर जगह एक ही पल बदलती है, पर सूर्योदय, सूर्यास्त और राहु काल स्थानीय हैं, इसलिए दूसरे शहर का समय कुछ मिनट आगे-पीछे शुरू और ख़त्म होता है, और जहाँ कोई बदलाव समय के किनारे के पास पड़ता है, वहाँ कोई दिन छूट या जुड़ सकता है। कड़ा मत कुछ नियम क्षेत्र के अनुसार भी पढ़ता है: सिंह का बाक़ी भाग, मकर गुरु और होलाष्टक। मुहूर्त खोजक आपके शहर के लिए दोनों मत निकालता है।